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gk question in hindi: movie censorship by censor boardभारतीय सेंसर बोर्ड देश में भारतीय और विदेशी फिल्मों के प्रदर्शन की न सिर्फ इजाजत देता है, बल्कि उनमें मौजूद किसी भी तरह के आपत्तिजनक दृश्य या संवाद को प्रदर्शन से पहले फिल्म से हटाने का निर्देश भी जारी करता है।
हमारे देश में हर साल विभिन्न भाषाओं में करीब 1000 फिल्मों का निर्माण किया जाता है। चूंकि फिल्में आज भी समाज का आईना मानी जाती हैं और इनके जरिए कोई भी अपनी भावनाओं को प्रसारित कर सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि इनसे स्वस्थ व सही बातों का ही प्रसार हो। इसी बात को सुनिश्चित करने हेतु एक बोर्ड का गठन किया गया, जिसे दि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के नाम से जाना जाता है। सेंसर बोर्ड के नाम से प्रचलित इस संस्था का नियंत्रण सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है। यह संस्था केवल फिल्मों ही नहीं, बल्कि टेलीविजन धारावाहिकों, विज्ञापनों और ऐसे अन्य मामलों के प्रसारण से पहले तहकीकात करती है, जिनसे समाज में गलत अवधारणाएं फैलने की आशंका होती है। सेंसर बोर्ड चार तरह के सर्टिफिकेट जारी करता है- यू, यूए, ए और एस। संस्था का मुख्यालय मुंबई में है।

स्थापना (Censor Board Establishment Year)

सेंसर बोर्ड यानी सीबीएफसी की स्थापना 1952 के सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत की गई है। इसके बाद एफसीएटी यानी फिल्म सर्टिफिकेशन एपलेट ट्रिब्यूनल की स्थापना भी इसी एक्ट की धारा 5-डी के तहत की गई, जिसका काम फिल्म सर्टिफिकेशन के खिलाफ की गई अपील की सुनवाई करना है। सेंसर बोर्ड में कुल 25 सदस्य होते हैं, जिनमें एक चेयरमैन सहित अन्य सदस्यों की नियुक्ति तीन वर्षों के लिए सरकार करती है। ये सभी सदस्य समाज में कला, शिक्षा, फिल्म, समाज विज्ञान, कानून आदि किसी भी क्षेत्र में प्रतिष्ठित व लोकप्रिय होते हैं। इसके नियम देश में बनाई जाने वाली फिल्मों के साथ-साथ विदेशी भाषा की फिल्मों के लिए भी लागू होते हैं। लेकिन दूरदर्शन द्वारा बनाए जाने वाले शोज को सेंसर बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेने की कोई आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि आरंभ से फिल्मों और धारावाहिकों के परीक्षण की इसकी अपनी इकाई है।

परिवर्तन (Innovation of Central Board of Film Certification)

दि सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 में वर्ष 1983 में परिवर्तन किया गया और परिवर्तन के बाद नए नियमों को 6 दिसंबर, 1991 में सिनेमैटोग्राफ एक्ट में धारा 5-बी के तहत जोड़ा गया। इसके अनुसार, किसी भी फिल्म को प्रदर्शन की स्वीकृति नहीं दी जाएगी, यदि इसके किसी भी भाग में देश की संप्रभुता, सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ मैत्री संबंध, सार्वजनिक सूचना, कोर्ट आदि के खिलाफ दृश्य दिखाए गए हों।
 
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