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पिछले एक दशक में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के मद्देनजर भी लोगों की जागरूकता बढ़ी है। ऐसे में लोग डॉक्टर/मेडिकल एक्सपर्ट के पास जाने में जरा भी नहीं हिचकते। यही कारण है कि मेडिकल का क्षेत्र अपने बूम पर है। इन्हीं में से एक गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग विज्ञान) भी है। यह मेडिकल साइंस की ही एक शाखा है, जिसके अंतर्गत महिलाओं की प्रजनन क्षमता, ओवरी में संक्रमण तथा यूटेरस व प्रेगनेंसी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का निराकरण किया जाता है। इससे संबंधित एक्सपर्ट गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) कहलाते हैं। ये विशेषज्ञ प्रेगनेंसी के दौरान औरतों की देखभाल करने, सर्जरी, बच्चों की डिलीवरी और फैमिली प्लानिंग से जुड़े मामलों में अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। गायनेकोलॉजिस्ट से संबंधित भूमिका ऑब्स्टेट्रिशियन (प्रसूति रोग विशेषज्ञ) की भी होती है।
कब कर सकते हैं कोर्स
स्त्री एवं प्रसूति रोग से संबंधित पाठ्यक्रमों में अंडरग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट दोनों तरह के कोर्स शामिल हैं। अंडरग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश पाने के लिए छात्र को 12वीं/इंटरमीडिएट की परीक्षा साइंस स्ट्रीम (फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी) के साथ पास होना जरूरी है। इसके बाद मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में बैठना पड़ता है। यदि छात्र इस प्रवेश परीक्षा में सफल हो जाते हैं, तो उन्हें एमबीबीएस प्रोग्राम में दाखिला मिल जाता है। पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए प्रोफेशनल्स के पास एमबीबीएस की डिग्री होनी चाहिए। इसके बाद एमएस, एमडी व डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश मिलता है। कोर्स पूरा होते ही मेडिकल एसोसिएशन में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।
कोर्स से जुड़ी जानकारी
गायनेकोलॉजी बनने के लिए प्रोफेशनल्स को एमबीबीएस के बाद 2 वर्षीय सुपर स्पेशलिस्ट प्रोग्राम करना आवश्यक है। इस कोर्स के जरिए प्रोफेशनल्स को गायनोकोलॉजी से संबंधित पूरी जानकारी प्रदान की जाती है। कुछ प्रमुख कोर्स हैं-
  • एमएस इन गायनेकोलॉजी ऐंड ऑब्स्टेट्रिक्स
  • एमडी इन गायनेकोलॉजी ऐंड ऑब्स्टेट्रिक्स
  • डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी ऐंड ऑब्स्टेट्रिक्स
समर्पण है सफलता की कुंजी
बतौर गायनेकोलॉजिस्ट स्थापित होने के बाद इस क्षेत्र में तरक्की तभी संभव है, जब प्रोफेशनल्स अपने कार्य व दायित्व के प्रति पूरी तरह से समर्पित हों। अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी, मरीजों के साथ मित्रवत व्यवहार व निरंतर नई जानकारियों से अपडेट रहना भी उन्हें आगे तक ले जाता है।
कहां मिल सकता है अवसर
कुछ समय पूर्व तक यह माना जाता था कि गायनेकोलॉजिस्ट की मांग सिर्फ मेट्रो सिटी में ही है जबकि वास्तविकता यह है कि छोटे एवं ग्रामीण इलाकों में भी इनकी काफी डिमांड है। प्रोफेशनल्स की सबसे ज्यादा नियुक्ति सरकारी अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, फार्मास्यूटिकल कंपनियों, प्राइवेट हॉस्पिटल्स, कंसल्टेंट फर्म्स, सैनिक अस्पतालों आदि में होती है। इसके अलावा गायनोकोलॉजिस्ट की किसी भी शाखा में पीएचडी कर लेने के बाद टीचिंग अथवा रिसर्च का रास्ता भी खुलता है। एक समय के बाद जब प्रोफशनल्स के पास कुछ वर्षों का अनुभव हो जाता है, तो वह अपना खुद का नर्सिंग होम अथवा क्लीनिक स्थापित कर प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं।
आमदनी की रूपरेखा
गायनोकोलॉजिस्ट के रूप में आमदनी डॉक्टर की क्षमता पर निर्भर करती है। सरकारी अस्पतालों में वेतन निर्धारित पे-स्केल एवं ग्रेड के हिसाब से मिलता है। एक से अधिक अस्पतालों में भी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम मिलता है। अपनी प्रैक्टिस हो, तो आमदनी की कोई सीमा नहीं है।
चाहे जॉब का मामला हो अथवा निजी प्रैक्टिस का, मेडिकल फील्ड में कैरियर बनाने की इच्छा रखनेवाले विद्यार्थियों के लिए गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग विज्ञान) एक महत्वपूर्ण कैरियर ऑप्शन है।
के बाद
मुख्य संस्थान
  • एम्स, नई दिल्ली
  • www.aiims.edu
  • कोर्स : एमएस इन ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट
  • अल अमीन मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु
  • www.alameenmedical.org
  • कोर्स : डिप्लोमा इन ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट
  • एएफएमसी, पुणे
  • www.afmc.nic.in
  • कोर्स : एमएस इन ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट
  • असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़
  • www.assammedicalcollege.net
  • कोर्स : एमएस इन ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट
  • बीएमसीआरआई, बेंगलुरु
  • www.bmcri.org
कोर्स : एमएस इन ऑब्स्टेट्रिक्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट, पीजी डिप्लोमा इन गायनेकोलॉजी ऐंड ऑब्स्टेट्रिक्स 
 
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