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today Best Stocks to Buy Nowये सच्ची कहानी सिर्फ मेरे उन रिश्तेदार की नहीं है। ऐसे निवेशक हजारों की तादाद में हैं जो निवेश करने के बाद सालों साल तक शेयर मार्केट को कोसते रहते हैं।
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अब समझिए कि ऐसा क्यों होता है। जैसा कि मैंने बताया, वे मुझसे मार्केट का हाल-चाल पूछते हैं। यानी वे पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं कि शेयर मार्केट में क्या चल रहा है। निफ्टी किस लेवल पर है? क्यों है? यहां तक कि जिस शेयर में उन्होंने अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई का निवेश कर रखा है, उसके भावों का दशा-दिशा के बारे में जानना भी वे जरूरी नहीं समझते। वे कभी कभार देख लेते हैं कि एसबीआई का शेयर कितने पर चल रहा है। और जब भी वे देखते हैं कि ये उनके खरीद भाव से काफी नीचे है तो वे निराश होते हैं, खींजते हैं। लेकिन ये जानने की जहमत नहीं उठाते कि आखिर उन्होंने जिस शेयर को 3300 के भाव में खरीदा था वह अभी 2800 के इर्द गिर्द क्यों घूम रहा है जबकि निफ्टी अब तक के इतिहास में सबसे ऊपरी शिखर को चूम रहा है। क्या यह अपने ही निवेश के प्रति घोर लापरवाही और उपेक्षा नहीं है।
मैंने यह सवाल जब उनसे किया तो उनका जवाब था- ‘अरे हमने तो बड़ी कंपनी का शेयर खरीदा था। एसबीआई बैंकिंग क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। हमने सोचा बड़ी कंपनी है, जब मार्केट बढ़ेगा तो उसके साथ ये जरूर बढ़ेगा। इसलिए हमने उसका शेयर खरीदा, अब हम और क्या करें।’ ये जवाब सिर्फ इन जनाब का नहीं है, ढेर सारे निवेशकों का भी है।

बात देखने में सही लगता है कि एसबीआई जैसी कंपनियां भारताय अर्थव्यवस्था रूपी गाड़ी के इंजन की तरह हैं। लेकिन जरा गहराई से देखें तो उनके तर्क में छिपी खामी साफ दिखता है। दरअसल शेयर बाजार में निवेश करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। किसी कंपनी का बड़ा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि किसी निश्चित अवधि में वह बड़ा मुनाफा भी देगी।

भावों की भाषा पहचानें
मेरे उस रिश्तेदार की तरह हजारों निवेशक और ट्रेडर हैं जो इस बात को नहीं समझ पाते हैं कि शेयर बाजार में जो चीज सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह है, भावों की भाषा। किसी शेयर के भाव कब कैसे चढ़ते उतरते हैं, इसकी समझ ही किसी ट्रेडर को कामयाब बनाता है। मिसाल के तौर पर अगर मेरे रिश्तेदार ने एसबीआई का वही शेयर इस साल फरवरी में खरीदा होता तो वे प्रति शेयर 1300 रुपए के मुनाफे में होते। जिस शेयर को उन्होंने चार साल पहले 3300 रुपए में खरीदा था, वह इस साल 1500 रुपए का मिल रहा था। उनकी गलता थी कि उन्होंने एंट्री प्वाइंट का मूल्यांकन किए बिना एक साथ सारा निवेश कर दिया। इस गलता की सजा वे भुगत रहे हैं। ऐसी गलता मत कीजिए।

एंट्री और एक्जिट प्वाइंट का विश्लेषण करें
शेयर बाजार में एंट्री और एक्जिट प्वाइंट का संपूर्ण विश्लेषण करने के बाद ही निवेश कीजिए। और सबसे बड़ी बात अगर आपने निवेश किया है तो जागरूक निवेशक बनिए। अपने निवेश और बाजार के परिवेश को समझिए। अगर आप शेयर खरीद कर सो जाएंगे तो मुनाफे का स्टेशन निकल जाएगा।

दरअसल शेयर बाजार में निवेश करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। किसी कंपनी का बड़ा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि किसी निश्चित अवधि में वह बड़ा मुनाफा भी देगी।

जागो निवेशक..जागो!

