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नागपुर के डॉक्टरों ने आपरेशन के बाद महिला को दिया जीवनदान

uterus operation
बेल्जियम की महिला का केस पढ़ सर्जन की टीम हुई उत्सुक अनोखा: सीटी स्कैन में खुलासे के बाद सर्जन की टीम ने इसी प्रकार के मामलों के संबंध में चिकित्सा साहित्य को खंगाला और एक बेल्जियम की महिला के बारे में पढ़ा जिसके शरीर में एक्टोपिक यह महिला 1978 में 24 साल की उम्र में गर्भवती हुई थी लेकिन उसकी हालत ऐसी थी कि उसका शिशु गर्भाशय से बाहर विकसित हो रहा था। इसके चलते गर्भपात कर दिया गया।

अपने किस्म के एक अनोखे आपरेशन में डाक्टरों के एक दल ने 36 साल बाद एक 60 वर्षीय महिला के गर्भाशय से उसके अजन्मे शिशु का कंकाल आपरेशन के जरिए निकाला। किसी महिला के शरीर में एक्टोपिक भ्रूण के रहने की यह संभवत: सबसे लंबी अवधि है ।

मध्य प्रदेश के पिपरिया (सिओनी) की रहने वाली महिला कांताबाई गुणवंते ठाकरे का नागपुर के एनकेपी साल्वे इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल सांइसेज के डाक्टरों की एक टीम ने आपरेशन किया। इस टीम में लता मंगेशकर हास्पिटल के डाक्टर भी शामिल थे। यह महिला पिछले सप्ताह ओपीडी में आई थी। महिला को पिछले दो महीने से पेट में लगातार दर्द हो रहा था। जांच करने पर डाक्टरों को उसके पेट के दाहिनी ओर निचले हिस्से में कुछ गांठ सी महसूस हुई और उन्हें लगा कि यह कैंसर है। सोनोग्राफी से भी गांठ होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद एक सीटी स्कैन में खुलासा हुआ कि यह गांठ एक कठोर और भुरभुरी चीज है।

अस्पताल में सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मुर्त्जा अख्तर ने बताया कि इसके बाद मरीज का एमआरआई किया गया। उसके बाद डाक्टरों को पता चला कि वास्तव में यह गांठ एक शिशु का कंकाल थी। सर्जनों की टीम की अगुवाई करने वाले डॉ. बीएस गेदाम ने बताया कि हमने मरीज का विस्तृत मेडिकल इतिहास जानने की कोशिश की और उसके भाई ने बताया कि 1978 में वह गर्भवती हुई थी और उसे कुछ परेशानियां थीं। इससे पूर्व शहर के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला को बताया था कि उसका भ्रूण हो सकता है कि उस समय मर गया हो और उसे अब आपरेशन करवाना पड़ेगा।

महिला का आपरेशन करने के बाद डाक्टरों की टीम ने पाया कि बड़ी गांठ में एक पूर्ण विकसित शिशु का कंकाल था। यह गांठ गर्भाशय, आंत और पेशाब की थैली के बीच थी और आसपास के सभी अंगों के साथ गहरे से सटी हुई थी। डॉ. अख्तर ने बताया कि भ्रूण की रक्षा करने वाला गर्भाशय का पानी हो सकता है सूख गया हो और नरम उत्तक समय बीतने पर तरल हो गए और थोड़े से पानी के साथ केवल हड्डियों का एक थैला सा बचा था। पिछले कुछ महीने से महिला को दर्द और पेशाब में दिक्कत तथा बुखार आ रहा था। उन्होंने बताया कि गांठ के मूत्र नली पर दबाव डालने के कारण दर्द हो रहा था और इससे गुदरे का कामकाज भी बाधित हो रहा था। महिला का 14 अगस्त को आपरेशन किया गया जो चार घंटे तक चला। डॉ. गेदाम ने बताया कि महिला की हालत तेजी से सुधर रही है।
 
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