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टेक्नोलॉजी से जुड़ी दुनिया की चार कंपनियां गूगल, एपल, सेमसंग और माइक्रोसॉफ्ट। जिन्होंने हमारे जीवन में बड़े बदलाव लाए। गूगल से इंटरनेट शुरू होता है, माइक्रोसॉफ्ट से आज भी दुनिया के 90 प्रतिशत कंप्यूटर शुरू होते हैं। एपल के गेजेट्स उत्कृष्टता की पहचान हैं। तो सेमसंग के फोन, टीवी और अन्य घरेलू उपकरण दुनियाभर में उपयोग किए जा रहे हैं। लोगों की जिंदगी को आसान बनाने वाली इन बेहद प्रतिस्पर्धी कंपनियों के वर्क कल्चर में पिछले दिनों बड़े बदलाव आए हैं। इन कंपनियों में कर्मचारियों पर दबाव होता है दुनिया के बेस्ट इनोवेशन करने का। इसके लिए कहीं बेहद खुला वातावरण है। तो कहीं बेहदल सख्ती। इतनी कि साथ काम करने वाले कर्मचारी को पता ही नहीं होता कि उसका पड़ोसी क्या कर रहा है। सेमसंग के मैनेजमेंट की तुलना कभी सेना से की जाती थी, अब यह बदल रहा है। बेहद सख्त एपल भी अब नरम पड़ा है। कर्मचारियों को खुलापन महसूस हो उसके िलए सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। आइए जानते हैं गूगल, एपल, सेमसंग और माइक्रोसॉफ्ट में कामकाज का माहौल कैसा है। शायद हम अपने ऑफिस के वर्क कल्चर को इससे जोड़ पाएं…
सभी कंपनियां रिजल्ट ओरिएंटेड हैं। सारे प्रोडक्ट तयशुदा समय पर बाजार में होते हैं। कभी सफलता मिलती है, कभी नहीं लेकिन इनसे जीवन कहीं कहीं जुड़ ही जाता है।
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दुनिया की जनि मानी इन्टरनेट कंपनी गूगल के कर्मचारियो का टाइम टेबल कुछ इस तरह होता है
काम- हफ्ते में 40 घंटे
छुट्‌टी- हफ्ते में दो दिन अवकाश
आने-जाने का कोई तय समय नहीं है, लेकिन काम समय पर चाहिए। साप्ताहिक मीटिंग में लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन और अन्य अधिकारियों से कर्मचारी सीधे सवाल-जवाब करते हैं। लोग डॉगी लेकर भी ऑफिस आते हैं। स्वीमिंग पूल भी हैं। फ्री कॉफी, लंच, डिनर के अलावा बच्चों की फीस भी कंपनी देती है।
महिलाओं के लिए: मसाजरूम, सप्ताह में एक बार फ्री आयब्रो शेपिंग। मां बनने पर महिलाओं के पति को भी सवैतनिक अवकाश।

दुनिया की कंप्यूटर सॉफ्टवेर बनाने वाली कम्पनी माइक्रोसॉफ्ट के कर्मचारियो का वर्किंग कुछ ऐसे होती है
काम- हफ्ते में सिर्फ 40 घंटे
छुट्‌टी- हफ्ते में दो दिन
कंपनी में एम्पलाइज के बीच कड़ी कंपीटिशन है। इस कारण मैत्री का वातवरण नहीं है। काम करने की पूरी आजादी है। यहां के कंपनसेशन और लाभ इंडस्ट्री में सबसे अच्छे हैं। कई एम्पलॉई तो मजाक में कहते हैं कि जिस दिन माइक्रोसॉफ्ट ने मुफ्त में सॉफ्टड्रिंक पिलाना बंद कर दिया उस दिन इस्तीफा दे देंगे।
महिलाओं को ये सुविधाएं: मैटरनिटी-पैटरनिटीलीव। हेल्थकेअर कवरेज और थैरेपी आदि की सुविधाएं भी कंपनी उपलब्ध कराती है।

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल कुछ इस तरह की सहूलियत देती हैं
काम- सुबह 9 से शाम 5 बजे तक
यहां वातावरण बेहद सख्त था। भारी गोपनीयता बरती जाती। यदि किसी प्रोजेक्ट में स्टीव जॉब्स शामिल नहीं रहते थे, तो वह महीनों अटका रहता। इसके उलट जिस प्रोजेक्ट में वे शामिल होते, काम तेजी से किया जाने लगता। जॉब्स किसी हालात को नहीं समझते थे, वह चाहते थे कि काम आज ही खत्म हो। उनके निधन के बाद एपल में बदलाव आया।
बदलाव: पहले मां बनने वाली महिलाओं को केवल दो महीने की ही छुट्‌टी मिलती थी। लेकिन पिछले साल से कंपनी ने इसे दोगुना कर दिया है।

क्या आप जानते हैं की सैमसंग के कर्मचारी सेना कि तरह सोलह घंटे कम करते थे
सेना की तरह था वर्क कल्चर (16 घंटे काम होता)
सख्ती के खिलाफ शिकायत पर सुनवाई नहीं होती।
कम छुटिट्यों को लेकर संस्था लेबर वॉच ने सेमसंग मैनेजमेंट को 'एम्परर मैनेजमेंट' और 'डिक्टेटरशिप' कहा। किताब 'सोनी वर्सेज सेमसंग' के मुताबिक सेमसंग में सारे फैसले चेयरमैन लेते हैं। यहां लीडरशिप कब तक अच्छी रहेगी पता नहीं।
बदलाव: अब यहां कभी भी काम करने की छूट है। महिलाओं को मां बनने के दौरान पूरी छुट्‌टी मिलती है। तनख्वाह भी नहीं काटी जाती।
 
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