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आर्थिक प्रगति के आधार पर ही किसी भी देश की तरक्की का निर्धारण किया जाता है। अर्थव्यवस्था को दुरुस्त बनाने और वित्तीय मामलों का लेखाजोखा रखने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत हमेशा ही बनी रहती है। तात्पर्य यह है कि इससे संबंधित जानकारों के लिए अवसर हमेशा ही बने रहते हैं। यही कारण है कि कॉमर्स स्ट्रीम की लोकप्रियता विद्यार्थियों के बीच दशकों से बनी हुई है और नए कैरियर विकल्पों की उपलब्धता के कारण इसकी लोकप्रियता में इजाफा ही होता जा रहा है। कॉमर्स फील्ड की खासियत यह है कि इसमें अवसरों की शुरुआत 12वीं के बाद ही हो जाती है। जैसे-जैसे आपकी शिक्षा का स्तर बढ़ता जाता है या आप किसी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करते हैं, तो और बेहतर अवसर मिलने लगते हैं। सरकारी से लेकर निजी कंपनियों तक के लिए कॉमर्स बैकग्राउंड के विद्यार्थियों के लिए रिक्तियां निकलती ही रहती हैं। कॉमर्स और इससे संबंधित अन्य विषयों की पढ़ाई के लिए उनसे जुड़े संस्थानों में संपर्क किया जा सकता है।
कंप्यूटर अकाउंटिंग (Computer Accounting)
नए जमाने में कारोबार और व्यापार के बदलते स्वरूप के कारण अकाउंटिंग का काम भी अब कंप्यूटर की मदद से होने लगा है। फाइलों का जमाना काफी पीछे छूट गया है। आज के माहौल में कंप्यूटर अकाउंटिंग के जानकारों के लिए अवसरों की कमी नहीं है। बढ़ती जरूरत के मद्देनजर ही इससे संबंधित कई खास सॉफ्टवेयर विकसित हो चुके हैं, जैसे टैली, एक्साइज, पे-सॉफ्ट, ईआरपी 9.0, एसीई आदि। इससे संबंधित कोर्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम विभिन्न संस्थानों में हैं। ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग बैंकों, वित्तीय संस्थानों, सीए फर्म और कॉरपोरेट कंपनियों में बनी रहती है। कंप्यूटर अकाउंटिंग के जानकारों के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट (Chartered Accountant CA)
चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए कंपनियों में आर्थिक प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं। सीए बनने के लिए तीन चरणों से गुजरना होता है- कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट (सीपीटी), इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स (आइपीसीसी) और फाइनल। दसवीं उत्तीर्ण करने के बाद कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) के लिए आईसीएआई के बोर्ड ऑफ स्टडीज में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता है। इसके बाद 12वीं और सीपीटी करने के बाद अन्य चरणों को पूरा किया जा सकता है। सीए पूरा करने के बाद आप नौकरी कर सकते हैं अथवा स्वतंत्र प्रैक्टिस भी कर सकते हैं। अधिक जानकारी इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट
www.icai.org
से प्राप्त कर सकते हैं। इंस्टीट्यूट का पता है : द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, आईसीएआई भवन, इंद्रप्रस्थ मार्ग, नई दिल्ली - 110002
ई-कॉमर्स (E-Commerce)
कंप्यूटर के इस जमाने कारोबार भी अब ऑनलाइन होने लगा है। इसके तहत कंप्यूटर के माध्यम से ही व्यवसाय होता है, जिसे ई-कॉमर्स के नाम से जाना जाता है। ऐसे ऑनलाइन कारोबार के लिए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की मदद ली जाती है। 12वीं करने के बाद अभ्यर्थी ई-कॉमर्स से संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद बैचलर ऑफ ई-कॉमर्स, बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन इन ई-कॉमर्स आदि कोर्सेज में एडमिशन लिया जा सकता है। गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली (www.ipu.ac.in), इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू), नई दिल्ली (
www.ignou.ac.in) जैसे कई संस्थान हैं, जहां ई-कॉमर्स से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं।
अकाउंटिंग के अलावा आर्थिक मामलों के हिसाब-किताब में दिलचस्पी आपको कॉमर्स से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिला सकती है। इस क्षेत्र में कैरियर के कई विकल्प हैं...
