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भारत में क्या नाबालिगो के लिए सजा का प्रावधान जाने आगे......

बायोलॉजिकल उम्र की मांग इंसानकी उम्र तय करने के दो तरीके हैं, क्राेनोलॉजिकल और बायोलॉजिकल। क्रोनोलॉजिकल उम्र की गणना जन्म की तारीख से होती है, वहीं बायोलॉजिकल उम्र व्यक्ति की शारीरिक क्षमताओं के आधार पर पता की जाती है। माना जाता है कि व्यक्ति में हालात और मानसिकता के आधार पर शारीरिक परिवर्तन होते हैं, जिससे कई बार कम उम्र का व्यक्ति वयस्कों की तरह और वयस्क व्यक्ति नाबालिगों की तरह व्यवहार कर सकता है। आपराधिक मामलों में लोगों की उम्र पता लगाने के लिए दुनियाभर में उसकी बायोलॉजिकल उम्र को ही आधार बनाया जाता है। इसमें डॉक्टर अपराधी की हडि्डयों और दांतों की जांच से उसकी उम्र का पता लगाते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यह मांग उठा चुका है कि दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में दोषी की उम्र बायोलॉजिकल तरीके से तय होनी चाहिए।
 

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सुप्रीम कोर्ट ने किशोर न्याय अिधनियम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकारी नौकरियों की तरह इन अपराधों के लिए कट ऑफ डेट तय नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने सरकार से इस कानून की समीक्षा कर जरूरी बदलाव के निर्देश दिए हैं। सरकार किशोरों की उम्र 16 वर्ष करना चाहती है।

बच्चा क्यों बनता है अपराधी?

सोशलॉजिस्ट
समाजशास्त्रीमानते हैं कि उम्र नहीं बच्चों का व्यवहार अपराध का आधार होता है। जैसे- आवारागर्दी करना, चरित्रहीन व्यक्तियों के संपर्क में रहना, अश्लील भाषा का उपयोग करना और पैरेंट्स की बात मानना। सामाजिक दृष्टि से स्कूल से भागने को भी अपराध माना जाता है, लेकिन कानूनी रूप से यह अपराध नहीं है।

एंथ्रोपोलॉजिस्ट
मानवशास्त्रीऔर शरीरविज्ञानी मानते हैं कि अपराध की प्रवृत्ति वंशानुगत, शारीरिक बनावट और जाति आधारित होती है। एक जैसी शारीरिक बनावट वाले एक जैसे अपराध करते हैं। इसी तरह अपराधी जाति से संबंध रखने वाले भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपराध करते हैं। उनके अपराध की प्रवृत्ति भी ज्यादातर एक जैसी ही पाई जाती है।

