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एक अगस्त से सात अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्ट फीडिंग वीक स्पेशल

mother milk feed tips
सबकी कहानी लगभग ऐसी ही होती है: साक्षी मल्टिनेशनल कंपनी में जॉब करती हैं। तीन महीने पहले उन्हें बेबी हुआ है। उनका यह पहला बेबी है। न्यूक्लियर फैमिली होने के कारण उन्हें घर के काम और बेबी की देखरेख दोनों चीजे साथ-साथ करने में काफी प्रॉब्लम हो रही है। नेहा का कहना है कि कुछ ही महीने बाद उसे अपनी जॉब भी वापस जॉइन करनी है। ऐसे में वह अपने बेबी को बॉटल से दूध पीने की आदत अभी से डालना चाहती हैं। ऐसा करने की कोशिश में कई बार बच्चा बीमार भी हुआ। जॉब जॉइन करने, फिगर मैंटेन करने और मॉर्डन लाइफ स्टाइल के चक्कर में ज्यादातर महिलाएं बच्चे को अपना दूध छुड़ाकर जल्दी से जल्दी से उन्हें बॉटल से दूध पिलाने की आदत डालना चाहती हैं जो कि बच्चे की सेहत के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।

जरूरी है मां का मिल्क (Why Mother Feed is Important for Baby)

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बोतल से नुकसान (How to Avoid Bottle Feeding to Baby Bone)
ज्यादातर महिलाएं इसलिए भी बच्चे को बोलत से दूध पिलाने की आदत डालना चाहती हैं जिससे बच्चे को कहीं बाहर ले जाने में दिक्कत न हो और भूख लगने पर बच्चे को कहीं भी दूध पिलाया जा सके।

ऐसा करना गलत है क्योंकि बोतल से दूध पिलाने से पहले बोतल को कम से कम आधा घंटा पहले उबालना जरूरी होता है। लेकिन ज्यादातर लोग ऐसा नहीं करते जिस कारण को बच्चे को इंफेक्शन होने का खतरा रहता है।

बोतल में खासकर उसकी निप्पल के आसपास दूध जम जाता है जिसमें बैक्टिरिया पैदा हो जाते हैं। ऐसे में अगर बच्चे को उस बोतल से दूध पिलाया जाए तो बच्चे के पेट में इंफेक्शन हो जाएगा। बच्चे को दस्त और डायरिया भी सकता है।

माँ का दूध पिलाने के बाद इन बातों रखें ख्याल (Precaution After Feeding to Child)

मां का दूध पीते-पीते अक्सर बच्चे सो जाते हैं। ऐसे में बच्चे को सुलाएं नहीं बल्कि उसे जगाकर पूरा दूध पिलाएं। इससे बच्चे का पेट पूरी तरह भर जाएगा और वह आराम से पूरी नींद सोएगा।

बच्चे को दूध पिलाने के बाद उसे सीधा न सुलाएं बल्कि करवट देकर सुलाएं। दूध पीने के बाद बच्चे के गले में थोड़ा सा दूध रह जाता है और
सीधा सुलाने से उस दूध के गलत जगह जाने का डर रहता है जिससे परेशानी हो सकती है।
दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे से लगाकर 2-5 मिनट तक उसकी पीठ और कमर को सहलाकर उसे डकार दिलवाएं। इससे बच्चे का दूध सही से पच जाता है और एक्स्ट्रा दूध बच्चे के मुंह से बाहर निकल जाता है।

क्यों जरूरी है मां का दूध? (Facts of Mother Milk for Baby)

एनडीएमसी में मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिल बंसल का कहना है कि छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम काफी कमजोर होता है। उनकी बॉडी में बिमारियों से लड़ने की ताकत कम होती है ऐसे में अगर मां बच्चे को अपना दूध पिलाएंगी तो मां के अंदर मौजूद एंटी बॉडीज दूध के जरिए बच्चे में भी आ जाते हैं। ऐसे में बच्चे को किसी तरह का इंफैक्शन या कोई और बीमारी होने का खतरा नहीं रहता।

