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लालच के चक्कर में नुकसान के गणित को अनदेखा करना ट्रेडिंग के लिए एक आत्मघाती प्रवृत्ति है।ट्रेडिंग करना और ट्रेडिंग से कमाई करना दो अलग अलग चीजें हैं। इस फर्क को नहीं समझने की वजह से बहुत से रिटेल ट्रेडर नुकसान पर नुकसान झेलने के लिए मजबूर होते हैं। एक साधारण ट्रेडर को सफल ट्रेडर बनाता है उसका एक दोस्त और दो दुश्मन। ट्रेडर का दोस्त उसे मुनाफे की मंजिलों तक पहुंचाता है, जबकि दुश्मन उसे घाटे की खाई में खींचने के फिराक मे रहता है। ट्रेडर को एक ही वक्त में दोस्ती निभानी होती है, और दुश्मनों से बचना भी होता है, तो आइए देखते हैं कि ट्रेडर के ये दोस्त और दुश्मन कौन हैं?

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पहला दोस्त अनुशासन: सबसे पहले बात दोस्त की। इसका नाम है- अनुशासन। सुनने में ये बात शायद किताबी लगे, लेकिन दरअसल यह सोलहों आने सच है। कहने की जरूरत नहीं कि शेयर ट्रेडिंग एक बहुत जोखिम भरा धंधा है। शेयर की कीमतों में जबरदस्त उतार चढ़ाव आम बात है। इस ज्वार भाटे के बीच अपना संयम बनाए रखना सफल ट्रेडिंग की पहली शर्त है। अनुशासन का अर्थ है- सोच समझ कर ट्रेडिंग के नियम बनाओ और पूरी ईमानदारी के साथ उसका पालन करो। मैं अपने निजी अनुभव से ये बात कह सकती हूं कि एक आम रिटेल ट्रेडर को जितना नुकसान होता है, उसकी एक बड़ी वजह लापरवाही है। बहुत से रिटेल ट्रेडर ट्रेडिंग को गंभीरता से नहीं लेते हैं। वे इसे किसी लॉटरी की तरह समझते हैं। जबकि उन्हें अच्छी तरह मालूम होता है कि ट्रेडिंग एक व्यवसाय है, जुएबाजी नहीं। हाल में मैने एक ट्रेडिंग एजुकेशन सेशन में देखा कि आधा से ज्यादा ट्रेडर्स ने अपने लिए रिस्क रिवार्ड रेशियो भी तय नहीं किया था। इसका व्यावहारिक अर्थ यह हुआ कि वो किसी भी प्राइस लेवल पर खरीदने और बेचने के लिए तैयार रहते हैं। इस प्रवृत्ति के साथ आप यदाकदा मुनाफा कमा सकते हैं लेकिन देर सबेर आपका मुनाफा तो क्या मूलधन भी खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए सभी रिटेल ट्रेडर्स को मेरी सलाह है कि वे ट्रेडिंग करते वक्त हर कदम पर खुद से सवाल करें। अगर आपने कोई शेयर खरीदने का फैसला कर लिया है तो एक मिनट रुक कर खुद से पूछिए कि आप वही शेयर क्यों खरीदने जा रहे हैं। आपने खरीदने के लिए जो भाव तय किया है, क्या उसका कोई तार्किक आधार है। क्या आपने टेक्निकल एनालिसिस किया है। क्या वह एनालिसिस किसी दूसरे फॉर्मूले से गलत नहीं दिखता है। आपने खरीदने के लिए जितनी मात्रा तय की है, क्या वह सही है। खरीदने से पहले तय करें कि आप उस शेयर को कितने समय तक होल्ड कर सकते हैं। आपका लक्ष्य क्या है और स्टॉप लॉस कहां लगाना है। अगर इन सभी सवालों के जवाब आप पूरे आत्मविश्वास के साथ दे सकते हैं, तभी ट्रेडिंग में कूदें। अगर इनमें से एक भी सवाल ने आपको निरुत्तरित कर दिया है, तो इसका मतलब है कि आपने ट्रेडिंग मे उतरने की पूरी तैयारी नहीं की है। ऐसी दशा में आपको ट्रेडिंग से पहले ट्रेनिंग की जरूरत है।

लालच और भय को पहचानिए:  दोस्त की बात कर ली। अब दुश्मनों को भी पहचान लीजिए ताकि उनसे निपटने में आसानी रहे। ट्रेडर के दो बड़े दुश्मन होते हैं। पहला- लालच और दूसरा-भय। इन दोनों से बचना बहुत मुश्किल है। बड़े बड़े ट्रेडर के लिए भी इनके बीच संतुलन बिठाना आसान नहीं होता है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रेडर के ये दोनों दुश्मन एक दूसरे के बिलकुल विपरीत हैं। एक का संबंध फायदे से है, दूसरे का रिश्ता घाटे से है। कोई भी व्यक्ति शेयर के उछलने के लालच में खरीदता है और गिरने के डर से बेचता है। ये बात अलग है कि अगर आप फ्यूचर एंड ऑप्शन सेगमेंट में ट्रेडिंग करते हैं तो आप बेचकर यानी शॉर्ट सेल करके भी फायदा कमा सकते हैं। लेकिन कुल मिलाकर लालच और भय ऐसे दो तत्व हैं जो आपको ट्रेडिंग मे सही फैसला लेने से भटकाते हैं। इसे एक उदाहरण से समझिए। मान लीजिए कि आपने अपने लिए नियम बनाया है कि जितनी पूंजी है उसका बीस फीसदी से ज्यादा किसी एक शेयर में नहीं लगाएंगे। लेकिन आपके ब्रोकर ने आपको बताया कि फलाना शेयर ले लो, उसमें तीन दिन में दस फीसदी फायदा हो जाएगा। आप लालच में फंस गए। और उस शेयर को खरीदने में न सिर्फ सारी पूंजी लगा दी, बल्कि ओवरट्रेडिंग भी कर लिया। अब अगर वह शेयर गिर गया तो आपको जबरदस्त घाटा लगना तय है। आपने लालच के चक्कर में नुकसान के गणित को अनदेखा किया, जो ट्रेडिंग के लिए एक आत्मघाती प्रवृत्ति है। इसलिए सफल ट्रेडिंग के लिए अनुशासन का दामन थामिए और लालच एवं भय से दूरी बना कर रखिए।
ट्रेडिंग में रहें सतर्क
  1. ट्रेडर का सबसे बड़ा दोस्त है अनुशासन
  2. ट्रेडर के बड़े दुश्मन- लालच और भय
  3. हर सौदे से पहले एक मिनट रुकें, खुद से सवाल करें कि सौदा करें या नहीं?
  4. क्या आपके शेयर खरीदने-बेचने का आधार तार्किक है? इस पर गौर करें
  5. क्या आपका टेक्निकल एनालिसिस दुरुस्त है, ताकि आप ट्रेडिंग बेहिचक कर सकें?
  6. कहीं आप लालच में पड़ कर ट्रेडिंग तो नहीं कर रहे हैं? इस पर गंभीरता से सोचें
  7. मुनाफे का लालच अक्सर घाटे के भय में बदल जाता है
 
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