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किसी भी देश, समाज की बेहतर वित्तीय स्थिति से ही उस देश के विकास की दिशा तय होती है। यही कारण है कि अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तरह-तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं। इसके बावजूद अधिकांश मामलों में देश की ग्रामीण जनता तक विकास योजनाएं ठीक ढंग से नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में ग्रामीण लोगों की मदद के लिए माइक्रोफाइनेंस जैसा कॉन्सेप्ट सामने आया है। इस सेक्टर की खास बात यह है कि मंदी के दौरान भी इस सेक्टर पर कुछ ज्यादा असर नहीं दिखाई दिया। नोबल पुरस्कार विजेता बांग्लादेश के मोहम्मद युनूस ने तो माइक्रोफाइनेंसिंग के मामले में एक मिसाल कायम की है। इसी क्रम में भारत के विक्रम अकूला (एसकेएस) का भी नाम लिया जा सकता है। इन लोगों ने माइक्रोफाइनेंस के माध्यम से न सिर्फगरीब जनता की मदद की है बल्कि रोजगार के भरपूर मौके भी उपलब्ध कराए हैं।
What is Microfinance? Microfinance Definition in hindi what is microfinance company bank and importance of microfinance  institutions microcredit ppt pdf माइक्रोफाइनेंस का स्वरूप:  माइक्रोफाइनेंस के अंतर्गत विभिन्न जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण जनता को छोटी-छोटी वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है, जो उनके लिए तो फायदेमंद हैं ही, रोजगार उत्पन्न करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। इसके तहत दी जानेवाली मदद किसी व्यवसाय, जैसे कृषि, डेयरी, टेलरिंग, पॉटरी, पॉल्ट्री आदि के लिए या व्यक्तिगत जरूरतों के लिए दी जाती है। इसमें 1 हजार से 50 हजार तक की राशि ऋण के रूप में दी जाती है, जिसे साप्ताहिक या मासिक आधार पर वापस किया जाता है। यह लोन किसी एक व्यक्ति या समूह को दिया जाता है। कोई शक नहीं कि जो गरीब या अनपढ़ हैं, उन्हें लोन संबंधी किसी प्रक्रिया की न तो ठीक से जानकारी होती है और न ही वह बैंकों से दी जानेवाली ऐसी सुविधाओं का फायदा उठाने में सक्षम होते हैं। इसलिए माइक्रोफाइनेंस के तहत न सिर्फउनको लोन उपलब्ध कराया जाता है बल्कि इस पूरी प्रक्रिया की ट्रेनिंग भी दी जाती है। महत्वपूर्ण बात यह है इसमें वसूली की दर 95 प्रतिशत से भी अधिक है, यानी यह सिस्टम अच्छे से काम कर रहा है।
कोर्स (Courses Related to Micro Finance): कई संस्थानों द्वारा माइक्रोफाइनेंस पर आधारित डिप्लोमा कोर्स करवाए जाते हैं। इस फील्ड में सफलता के लिए कॉमर्स में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री मददगार है। ऐसे छात्रों को सीधे भी माइक्रोफाइनेंसिग कंपनियों में नौकरी मिल जाती है। वैसे अन्य संकाय के छात्र भी रुचि होने पर इसमें अपना कैरियर बना सकते हैं। फाइनेंस में एमबीए की डिग्री हासिल करना इस फील्ड में बेहतर पद पाने के लिए उपयुक्त है। ऐसे में फाइनेंस में एमबीए करनेवालों के लिए भी माइक्रोफाइनेंसिंग के रूप में जॉब का एक नया दरवाजा खुल गया है।
कई तरह के जॉब भारत में NABARD, SIDBI आदि के अलावा विभिन्न बैंकों द्वारा भी माइक्रोफाइनेंसिंग की सेवाएं दी जाती हैं। कई माइक्रोफाइनेंस कंपनियां (एमएफआई) ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जैसे बंधन, एसकेएस, माइक्रोक्रेडिट फाउंडेशन ऑफ इंडिया, साधना माइक्रोफिन सोसाइटी, अस्मिता माइक्रोफिन लि., कैस्पर माइक्रो क्रेडिट, ग्रामीण फाइनेंशियल सर्विसेज प्रा.लि. आदि। इनमें जॉब के अवसर मिलते रहते हैं। इस सेक्टर में विभिन्न निजी कंपनियों और एनजीओ के आने से हर स्तर पर रोजगार के मौके बढ़ने लगे हैं। इसमें फील्ड एक्जीक्यूटिव से शुरुआत करके ब्रांच मैनेजर तक तरक्की पाई जा सकती है। संबंधित रिक्तियों के लिए समाचारपत्रों या वेबसाइट्स पर नजर रखी जा सकती है।
वेतनमान (Salary): इस सेक्टर में काम करना न सिर्फ अच्छे वेतनमान के कारण बेहतर है बल्कि इसमें निचले तबके के लोगों की सेवा से एक खास तरह की आत्मसंतुष्टि भी मिलती है। सैलरी 7-8 हजार रुपये से शुरू हो सकती है। बाद में बेहतर काम से पदोन्नति के रास्ते तो खुलते ही हैं। इस सेक्टर की प्रमुख बात यह भी है कि इसमें अनुभव प्राप्त कर लेने के बाद इंश्यारेंस कंपनियों, एनजीओ, बैंकों आदि में भी जॉब मिलने के मौके बनने लगते हैं। इस तरह इस फील्ड में काम करने के बाद बैंकिंग के अन्य विकल्पों में भी रास्ते खुल जाते हैं।
ग्रामीण लोगों की आर्थिक जरूरतें पूरी हों, इसी के मद्देनजर माइक्रोफाइनेंस का
स्वरूप विकसित हुआ है। भारतीय परिवेश में यह काफी उपयोगी है। इस सेक्टर में विस्तार की असीम संभावनाएं हैं, जिससे आनेवाले समय में भी इस क्षेत्र में रोजगार के भरपूर अवसर उपलब्ध होंगे।
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान (Main Training Institution for Micro Finance)

