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इस दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं जिसने गलती न की हो। गलती करना पाप नहीं, लेकिन उसका एहसास होने के बाद उसे दोहराना पाप जरूर है। गलती असफलता नहीं है। समझदार लोग अपनी गलतियों से सीखते हैं, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की गलतियों से भी सीखता है। दरअसल हमारी जिदंगी इतनी लंबी नहीं कि खुद गलती कर सीखें। कुछ लोग अपनी गलतियों को दोहराते हैं और उन्हीं गलतियों में निपुण हो जाते हैं। कहावत है- ‘प्रैक्टिस मेक्स मेन परफेक्ट।’ लेकिन सही चीज का अभ्यास करना चाहिए, गलत का नहीं।
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कुछ लोग गलती होने के डर से फैसले लेने में कोताही बरतने लगते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि उदासीन या जड़ रहने से अच्छा है कि स्थितियों का विश्लेषण करते हुए अपने विवेक से फैसला लें। व्यक्ति की पूरी जिंदगी एक फैसले की तरह ही है। सुबह से रात तक उसे न जाने कितने फैसले लेने पड़ते हैं। सुबह उठना, भोजन करना, कपड़े पहनना आदि छोटी-छोटी चीजों में भी उसे फैसले ही लेने होते हैं, लेकिन आपकी सफलता सही फैसले पर ही निर्भर करती है।

कुछ लोग अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर डालते हैं, लेकिन असल में ऐसा करके वह कभी नहीं सीख पाते। वह कभी जिम्मेदारी नहीं लेते और अपनी भूल का उन्हें एहसास ही नहीं होता। ऐसे लोग अपनी असमर्थता के पीछे किस्मत, ग्रह, नक्षत्र, कुंडली, जन्मपत्री, राशि आदि को दोषी बताते हैं। खुद को सीधे कभी दोषी नहीं मानते। लेकिन सही तो यह है कि जिंदगी में जो भी काम करें, उसका विश्लेषण करें।

अपना अवलोकन करने में संगत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कहा जाता है कि सफलता दोस्तों को लाती है, लेकिन सही तो यह है कि तकलीफ के वक्त ही सही दोस्तों की पहचान की जाती है। दरअसल पांच साल के बाद आप किस जगह पर होंगे, यह दो चीजों पर निर्भर करता है- पहला आपकी संगत कैसी रही और दूसरा आप किस तरह की किताबें पढ़ते हैं। कुल मिलाकर व्यक्ति को आत्मविश्लेषक जरूर चाहिए। ऐसा करके ही इंसान गलती करने पर सीखता है। गलतियों से घबराएं नहीं। देखें कि कहां चूक हुई और हमेशा आगे बढ़ते रहें।
 
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