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एक ओर कंप्यूटर और इंटरनेट पर आम आदमी की निर्भरता बढ़ती जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर कंप्यूटर को नुकसान पहुंचाने वाले नए-नए एंटी वायरस से भी उनका सामना हो रहा है। अन्य कारणों के अलावा एंटी वायरस भी एक वजह है, जो ठीक-ठाक चलते कंप्यूटर की कार्य-प्रणाली को बिल्कुल ध्वस्त कर सकता है।
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कंप्यूटर वायरस का स्वरूप (Type s of Computer Viruses)

यह एक खास तरह का प्रोग्राम होता है, जिसे इस तरह विकसित किया जाता है, ताकि वह कंप्यूटर के डाटा को नुकसान पहुंचा सके। ई-मेल, पेनड्राइव या सीडी से डाटा ट्रांसफर करते समय ये कंप्यूटर में समा जाते हैं। इसके अलावा इंटरनेट से कोई फाइल डाउनलोड करते समय भी पीसी पर वायरस अटैक हो सकता है।

एंटी वायरस प्रोग्राम (Antivirus Programs)

रोजाना सैकड़ों की संख्या में वायरस उत्पन्न होते रहते हैं, जिनको हटाना कंप्यूटर की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। इन वायरसों से कंप्यूटर को बचाने के लिए एंटी वायरस का निर्माण किया जाता है। एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को एक खास तरह के कोड के रूप में विकसित किया जाता है। इससे वायरस को हटाने या उसे रोकने में मदद मिलती है। कंप्यूटर के एंटी वायरस सॉफ्टवेयर को लगातार अपडेट करते रहना जरूरी है। कुछ एंटी वायरस सॉफ्टवेयर में ऑटोमैटिक अपडेट होने की भी सुविधा होती है।

कैसे-कैसे एंटी वायरस (Types of Antivirus)

विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाए गए कई एंटी वायरस बाजार में उपलब्ध हैं, जैसे मैक्फे, अवास्ट, अवीरा, एवीजी आदि। आप चाहें तो इन्हें मार्केट से खरीद सकते हैं या ऑनलाइन भी इनकी खरीदारी की जा सकती है। इसके अलावा इंटरनेट से एंटी वायरस का फ्री वर्जन डाउनलोड भी किया जा सकता है। कंपनियों द्वारा फ्री वर्जन कुछ समय के लिए दिए जाते हैं, ताकि उनकी क्षमता की जांच करके बाद में उनकी खरीदारी की जा सके। वैसे फ्री वर्जन से कई बार कंप्यूटर की पूरी सुरक्षा नहीं हो पाती, क्योंकि इसकी एक खास क्षमता होती है।
कंप्यूटर की खरीदारी के साथ ही उसमें एंटी वायरस डालना भी जरूरी हो जाता है, अन्यथा कंप्यूटर के डाटा को नुकसान होने का खतरा बना रहता है। अभी पीछे है भारत की एक सॉफ्टवेर कम्पनी ने देश वाशियों के लिए फ्री में फुल वर्जन एंटीवायरस लांच किया था जिसका नाम बीजेपी के स्लोगन नमो नाम से लिया गया है।
फ्री फुल वर्जन एंटी वायरस (Free antivirus download)

 
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