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What are the differences between Apple Pay and Google
वर्षों से टेक्नोलॉजी के महारथी मोबाइल पेमेंट क्रांति का ढिंढोरा पीट रहे हैं। उनका दावा है, हर फोन पर्स के रूप में बदल जाएगा। कंज्यूमर और रिटेलर को फायदे होंगे। हालांकि, वास्तविकता अत्यंत पेचीदा है। क्रेडिट कार्ड के सामने गूगल वैलेट जैसे हाई प्रोफाइल सॉल्यूशन को संघर्ष करना पड़ा है। आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। अमेरिकियों द्वारा  इस वर्ष फोन के जरिये 300 अरब रुपए का भुगतान करने की संभावना है। क्रेडिट कार्ड के सामने यह रकम कुछ भी नहीं है। यूरो मॉनिटर के अनुसार अमेरिकी क्रेडिट कार्ड से 294 खरब रुपए चुकाएंगे।

फिर भी, 20 अक्टूबर को लॉन्च हो चुका एपल पे इस खेल को बदल सकता है। यह सेवा बहुत सरल है। कस्टमर अपने आईफोन 6 या आईफोन 6 प्लस को हिलाकर सामान खरीद सकेंगे। उन्हें फोन को अनलॉक करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रत्येक लेनदेन पर एपल थोड़ा कमीशन लेगा। एपल को कई बड़ी कंपनियों, बैंकों का सहयोग मिला है। इनमें शामिल हैं, मेकडॉनल्ड, वॉलग्रीन्स, ब्लूमिंगडेल, चेज एवं बैंक ऑफ अमेरिका और वीजा, अमेरिकन एक्सप्रेस, मास्टर कार्ड। डायनेमिक कोड से एपल पे के सिस्टम को सुरक्षित बनाया गया है।

एपल पे की सबसे बड़ी खासियत एपल की विशेषज्ञता है। कंपनी का ई-कॉमर्स साम्राज्य बहुत बड़ा हो चुका है। आई ट्यून स्टोर में 50 करोड़ कार्ड हैं। आई फोन मालिक एप और म्यूजिक खरीदने के लिए इनका उपयोग करते हैं। इसके बावजूद सिस्टम में कुछ कसर बाकी है। अमेरिका का सबसे बड़ा रिटेलर वॉलमार्ट एपल पे के साथ नहीं है। इसके बजाय वॉलमार्ट और बेस्ट बाई, टारगेट जैसे स्टोर करेंटसी (CurrentC) नामक प्रतिस्पर्धी मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। यह अगले वर्ष लॉन्च होगा। एपल पे में पुरस्कार के बतौर अंक नहीं मिलते हैं। विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय पेमेंट एप-स्टारबक्स की सफलता का एक कारण उसका रिवार्ड प्रोग्राम है। उसमें प्रति सप्ताह 60 लाख ट्रांजेक्शन होते है। यह कॉफी चेन के कुल ट्रांजेक्शन का 15 प्रतिशत है।

कुछ कमजोरियों के बावजूद एपल पे मोबाइल पेमेंट के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यूरोमॉनिटर का अनुमान है, अमेरिका में 2019 तक दुकानों पर मोबाइल पेमेंट का आंकड़ा 4534 अरब रुपए तक पहुंच जाएगा। कंज्यूमर फाइनेंस एनालिस्ट मिशेल ईवांस का कहना है, एपल बड़ा ब्रांड है। यह कंपनी कंज्यूमर के व्यवहार में परिवर्तन कर सकती है।

क्या सुविधा नही मिलेगी एप्पल पे मे: एपल पे के लिए स्टोर में विशेष हार्डवेयर लगाना पड़ेंगे। वालमार्ट सहित कई चेन एपल से नहीं जुड़ी हैं।

मनी ट्रांसफर(Money Transfer): वेनमो,पेपाल और गूगल वैलेट जैसे एप से यूजर अपने मित्रों को धन भेज सकते हैं। एपल पे के साथ ऐसा नहीं है।

खास सुविधा नहीं: एपलपे (Apple Pay)के साथ कोई रिटेलर पुरस्कार प्रोग्राम नहीं है। फोन के माध्यम से भुगतान करने पर विशेष सुविधा नहीं मिलेगी।

एपल-पे से आप क्या-2 कर सकते हैं और क्या नहीं

सिक्यूरिटी बढ़ेगी- फोन के फिंगर प्रिंट स्कैनर से खरीद अधिकृत हो सकेगी। ट्रांजेक्शन के दौरान व्यापारी को क्रेडिट कार्ड के नंबर नहीं भेजे जाएंगे।

आसान खरीद – एपलपे (Apple Pay):एकाउंट के मार्फत यूजर उबेर, ओपनटेबल सहित कई एप में ट्रांजेक्शन कर सकेंगे। फोन का विशेष एंटिना मेकडॉनल्ड, वालग्रीन्स जैसे रिटेलरों के सेंसर से जुड़ जाएगा। इससे फोन को हिलाकर भुगतान किया जा सकेगा।

क्रेडिट कार्ड (Credit Card) - वीजा, मास्टरकार्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस क्रेडिट कार्ड के पिक्चर लेकर यूजर उनमें से किसी एक के जरिये भुगतान कर सकेंगे

How we work

Bitcoin is a cryptocurrency, which is a form of electronic cash. This is the first decentralized digital currency: the system was designed to work without a central bank or a single administrator. Many economists and investors consider the Bitcoin market to be a bubble. Bitcoin has also been criticized for its use in illegal transactions, its high power consumption, price instability, and theft from exchanges.

What Is Real Cryptocurrency
Bitcoin is made as a reward for the process known as mining. They can be exchanged for other currencies, products and services. The research produced by Cambridge University estimates that in 2017, there were 2.9 to 5.8 million unique users using cryptocurancency wallet, most of which used bittoine. A cryptocurrency (or crypto currency) is a digital asset designed to work as a medium of exchange that uses cryptography to secure its transactions, to control the creation of additional units, and to verify the transfer of assets. Cryptocurrencies are classified as a subset of digital currencies and are also classified as a subset of alternative currencies and virtual currencies.

Bitcoin, created in 2009, was the first decentralized cryptocurrency. Since then, numerous cryptocurrencies have been created. These are frequently called altcoins, as a blend of bitcoin alternative. Bitcoin and its derivatives use decentralized control as opposed to centralized electronic money/central banking systems . The decentralized control is related to the use of bitcoin's blockchain transaction database in the role of a distributed ledger
 
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