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जानिए जेनेरिक दवा के बारे में क्या होती हैं क्या है इसके पीछे भ्रम क्या होती है ब्रांडिंग दवाईयो

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भारत में दवा का व्यापार बेहिसाब मुनाफे वाला है। दरअसल इसमें मोल-भाव होता है, ही आपको अपनी पसंद के हिसाब से ब्रांड चुनने की आजादी होती है। डॉक्टर की सलाह इसमें सर्वोपरि होती है। उससे हटकर अगर आप कुछ बेहतर विकल्प भी चुनें तो सेहत खराब होने की डॉक्टर की जवाबदेही खत्म हो जाती है। वह दो टूक कह देता है कि आप अपनी मर्जी से दवा लेते हैं तो मैं कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकता। ऐसे में मरीज बेहिसाब महंगी मेडिसिन खरीदने को मजबूर होता है, जबकि बाजार में उसी गुणवत्ता वाली बेहद सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं। भारत में करीब 20-25 साल पहले जब जेनेरिक दवाओं को खुला बाजार मिला तो कई बड़ी ब्रांडेड कंपनियों ने पेटेंट और कॉपीराइट जैसे मुद्दों को उठाया और इन दवाओं को मरीजों तक पहुंचने से रोकने के कई प्रयास किए। हालांकि, पेटेंट के नए नियमों, सरकारी प्रयासों और जनता की जागरुकता से काफी दिक्कतें दूर हुई हैं, फिर भी बाजार में जेनेरिक मेडिसन की खपत कुल दवा बाजार की तुलना में अभी 10 से 12 फीसदी ही है। मुनाफा, कमीशन और उपहार के लालच में दवा कंपनियां, मेडिकल कारोबारी और डॉक्टर कोई भी नहीं चाहता कि जेनेरिक मेडिसन की मांग बढ़े। ऐसे में नियमों को सख्ती से लागू करना जरूरी है। जनता भी कोशिश करे कि जेनेरिक मेडिसिन की ही मांग करे।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला किया है कि वह जेनेरिक दवाओं की अनुपलब्धता पर गौर करेगी। ताकि सभी को ये आसानी से उपलब्ध हों। बाजार में लगभग हर तरह की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हैं, जिनके दाम ब्रांडेड दवाओं से बहुत कम हैं।

क्या-2 फायदे हैं जेनेरिक दवाओ के: क्या ये पूरी तरह भरोसेमंद हैं ये सभी

ये दवाएं ब्रांडेड दवाओं के बराबर ही फायदेमंद होती हैं। इसके साइड इफेक्ट भी वैसे ही होंगे। इन्हें बाजार में उतारने के लिए ठीक वैसे ही अनुमति और लाइसेंस लेना होता है, जैसा कि एक ब्रांडेड दवा के लिए जरूरी होता है। इन्हें ब्रांडेड दवा की ही तरह गुणवत्ता मानकों की तमाम प्रक्रियाओं से गुजरना होता है, इसलिए इन्हें पूरी तरह भरोसेमंद कहा जा सकता है। जांच में अगर इनकी गुणवत्ता में कमी हो तो कड़ी सजा का प्रावधान भी होता है।
सबसे बड़ा लाभ: जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं से औसतन दस से बीस गुना तक सस्ती होती हैं। कई बार तो इनके दामों में इससे भी ज्यादा अंतर होता है। जैसे कोलेस्ट्रॉल घटाने की दवा एस्ट्रोवेस्टाटिन 10 मिलीग्राम में यदि ब्रांडेड में हो तो इसकी सालभर की खुराक करीब 2300 रुपए की है, वहीं इसकी जेनेरिक दवा महज 365 रुपए के आसपास आती है। गरीब हो या अमीर सबके लिए यह अंतर बहुत बड़ा है।
 
इतनी सस्ती क्यों?:  जेनेरिकमेडिसन का ब्रांड और कंपनी का दिया हुआ कोई स्पेशल नाम नहीं होता, इसलिए इसका विज्ञापन करने या एमआर के जरिए प्रमोट करने की जरूरत नहीं होती। तमाम खर्च और कमीशन बचाने से इनकी लागत कम हो जाती है, इसलिए ये सस्ती होती हैं। इन दवा के दामोंपर ब्रांडेड दवा की ही तरह सरकार का नियंत्रण होता है। इसलिए मनमानी लगभग असंभव है। फिर भी अलग-अलग कंपनियों की जेनेरिक मेडिसिन के दामों में फर्क होता है।

क्या हैं जेनेरिक दवाएं? :वह दवा जो किसी ब्रांड नाम से नहीं बनाई जाती, बल्कि उस नाम से बनाई जाती है, जो इसकी विशेषज्ञ समिति ने तय किया है जेनेरिक मेडिसिन या सामान्य दवा कहलाती है। इसमें वही तत्व मिले होते हैं, जो एक ब्रांडेड दवा में होते हैं। जेनेरिक दवा का नाम पूरी दुनिया में एक ही होता है। जैसे- बुखार और दर्द को दूर करने वाली पैरासिटामॉल की टेबलेट हर कंपनी अलग-अलग नामों से बनाती है, लेकिन यदि यह जेनेरिक होगी तो इस पर सिर्फ पैरासिटामॉल लिखा होगा। जेनेरिक मेडिसन को ‘इंटरनेशनल नॉन प्रॉपराइटी नेम मेडिसिन””””””’ भी कहा जाता है।

सख्ती और जागरुकता    कैसे की जा सकती है जिससे की सस्ता इलाज उपलब्ध हो सके
भ्रम और सच्चाई: जेनेरिक दवाओं के बारे में आम धारणा है कि इनकी गुणवत्ता ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले अच्छी नहीं होती, लेकिन ऐसा नहीं है। जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के बराबर ही गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी होती हैं। लाभ के लिए कई बार डॉक्टर भी जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठा देते हैं, जो बेबुनियाद होते हैं।
जानकारी कम या जानकारी के आभाव में ऐसा होता है
तमिलनाडुऔर राजस्थान सहित कुछ प्रदेशों में जेनेरिक दवाओं के प्रचार-प्रसार और इसे जनता तक पहुंचाने के लिए सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा हर प्रदेश में होना चाहिए। इससे जनता में जागरुकता आएगी। फिलहाल तो जेनेरिक दवाओं के बारे में लोगों को जानकारी भी बहुत कम है।
 
ऐसे प्राप्त करें जेनेरिक: डॉक्टर से कहें कि वह जेनेरिक मेडिसिन ही लिखें। ज्यादा चलन में नहीं होने के कारण दवा व्यापारी भी हर तरह की जेनेरिक मेडिसिन नहीं रखते। यदि आप कोई दवा नियमित रूप से ले रहे हैं तो मेडिकल वाले से कहें कि वह उस दवा की अच्छी क्वालिटी वाली जेनेरिक मेडिसिन उपलब्ध करवाए।
कंपनियों की मनमानी
कंपनी कई बार दावा करती है कि वह किसी दवा को बहुत अधिक  कीमत पर इसलिए बेचती है, क्योंकि उसकी रिसर्च पर बहुत खर्च आता है। लेकिन जानकार मानते हैं कि कंपनियों के इस तरह के दावे हमेशा सही नहीं होते। वे इसकी अाड़ में बेहिसाब मुनाफा कमाना चाहती हैं।
 
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