  • इंडियन इंस्टीटूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई
  • www.iibf.org.in
  • नेशनल इंस्टीटूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, हैदराबाद
  • www.nird.org.in
  • इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आनंद,
  • www.irma.ac.in
  • बेसिक्स, हैदराबाद
  • www.basixindia.com
  • इंस्टीटूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट एंड रिसर्च, चेन्नई
  • www.ifmr.ac.in
  • इंस्टिट्यूट  ऑफ रूरल मैनेजमेंट, जयपुर,
  • www.iirm.ac.in

How we work

Bitcoin is a cryptocurrency, which is a form of electronic cash. This is the first decentralized digital currency: the system was designed to work without a central bank or a single administrator. Many economists and investors consider the Bitcoin market to be a bubble. Bitcoin has also been criticized for its use in illegal transactions, its high power consumption, price instability, and theft from exchanges.

What Is Real Cryptocurrency
Bitcoin is made as a reward for the process known as mining. They can be exchanged for other currencies, products and services. The research produced by Cambridge University estimates that in 2017, there were 2.9 to 5.8 million unique users using cryptocurancency wallet, most of which used bittoine. A cryptocurrency (or crypto currency) is a digital asset designed to work as a medium of exchange that uses cryptography to secure its transactions, to control the creation of additional units, and to verify the transfer of assets. Cryptocurrencies are classified as a subset of digital currencies and are also classified as a subset of alternative currencies and virtual currencies.

Bitcoin, created in 2009, was the first decentralized cryptocurrency. Since then, numerous cryptocurrencies have been created. These are frequently called altcoins, as a blend of bitcoin alternative. Bitcoin and its derivatives use decentralized control as opposed to centralized electronic money/central banking systems . The decentralized control is related to the use of bitcoin's blockchain transaction database in the role of a distributed ledger
 
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