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मुंबई: मुंबई में एक ऐसा तलाक का मामला सामने आया जिसमे पत्नी को शारीरिक तौर पर संतुष्टि न कर पाने की वजह से एक पत्नीऐ अपने पति को 'हिजड़ा' कहकर पुकारती थी। फैमिली कोर्ट ने इसे मानसिकता और क्रूरता मानते हुए पति के तलाक की अर्जी कबूल कर ली।
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पति ने तलाक की अर्जी बीते साल अक्टूअबर 2013 में लगाई थी। उसने बताया कि उनकी शादी 2011 में हुई थी। उसका आरोप है कि पत्नीब को घर के कामों में नहीं, बल्ि उस सेक्सी में दिलचस्पीई थी। पति के मुताबिक, पत्नी  खुद को उससे बेहतर मानती थी और कहती थी कि उसने शादी करके उसने बहुत बड़ी गलती की है। पति का यह भी कहना है कि पत्नी  ने खुद को नुकसान पहुंचाने और उसे और उसके परिवार को झूठे पुलिस केस में फंसाने की धमकी भी दी थी। इसके अलावा, इस मानसिक प्रताड़ना की वजह से वह काम में ध्यारन केंद्रित नहीं कर पाता और उसका स्वास्थ्य  भी खराब हो गया। बीते साल मई में पत्नीक को उसका भाई मायके ले गया, जिसके बाद वह कभी नहीं लौटी। इन आरोपों का जवाब देने के लिए पत्नीख ने कोर्ट से वक्ते मांगा था, लेकिन वह सुनवाई के दौरान कई बार उपस्थिइ‍त नहीं हुई। ऐसे में कोर्ट को यह मानने के लिए मजबूर होना पड़ा कि पति के आरोप सही हैं, जिसकी वजह से उसे तलाक मिल गया।

इससे पहले भी एक मामला मुंबई में हुआ था जिसमे एक पत्नीू ने आरोप लगाया कि उसका पति सोते वक्त  पंखा बंद कर देता था। कोर्ट ने इसे क्रूरता मानते हुए पत्नीे के तलाक की अर्जी कबूल कर ली। पत्नीस के मुताबिक, उसके पति ने शादी वाले दिन एक लाख रुपए के दहेज की मांग की थी। पत्नी् ने बताया कि शादी के अगले ही दिन उसे रसोई की सारी जिम्मेनदारी सौंप दी गई। उसे परिवार के सभी सदस्यों  के लिए खाना बनाने के अलावा उनके कपड़े भी धोने पड़ते थे। इसके अलावा, उसे अपने मायके  वालों से बात करने भी नहीं दिया जाता था।

पत्नीप के मुता‍बिक, उसे नौकरी करने का मन था, लेकिन पति के घरवालों ने इससे रोक दिया। इसके अलावा, दवाओं और डॉक्ट‍री परामर्श के लिए जरूरी पैसों के लिए मोहताज कर दिया। पत्नीभ का यह भी कहना है कि पहली संतान के तौर पर बेटी का जन्मा होने पर उस पर ताना कसा गया। इसके अलावा, 2002 में जब उसके डायबिटिक रोग से पीड़ित ससुर की हार्ट अटैक से मौत हुई तो इसके लिए भी उसे जिम्मेादार ठहराया गया। पत्नीउ को तलाक के अलावा 10 लाख रुपए का मुआवजा मिला है।
 
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