सायकोलॉजिस्ट
मनोविज्ञानियोंने साबित किया है कि अपराध का संबंध वंशानुक्रम और शारीरिक बनावट से नहीं है। इनका भावनाओं और आकांक्षाओं से सीधा संबंध नहीं है। वातावरण भी जिम्मेदार नहीं हो सकता, क्योंकि एक ही परिवेश और परिवार में पले सभी भाई-बहन अपराधी नहीं होते।
अमेरिका में क्या कहता है बालिगो के लिए कानून
अमेरिका में यूं तो 18 वर्ष से कम उम्र वालों को नाबालिग माना जाता है, लेकिन किशोर उम्र वाले ने हत्या और दुष्कर्म या अन्य कोई गंभीर अपराध किया है तो उसका केस जुवेनाइल कोर्ट से वयस्कों की कोर्ट में ट्रांसफर हो जाता है। उन्हें उम्रकैद भी हो सकती है। यहां राज्यों के भी अपने-अपने नियम हैं। जैसे- न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना, साउथ कैरोलिना, न्यू हैंपशायर और टेक्सास में 17 साल से कम उम्र वालों को किशोर माना जाता है। लेकिन गंभीर अपराध करने पर 16 साल वाले को भी बड़ों जैसी सजा दी जा सकती है। केंटुकी प्रांत में तो 14 साल में भी बड़ों जैसी सजा दे दी जाती है।
द ग्रेट ब्रिटेन में क्या है कानून
यहां 10 से 18 साल की उम्र वालों के लिए जुवेनाइल कोर्ट हैं, लेकिन 10 साल से अिधक उम्र वाला भी गंभीर अपराध करे तो उसका केस क्राउन कोर्ट में ट्रांसफर हो जाता है। पहले यहां भी किशोर अपराधियों के लिए पुनर्वास का प्रावधान था, लेकिन 1993 में जेम्स बल्जर नामक बच्चे की 10 साल के दो बच्चों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद कानून में संशोधन किया गया। स्कॉटलैंड में 16 साल तक बच्चों को किशोर माना जाता है, जबकि आपराधिक जवाबदेही के लिए यह सीमा 12 साल है, जो पहले आठ साल थी।
ऑस्ट्रेलिया में जुइवेनैल सविधान व् सजा के क्या क्या हैं प्रावधान यहां के संविधान में कहा गया है कि अगर बच्चा 12 साल का है तो वह बेहतर ढंग से समझता है कि सही काम क्या है और गलत काम क्या है। इस अहसास के बाद भी अगर वह गलत काम करता है तो वह बाल अपराधी नहीं, बल्कि सामान्य अपराधी है। उसके साथ वही बरताव होना चाहिए, जो बालिग अपराधी के साथ होता है। ऐसे अपराधी को उम्र के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। इस कानून के मुताबिक यहां 12 वर्ष से अिधक की उम्र वालों को वही सजा दी जाती है, जो एक वयस्क व्यक्ति के लिए होती है।
जापान में क्या कानून यदि कोई बच्चा अपराध करता है तो?
जापान में 20 वर्ष से कम उम्र तक के बच्चों को नाबालिग माना जाता है, लेकिन वहां गंभीर अपराध करने पर किशोर को भी कड़ी सजा देने का प्रावधान है। यहां 2010 में 19 साल के नाबालिग को मौत की सजा सुनाई गई थी। उसने दो महिलाओं की हत्या की थी। यहां अनुबंध या वसीयत का अिधकार 15 वर्ष की उम्र में मिल जाता है। लिहाजा इन मामलों में सजा भी 15 साल की उम्र में हो सकती है। ताईवान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड में भी कुछ ऐसा ही कानून है।

भारत में क्या है कानून की बंदिशे व रूल्स
भारत में सात साल से कम उम्र के बच्चे का कृत्य अपराध नहीं माना जाता। फिर 12 साल तक की उम्र वालों का अपराध इसलिए अपराध नहीं माना जाता, क्योंकि उन्हें इसके परिणाम की समझ नहीं होती। इसके बाद 18 वर्ष से कम उम्र तक उन्हें नाबालिग माना जाता है। यानी उन्हें अपराध करने की सजा नहीं मिलती, बल्कि उन्हें बाल सुधार गृह भेजा जाता है। वर्ष 2000 में एक्ट में संशोधन कर जुवेनाइल की उम्र 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष की गई थी।

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Bitcoin is a cryptocurrency, which is a form of electronic cash. This is the first decentralized digital currency: the system was designed to work without a central bank or a single administrator. Many economists and investors consider the Bitcoin market to be a bubble. Bitcoin has also been criticized for its use in illegal transactions, its high power consumption, price instability, and theft from exchanges.

What Is Real Cryptocurrency
Bitcoin is made as a reward for the process known as mining. They can be exchanged for other currencies, products and services. The research produced by Cambridge University estimates that in 2017, there were 2.9 to 5.8 million unique users using cryptocurancency wallet, most of which used bittoine. A cryptocurrency (or crypto currency) is a digital asset designed to work as a medium of exchange that uses cryptography to secure its transactions, to control the creation of additional units, and to verify the transfer of assets. Cryptocurrencies are classified as a subset of digital currencies and are also classified as a subset of alternative currencies and virtual currencies.

Bitcoin, created in 2009, was the first decentralized cryptocurrency. Since then, numerous cryptocurrencies have been created. These are frequently called altcoins, as a blend of bitcoin alternative. Bitcoin and its derivatives use decentralized control as opposed to centralized electronic money/central banking systems . The decentralized control is related to the use of bitcoin's blockchain transaction database in the role of a distributed ledger
 
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