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सॉफ्टवेयर सिस्टम को डेवलप करना ही काफी नहीं है बल्कि उसके बाद उसका उचित मेन्टेनेंस भी एक चुनौतीपूर्ण काम है।
किसी सॉफ्टवेयर को डेवलप करने के बाद उसका मेन्टेनेंस काफी अहम होता है। जब किसी सॉफ्टवेयर का उपयोग करने के लिए उसे काम के वास्तविक माहौल में लागू कर दिया जाता है, तब उसके बाद उसका मेन्टेनेंस प्रोसेस शुरू हो जाता है। बनने के बाद सॉफ्टवेयर में किसी प्रकार का परिवर्तन सॉफ्टवेयर मेन्टेनेंस के अंतर्गत आता है। यदि हम इसको सरल भाषा में कहें तो इसका मतलब होता है, सॉफ्टवेयर को अप-टू-डेट रखना। सॉफ्टवेयर के परफॉर्मेंस को बढ़ाना, उसको अधिक यूजर फे्रंडली बनाना, फीचर्स बढ़ाना, एरर्स को दूर करना आदि तमाम काम इसमें शामिल होते हैं।
जिस तेजी से दिन-प्रतिदिन तकनीक में बदलाव आता रहता है और नई-नई तकनीकें सामने आती रहती हैं, ऐसे में किसी सॉफ्टवेयर को एक बार डेवलप कर देना ही काफी नहीं है। डेवलपमेंट के बाद वह सॉफ्टवेयर नई तकनीक के साथ कदमताल करता रहे, इसके लिए मेन्टेनेंस अत्यंत जरूरी है। सॉफ्टवेयर का मेन्टेनेंस एक लाइफ लॉन्ग प्रोसेस है। यह प्रत्येक सॉफ्टवेयर के लिए बहुत जरूरी है। ऐसे कई टूल्स उपलब्ध हैं, जो सॉफ्टवेयर मेन्टेनेंस को काफी आसान बना देते हैं।
सॉफ्टवेयर मेन्टेनेंस को मुख्य रूप से चार भागों में बांटा जाता है- »
करेक्टिव मेन्टेनेंस : इस मेन्टेनेंस का दायरा सॉफ्टवेयर में मौजूद एरर्स को हटाने तक ही सीमित होता है। ऑपरेशनल परिस्थिति में यदि किसी एरर की वजह से सॉफ्टवेयर में कोई प्रॉब्लम आती है तो इसे करेक्टिव मेन्टेनेंस के तहत दूर किया जाता है। »
एडेप्टिव मेन्टेनेंस : कभी-कभी टेक्नोलॉजी में हुए किसी परिवर्तन के कारण सॉफ्टवेयर में परिवर्तन करना जरूरी हो जाता है। यह एडेप्टिव मेन्टेनेंस है। उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के सॉफ्टवेयर में परिवर्तन इसलिए जरूरी हो जाता है, क्योंकि कंपनी उसमें कुछ अतिरिक्त जरूरतें जोड़ना चाहती है।»
परफेक्टिव मेन्टेनेंस : यह जरूरी नहीं कि हमेशा एरर या प्रॉब्लम होने पर ही सॉफ्टवेयर में बदलाव किया जाए। कभी-कभी सॉफ्टवेयर की कंप्यूटिंग/प्रोसेसिंग पॉवर को बढ़ाने के लिए भी उसमें परिवर्तन करना आवश्यक हो जाता है। यह परफेक्टिव मेन्टेनेंस कहलाता है। »
प्रिवेंटिव मेन्टेनेंस : इसके द्वारा सॉफ्टवेयर को इस तरह हैंडल किया जाता है, ताकि भविष्य में होनेवाली किसी प्रॉब्लम या बे्रक डाउन को रोका जा सके। इसे सॉफ्टवेयर री-इंजीनियरिंग भी कहा जाता है। 
 
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