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तीन चिटफंड कंपनिया क्यों हुई सील पढिये पूरी खबर

www.nvrthub.com न्यूज़: बलौदाबाजार शहर (छत्तीसगढ़) की तीन चिटफंड व इन्वेस्टमेंट कंपनियों में शनिवार दोपहर को तहसीलदार और उनकी टीम ने एक के बाद एक छापेमारी कर कार्रवाई की। ये तीनो ही कंपनिया पूरी तरह से फर्जी पाई गयी क्योंकि ना तो इनके पास कोई भी संतोषजनक डॉक्यूमेंट की पुष्ठी हुई है।
 
क्या अनिवार्य है चिटफण्ड के लिए?
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा एनबीएफएस पत्र सेबी द्वारा प्राधिकर पत्र तथा राज्य में वित्तीय कार्य करने के लिए अनापति व अनुमति पत्र। अधिकारियों का कहना है कि कंपनियों को सील कर दिया गया है व उचित कार्यवाही की जा रही है।
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किन किन कंपनियों पर हुई कार्यवाही?
गौरवपथ स्थित इन्वेस्टमेंट कंपनी निर्मल इस कंपनी के पास कोई भी दस्तावेज नही मिला और ना ही कोई अधिकारी मिला। इसके बाद मिलियन माइल्स इंफ्रास्ट्रक्चर इन डेवलेपर्स लिमिटेड कंपनी मे छापेमारी के दौरान चौकाने वाले तथ्य सामने आए महज डेढ़ साल पहले खुली इस कंपनी में 600 एजेंट कार्यरत हैं  और इसमें पिछले एक साल में लोगों ने 8 करोड़ रुपए का इंवेस्टमेंट किया है। इस कंपनी का रीजनल मेनेजर हरियाणा राज्य के अम्बाला शहर का रहने वाला जिसका नाम नदीम अहमद खान पिता एआर अहमद खान बतलाया गया है।
वहीं यदि तीसरी कंपनी अंबेडकर चौक स्थित गरिमा होम एंड फार्म हाउस लिमिटेड बात की जाये तो इस कंपनी मे डेली का छ: लाख रूपये का टर्नओवर है और जब अधिकारियों ने डाक्यूमेंट्स की जांच पड़ताल की तो पता लगा के इसमें अब तक अरबो रूपये से ज्यादा इन्वेस्ट हो चुके हैं। और यह कंपनी महज चार साल पहले खुली है। इसमें ग्रामीण इलाको के एजेंट व ग्रामीणों ने इन्वेस्ट किया है।
बड़े बड़े किराये के मकानों मे ऑफिस किये बैठे ये चिटफंड माफिया ग्रामीण एजेंटो के माध्यम से भोले भले ग्रामीणों को अपना शिकार बनाते हैं जिसमे इन्वेस्ट करने वाले एजेंटो के जानकार या रिश्तेदार होते हैं जिसमे कमीशन एजेंटो को 30% से 40% कमीशन देने का प्रलोभन व इन्वेस्टर को दोगुना करने पैसा करने भरोसा
किसानो ने बड़े घरानों की सीमेंट कंपनीयो को बेचीं गयी जमींन से आये पैसे को सही ढंग से इन्वेस्ट ना करने व नासमझी के कारण इस तरह की कंपनियो के झोल मे फंस जाते हैं और कंगाल हो जाते हैं कुछ किसानो ने तो इन कंपनियो मे 20 लाख रूपये तक जमा कराए गये है।
 
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