मेरे एक रिश्तेदार हैं। एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं। शेयर में करीब पचास हजार रुपए का निवेश कर रखा है। जब भी मिलते हैं तो पूछते हैं कि मार्केट कैसा चल रहा है? मैं उनसे मजाक में कहता हूं कि मार्केट वैसा ही चल रहा है जैसा आप चला रहे हैं। वे समझते नहीं हैं तो मैं स्पष्ट करता हूं कि मार्केट को तो निवेशक और ट्रेडर ही चलाते हैं। इसलिए निवेशक होने के नाते मार्केट की बागडोर खुद उनके ही हाथों में है। इसके बाद वे अपने मतलब की बात करते हैं कि स्टेट बैंक कितने पर चल रहा है। दरअसल इन महाशय ने 2010 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया यानी एसबीआई के शेयर खरीदे थे। 2010 शेयर मार्केट के लिहाज से एक उथल पुथल भरा साल था। एसबीआई की ही बात करें तो इसका शेयर फरवरी 2010 में 1900 रुपए प्रति शेयर के भाव पर बिक रहा था लेकिन महज 9 महीने बाद यानी नवंबर 2010 में यह शेयर जबरदस्त छलांग लगा कर 3400 रुपए पर पहुंच गया। जरा सोचिए करीब 300 दिनों में एक शेयर में 1500 रुपए की बढ़त दर्ज की गई। लेकिन इन जनाब को उसका फायदा बिल्कुल नहीं मिला। इन्होंने एसबीआई के शेयर को 1900 के आसपास नहीं पकड़ा। इन्होंने जब खरीदा तो शेयर अपने शिखर के पास पहुंच चुका था। मेरे रिश्तेदार ने शेयर को 3315 रुपए पर खरीदा और विडंबना यह है कि पिछले चार साल से वे अपने शेयर को लेकर रो रहे हैं। 2010 के बाद से अब तक एसबीआई का शेयर 3300 के आसपास भी नहीं पहुंचा है। पिछले शुक्रवार को भी एसबीआई का शेयर एनएसई में 2787.85 रुपए पर बंद हुआ। यानी चार साल से इन्हें अपनी बचत पूंजी पर ब्याज या फायदा मिलना तो दूर, एक तरह से घाटा हो रहा है। वे अक्सर कहते हैं कि अगर फिक्स्ड डिपॉजिट कर दिया होता तो सालाना कम से कम 8 फीसदी ब्याज तो मिलता। चार साल में सिर्फ ब्याज 35 फीसदी के आसपास होता। लेकिन उन्हें 35 फीसदी तो क्या, 35 रुपए का भी फायदा ट्रेडिंग एकाउंट में नजर नहीं आ रहा है।

ट्रेडिंग में सतर्क रहने के सूत्र
ये सच्ची कहानी सिर्फ मेरे उन रिश्तेदार की नहीं है। ऐसे निवेशक हजारों की तादाद में हैं जो निवेश करने के बाद सालों साल तक शेयर मार्केट को कोसते रहते हैं।

अब समझिए कि ऐसा क्यों होता है। जैसा कि मैंने बताया, वे मुझसे मार्केट का हाल-चाल पूछते हैं। यानी वे पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं कि शेयर मार्केट में क्या चल रहा है। निफ्टी किस लेवल पर है? क्यों है? यहां तक कि जिस शेयर में उन्होंने अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई का निवेश कर रखा है, उसके भावों का दशा-दिशा के बारे में जानना भी वे जरूरी नहीं समझते। वे कभी कभार देख लेते हैं कि एसबीआई का शेयर कितने पर चल रहा है। और जब भी वे देखते हैं कि ये उनके खरीद भाव से काफी नीचे है तो वे निराश होते हैं, खींजते हैं। लेकिन ये जानने की जहमत नहीं उठाते कि आखिर उन्होंने जिस शेयर को 3300 के भाव में खरीदा था वह अभी 2800 के इर्द गिर्द क्यों घूम रहा है जबकि निफ्टी अब तक के इतिहास में सबसे ऊपरी शिखर को चूम रहा है। क्या यह अपने ही निवेश के प्रति घोर लापरवाही और उपेक्षा नहीं है।

मैंने यह सवाल जब उनसे किया तो उनका जवाब था- ‘अरे हमने तो बड़ी कंपनी का शेयर खरीदा था। एसबीआई बैंकिंग क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी है। हमने सोचा बड़ी कंपनी है, जब मार्केट बढ़ेगा तो उसके साथ ये जरूर बढ़ेगा। इसलिए हमने उसका शेयर खरीदा, अब हम और क्या करें।’ ये जवाब सिर्फ इन जनाब का नहीं है, ढेर सारे निवेशकों का भी है।

