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भारत में तेजी से बढ़ते इंटरनेट के इस्तेमाल को देखते हुए अब भारत सरकार वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका बढ़ाने की तैयारी कर रही है। यानी, भारत अब दुनिया के उन प्रमुख देशों में अपने को शामिल करना चाहता है, जो कि इंटरनेट के गवर्नेंस को लेकर अहम फैसले करते हैं।

यदि ऐसा होता है, तो भारत न केवल इंटरनेट के इस्तेमाल में अपने हितों को दुनिया के मंच पर कहीं अच्छे तरह से रख सकेगा, बल्कि नीतियां बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकेगा। इसके लिए भारत ने ग्लोबल इंटरनेट काउंसिल में गोल्ड सदस्य बनने का आवेदन भी कर दिया है।

डिपार्टमेंट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने को बताया कि भारत में इंटरनेट यूजर की संख्या साल 2020 तक 60 करोड़ हो जाने का अनुमान है।
जो कि एक बहुत बड़ी तादाद होगी। ऐसे में यह जरूरी है कि इंटरनेट यूजर्स के लिए बनने वाले नियमों और उनके हितों की देखभाल के लिए भारत की भी भूमिका हो।

इसी को देखते हुए भारत ने ग्लोबल इंटरनेशनल काउंसिल की गोल्ड सदस्यता के लिए आवेदन किया है। अधिकारी के अनुसार भारत न केवल इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले देश के रूप में तेजी से बढ़ रहा है, बल्कि आईटी सेवाओं के लिए भी वैश्विक स्तर पर उसकी अहम पहचान है।

जिसे देखते हुए इंटरनेट गवर्नेंस में भारत की अहम भूमिका होना बेहद जरूरी है। यदि भारत को सदस्यता मिलती है, तो साख बढ़ने के साथ-साथ पेटेंट नियमों आदि में भी भारत का पक्ष मजबूत होगा।

भारत में 26 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा इस्तेमाल
ग्लोबल इंटरनेट रिपोर्ट 2014 के अनुसार भारत में पिछले 5 साल में औसतन यूजर ग्रोथ 26.1 फीसदी रही है, जो सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट पेनीट्रेशन 15.1 फीसदी तक पहुंच गया है। इसके अलावा मोदी सरकार जिस तरह से गांव-गांव तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने की योजना का लक्ष्य लेकर चल रही है, उसे देखते हुए भारत एक बहुत बड़ा बाजार इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए होगा।
 
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