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चिटफंड कंपनियो की कुंडली तैयार कई ताला लगाकर भागी जानिए क्या कैसे हुआ?

www.nvrthub.com न्यूज़: रायपुर (छत्तीसगढ़) लगता अब बिना अनुमति के चलने वाली फर्जी चिटफंड कंपनियो की सामत आने वाली है क्योंकि रायपुर प्रशासन व पुलिस ने उन सभी कंपनियो की लिस्ट बना ली हैं जिनका संचालन यहाँ से किया जा रह है। अब तक 25 चिटफंड कंपनियों की कुंडली तैयार कर रही है। पुलिस ने उन सभी कंपनियों के कार्यालयों में जाकर उनके पंजीकरण से लेकर कारोबार की पूरी जानकारी जुटाने में लगी है। पंजीयन, कारोबार, स्कीम, कार्यक्षेत्र सभी बिंदुओं से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। यहां तक कि कंपनी के स्टाफ और एजेंटों की सूची भी मांगी जा रही है। इसके बाद पुलिस रजिस्ट्रार फर्म एवं सोसायटी और संचालक कोषा एवं लेख से भी पंजीयन की जानकारी लेगी। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।  इसमें से कुछ कंपनियों पर ताला भी लग चुका है। ऐसी कंपनियों की जानकारी जुटाने में दिक्कत हो रही है।
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पुलिस ने यहां आरबीआई के कार्यालय से भी चिटफंड कंपनियों की सूची निकाली है। आरबीआई ने ऐसी कंपनियों की सूची दी है, जो पंजीकृत हैं। अब पुलिस उस सूची के आधार पर पहले तो यह जानकारी जुटा रही है, कि उनकी शाखा यहां है या नहीं। जिनकी शाखा यहां है, उनके कार्यालय और अधिकारियों पर नजर रखी जा रही है। आरबीआई से पंजीकृत कंपनियां नियमों का कितना पालन कर रही है, उसका भी पता लगाया जा रहा है।

किन-2 कम्पनीज की सूची है  पुलिस के पास

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जांच मे लगे गये लेकिन रूल रेगुलेशन का पता नही

चिटफंड कंपनियों की जांच के लिए जिला प्रशासन की कमेटी तो बना दी गई है, लेकिन उसे अब तक यही नहीं मालूम कि किस प्रावधान के तहत जांच और कार्रवाई की जाए। इसके लिए कमेटी के अध्यक्ष वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर चिटफंड कंपनी एक्ट के प्रावधानों की जानकारी मांगी है।

कैसे हुई कार्यवाही शुरू?

चिटफंड कंपनियों की शिकायतें जॉब्स कलेक्टोरेट से लेकर राज्य सरकार तक पहुंची तो हड़कंप मच गया। मुख्य सचिव ने कलेक्टर को कमेटी गठित कर चिटफंड कंपनियों की जांच के निर्देश दिए। आनन-फानन में जिला प्रशासन ने कोषालय अधिकारियों की पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने केवल एक कंपनी एचबीएन के दस्तावेज जब्त किए हैं। दो-तीन कंपनियों से दस्तावेज मांगे गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद किस तरह की जांच और कार्रवाई करनी है, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। इसी कारण कमेटी ने राज्य सरकार से एक्ट के तहत मार्गदर्शन मांगा है। चार-पांच दिन हो गए हैं, लेकिन राज्य सरकार से मार्गदर्शन नहीं मिल सका है। इस वजह से कमेटी अचरज में है की आगे क्या कदम उठाना चहिये।
 
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