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act for child and corporal punishment
पिछले दिनों आंध्र प्रदेश के काकीनाड़ा में तीन ब्लाइंड स्टूडेंट्स को स्कूल टीचर द्वारा पीटे जाने के मामले में एनएचआरसी ने आंध्र प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके साथ भी कई राज्यों में इस तरह के केस समय अन्तराल के बाद आते रहते हैं समय-2 पर हाई कोर्ट ने कॉरपोरल निशमेंट (शारीरिक सजा) को गैरकानूनी और असंवैधानिक कहा है। एनसीपीसीआर (नैशनल कमिशन फॉर प्रोटक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स) ने भी कॉरपोरल पनिशमेंट को रोकने के लिए गाइडलाइंस जारी की हुई हैं। यह जानना जरूरी है कि कॉरपोरल पनिशमेंट कहते किसे हैं और इसके लिए क्या कानूनी प्रावधान हैं।

क्या है कॉरपोरल पनिशमेंट (Corporal Punishment in India)

ऑल इंडिया पैरंट्स असोसिएशन के अध्यक्ष व जाने-माने वकील अशोक अग्रवाल बताते हैं कि एनसीपीसीआर ने कॉरपोरल पनिशनमेंट को रोकने के लिए गाइडलाइंस बनाए थे। केंद्र सरकार ने तमाम स्कूलों को उसे लागू करने के लिए सर्कुलर जारी किया हुआ है। इसके तहत बच्चों के साथ की जाने वाली किसी भी तरह की प्रताड़ना को कॉरपोरल पनिशमेंट माना गया है। अगर बच्चों का शारीरिक तौर पर किसी भी तरह से शोषण किया जाता है तो वह कॉरपोरल पनिशनमेंट है। अगर उन्हें पीटा जाता है या कुछ ऐसा किया जाता है कि वे असहज महसूस करें या किसी भी तरह से शारीरिक नुकसान पहुंचाया जाता है मसलन चाटा मारना, कान ऐंठना आदि तो यह सब कॉरपोरल पनिशमेंट के दायरे में होगा। बच्चे को किसी खास पोजिशन में खड़ा रखना, बेंच पर खड़ा करना, मुर्गा बनाना, कान पकड़कर खड़ा रखना, गलत तरीके से पुकारना भी इसी दायरे में है। बच्चे को किसी भी तरह से शारीरिक या मानसिक तौर पर नुकसान पहुंचता है तो वह कॉरपोरल पनिशनमेंट माना जाएगा।

आरटीई में भी है जिक्र (RTE Right to Education What Say)

कानूनी जानकार बताते हैं कि राइट टु एजुकेशन एक्ट में भी कॉरपोरल पनिशमेंट का जिक्र है। राइट टु एजुकेशन एक्ट-17 में प्रावधान है कि अगर कोई टीचर किसी स्टूडेंट को मानसिक या शारीरिक तौर पर प्रताड़ित करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। हालांकि आरटीई में इसे गंभीर नहीं माना गया है। अशोक अग्रवाल बताते हैं कि अगर कानून में संशोधन कर आरटीई में इसे गंभीर मिसकंडक्ट करार दिया जाएगा तो इसके लिए दोषी टीचर की नौकरी भी जा सकती है। फिलहाल आरटीई के तहत इस मामले में सर्विस रूल्स के तहत ही कार्रवाई का प्रावधान है।

पुलिस केस भी हो सकता है (Corporal Punishment Police Case would be File)

जूवनाइल जस्टिस एक्ट-23 में कहा गया है कि अगर बच्चा किसी की देखरेख में है और उसे मानसिक या शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है तो दोषियों पर जुर्माना और 6 महीने तक की कैद हो सकती है। अगर किसी बच्चे को स्कूल में प्रताड़ित किया जाता है तो पैरंट्स स्कूल प्रशासन के अलावा, नैशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स और राज्य सरकार के एजुकेशन डिपार्टमेंट में शिकायत कर सकते हैं। पुलिस में भी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है। अगर बच्चे के साथ मारपीट की गई है तो पुलिस आईपीसी की धारा-323 (मारपीट), 324 (जख्मी करना), 325 (गंभीर जख्म पहुंचना) के तहत मामला दर्ज कर सकती है।

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