बात देखने में सही लगता है कि एसबीआई जैसी कंपनियां भारताय अर्थव्यवस्था रूपी गाड़ी के इंजन की तरह हैं। लेकिन जरा गहराई से देखें तो उनके तर्क में छिपी खामी साफ दिखता है। दरअसल शेयर बाजार में निवेश करते समय कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है। किसी कंपनी का बड़ा होना इस बात की गारंटी नहीं है कि किसी निश्चित अवधि में वह बड़ा मुनाफा भी देगी।
भावों की भाषा पहचानें
मेरे उस रिश्तेदार की तरह हजारों निवेशक और ट्रेडर हैं जो इस बात को नहीं समझ पाते हैं कि शेयर बाजार में जो चीज सबसे ज्यादा मायने रखता है, वह है, भावों की भाषा। किसी शेयर के भाव कब कैसे चढ़ते उतरते हैं, इसकी समझ ही किसी ट्रेडर को कामयाब बनाता है। मिसाल के तौर पर अगर मेरे रिश्तेदार ने एसबीआई का वही शेयर इस साल फरवरी में खरीदा होता तो वे प्रति शेयर 1300 रुपए के मुनाफे में होते। जिस शेयर को उन्होंने चार साल पहले 3300 रुपए में खरीदा था, वह इस साल 1500 रुपए का मिल रहा था। उनकी गलता थी कि उन्होंने एंट्री प्वाइंट का मूल्यांकन किए बिना एक साथ सारा निवेश कर दिया। इस गलता की सजा वे भुगत रहे हैं। ऐसी गलता मत कीजिए।
एंट्री और एक्जिट प्वाइंट का विश्लेषण करें
शेयर बाजार में एंट्री और एक्जिट प्वाइंट का संपूर्ण विश्लेषण करने के बाद ही निवेश कीजिए। और सबसे बड़ी बात अगर आपने निवेश किया है तो जागरूक निवेशक बनिए। अपने निवेश और बाजार के परिवेश को समझिए। अगर आप शेयर खरीद कर सो जाएंगे तो मुनाफे का स्टेशन निकल जाएगा।
1. किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले एंट्री प्वाइंट को समझिए
2. सिर्फ बड़ी कंपनी में निवेश से बड़े  फायदे की गारंटी नहीं हो जाता
3. जिस कंपनी में निवेश किया है उसके भाव पर नजर रखिए
4. अगर शेयर गिरता है, तो उसकी वजह समझिए, चढ़ता है तब भी
5. लंबे निवेश का मतलब यह नहीं है कि निवेशक लापरवाह हो जाएं
What Blockchain and Bitcoin Mean for the Protection Business You may have heard the expressions "blockchain" or "Bitcoin" utilized as a part of tech hovers in the course of recent years. These ideas, alongside intense utilize cases, are changing how we consider money, exchanges and contracts.

Simultaneously, they're likewise changing how we consider the protection business. These progressions will affect protection bearers and operators, and how protection is purchased and sold. That implies understanding blockchain and Bitcoin is essential in case you're hoping to win in the cutting edge protection industry. This post has you secured. It gives meanings of blockchain and Bitcoin, at that point separates why this data is critical to protection industry experts. 

WHAT IS BLOCKCHAIN? WHAT IS BITCOIN? 

In their book Blockchain Upheaval, Wear and Alex Tapscott clarify that blockchain is "the brilliantly straightforward, progressive convention that enables exchanges to be at the same time mysterious and secure by keeping up a sealed open record of significant worth." The blockchain is intended to store exchange records ("obstructs") in numerous spots, connected to each other (henceforth the "chain" some portion of the name) and straightforward to any client who wishes to see them. Critically, this record can't be changed, so anybody can see a typical and exact rundown of authentic exchanges. Bitcoin is a kind of computerized money that utilization's blockchain innovation. It's not by any means the only one that utilization blockchain, yet is one of the more prevalent alternatives available. Despite the fact that bitcoin is the most famous cryptographic money upheld by blockchain innovation, other advanced monetary forms, for example, ether and litecoin—utilize blockchain innovation too. All bitcoin exchanges are recorded in a decentralized open record that can't be adjusted. In principle, this is something worth being thankful for on the grounds that it makes trust among all gatherings of the exchange and gives an unmistakable trail of procurement that avoids fake exchanges. This is one manner by which blockchain can possibly change exchanges. However, remember that blockchain does not need to be money related. 

Ramifications OF BLOCKCHAIN AND BITCOIN FOR THE Protection Business Blockchain applications like cryptocurency, shrewd contracts and decentralized models for protection will change how protection is appropriated. What's more, when you change how protection is disseminated, you significantly modify how existing players profit and test business as usual. Insurance agencies could utilize the blockchain to make a disseminated record that cultivates straightforwardness, successfully tracks cases and exchange history, and gives perceivability into the authenticity of a claim. Brilliant contracts based on the blockchain can balance deceitful claims by recording exchange history on people in general system, which would dismiss different cases for a similar occasion. This could spare the business billions and open up gigantic chances to make huge measures of significant worth for buyers. Cryptocurriencies can make trust amongst safety net providers and their clients could make trust. For example, INGUARD was the principal insurance agency to acknowledge bitcoin installments. We did this since it was the correct activity for our well informed clients—a state of mind very rare in the protection business today. Consider: 40% of protection premiums turn over every year—and 66% of buyers would purchase protection on the web in the event that they could. 


What's more, and, after its all said and done, they're scarcely happy with back up plan sites. Shoppers don't confide in their safety net providers to put their best advantages on the most fundamental level or execute in a reasonable, break even with way. Bitcoin and blockchain innovation, as we would see it, are devices that can possibly carefully ensure customers, as well as reestablish assume that their needs are being met. Innovation appropriation in the protection business ought to dependably make more an incentive for shoppers. It should expel contact from the purchasing procedure and empower a superior client encounter. What's more, its adequacy ought to be estimated by consumer loyalty, not the amount PR or advertising duplicate another framework creates. That doesn't generally happen. In any case, with the focal points blockchain innovation gives, that could begin to change. Also, that will be advance in reality.
 
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