मां के दूध में प्रोटीन और विटामिन जैसी बहुत सी ऐसी चीजे होती हैं जो कि न सिर्फ बच्चे की हेल्थ के लिए अच्छी होती है बल्कि उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी काफी अच्छी होती हैं।
मां का पहला दूध तो बच्चे के लिए बहुत ही ज्यादा अहम होता है। मां के पहले दूध में Colostrums होता है। यह पीले रंग का गाढ़ा दूध होता है। अक्सर इस दूध को देखकर लोग इसे बच्चे को पिलाने से मना कर देते हैं जबकि यह गलत है। यह दूध बच्चे को जरूर पिलाना चाहिए। इस दूध से बच्चे का इम्यून सिस्टम स्ट्रॉग होता है।

कब तक जरूरी (Time Period of Baby Feeding of Mother Milk)

  • बच्चे के पैदा होने के बाद से ही मां को उसे अपना दूध पिलाना चाहिए।
  • कम से कम छह महीने तो बच्चे के लिए मां का दूध बहुत जरूरी होता है।
  • छह महीने के बाद भी कम से कम सालभर तक मां को अपना दूध पिलाते रहना चाहिए। हां, छह महीने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ-साथ दलिया, दाल का पानी आदि बाकी फूड भी देना शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि इस समय बच्चा ग्रोइंग ऐज में होता है।
  • दिन में कितनी बार जरूरी माँ के दूध की फीडिंग
  • पूरे दिन में बच्चा जितनी बार भी रोए या दूध मांगे तो उसे अपना दूध जरूर पिलाएं।
  • आलस में या बिजी होने के कारण बच्चे के रोने या उसके भूखे होने को अवॉयड न करें।

मां का दूध न मिलने के नुकसान
  • जिन बच्चों को मां का दूध भरपूर मात्रा में नहीं मिलता वे बच्चे बाकी बच्चों के मुकाबले कमजोर होते हैं और हमेशा बीमार रहते हैं।
  • मां का दूध सही से न मिलने पर बच्चों की शारीरिक और मानसिक ग्रोथ पर असर पड़ता है।
  • बच्चे का इम्यूनिटी सिस्टम भी काफी कमजोर हो जाएगा। ऐसे में रोगों से लड़ने की उसकी क्षमता तो कम हो ही जाएगी साथ ही बच्चा जल्दी-जल्दी बीमार भी होगा।

कई महिलाएं कुछ ही समय बाद बच्चे को अपने दूध की बजाय गाय का दूध पिलाना शुरू कर देती हैं। ऐसा करना सही नहीं है क्योंकि गाय के दूध को या किसी भी दूध को उबालने पर उसके अंदर मौजूद प्रोटीन ओर विटामिन आदि कम हो जाते हैं। इसके अलावा दूध में मिलावट भी हो सकती है जो कि बच्चे की हेल्थ के लिए नुकसानदायक होता है।

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How we work

Bitcoin is a cryptocurrency, which is a form of electronic cash. This is the first decentralized digital currency: the system was designed to work without a central bank or a single administrator. Many economists and investors consider the Bitcoin market to be a bubble. Bitcoin has also been criticized for its use in illegal transactions, its high power consumption, price instability, and theft from exchanges.

What Is Real Cryptocurrency
Bitcoin is made as a reward for the process known as mining. They can be exchanged for other currencies, products and services. The research produced by Cambridge University estimates that in 2017, there were 2.9 to 5.8 million unique users using cryptocurancency wallet, most of which used bittoine. A cryptocurrency (or crypto currency) is a digital asset designed to work as a medium of exchange that uses cryptography to secure its transactions, to control the creation of additional units, and to verify the transfer of assets. Cryptocurrencies are classified as a subset of digital currencies and are also classified as a subset of alternative currencies and virtual currencies.

Bitcoin, created in 2009, was the first decentralized cryptocurrency. Since then, numerous cryptocurrencies have been created. These are frequently called altcoins, as a blend of bitcoin alternative. Bitcoin and its derivatives use decentralized control as opposed to centralized electronic money/central banking systems . The decentralized control is related to the use of bitcoin's blockchain transaction database in the role of a distributed ledger
 
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