कंपनी सेक्रेटरी के रूप में मौके
कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए कंपनी सेक्रेटरी एक महत्वपूर्ण कैरियर विकल्प है, हालांकि 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद कंपनी सेक्रेटरी के फाउंडेशन कोर्स में कॉमर्स के अलावा आर्ट्स और साइंस विद्यार्थी भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे प्रोफेशनल्स के कार्यक्षेत्र के तहत कॉरपोरेट सेक्रेटेरियल सर्विसेज, ऑडिट एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज, कॉरपोरेट लॉ एडवाइजरी एंड रिप्रेजेंटेशन आदि विभिन्न बातों का समावेश होता है। कंपनी सेक्रेटरी के लिए कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और स्टॉक एक्सचेंज में विभिन्न अवसर उपलब्ध होते हैं। अधिक जानकारी के लिए द इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया की वेबसाइट
www.icsi.edu पर विजिट करें।
कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट (Cost and Management Accountant)
किसी कंपनी के आर्थिक संसाधनों के संचालन के साथ-साथ कॉस्ट कटिंग का काम जिस प्रोफेशनल के द्वारा किया जाता है, उसे कॉस्ट एंड मैनेजमेंट एकाउंटेंट (सीएमए) के नाम से जाना जाता है। किसी उत्पाद के मूल्य निर्धारण जैसे कार्य भी सीएमए को करने होते हैं। सीएमए बनने के लिए रेगुलर व पत्राचार दोनों तरह के कोर्स मौजूद हैं। दि इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू होती है। फाउंडेशन, इंटरमीडिएट व फाइनल, तीन स्तरों से गुजर कर कोर्स को पूरा किया जा सकता है। 12वीं पास कर चुके विद्यार्थी फाउंडेशन कोर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। साल में दो बार इसके लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसके प्रोफेशनल्स को कॉस्ट एकाउंटिंग, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, बिजनेस एनालिसिस आदि में अवसर मिलते हैं। इंडियन कॉस्ट एकाउंटिंग सर्विस (आईसीएएस) के माध्यम से भी कैरियर को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे संबंधित वेबसाइट
www.icwai.org
है।
स्कूल-कॉलेज में शिक्षण
आपकी दिलचस्पी यदि अध्यापन से संबंधित कार्यों में है, तो संबंधित योग्यता प्राप्त करके इससे जुड़ सकते हैं। बीएड, एमएड करने के बाद स्कूल और नेट (www.ugcnetonline.in) क्वालिफाई करने के बाद कॉलेज स्तर तक अध्यापन से संबंधित अवसर आपको मिल जाएंगे। इस काम में सफलता के लिए जरूरी है कि आपको गहराई से विषय का ज्ञान हो।
स्टॉक ब्रोकर (Stock Broker)
कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए स्टॉक ब्रोकर के रूप में भी एक बेहतर कैरियर विकल्प उपलब्ध है। स्टॉक ब्रोकर का संबंध शेयर मार्केट और इससे संबंधित कारोबार से होता है। इससे संबंधित प्रोफेशनल्स किसी व्यक्ति अथवा कंपनी के लिए काम कर सकते हैं। आईसीएफएआई, हैदराबाद
(http://ibshyderabad.org/)
और एएमएफआई, मुंबई में इससे संबंधित कोर्स करके इस क्षेत्र में खुद को स्थापित किया जा सकता है।
सिविल सर्विसेज (Civil Services)
यदि वाणिज्य विषय पर आपकी पकड़ गहरी है तो सिविल सेवा में भी आप कॉमर्स एंड अकाउंटेंसी को एक विषय के रूप में शामिल कर सकते हैं। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में विद्यार्थी इकोनॉमिक्स, कॉमर्स और अकाउंटेंसी से केंद्र और राज्य स्तर पर ऐसी प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
फाइनेंस मैनेजमेंट (Finance Management)
फाइनेंस मैनेजमेंट के प्रोफेशनल्स की जरूरत हर संस्थान को होती है। इसके विषय-वस्तु का स्वरूप कुछ इस तरह है कि कॉमर्स के विद्यार्थियों को इसकी पढ़ाई में काफी मदद मिलती है। आईआईएम सहित देश के सभी महत्वपूर्ण संस्थानों में फाइनेंस मैनेजमेंट से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं। अच्छे संस्थानों में दाखिले के लिए आपको कैट (कॅमन एडमिशन टेस्ट), मैट (मैनेजमेंट एप्टीट्यूडटेस्ट) आदि प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होना होगा। फाइनेंस मैनेजमेंट के अलावा उच्च शिक्षा के लिए वित्त विषयों से संबंधित अन्य पाठ्यक्रमों में भी कॉमर्स के विद्यार्थियों को काफी सहूलियत होती है।
मुख्य संस्थान
  • श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), दिल्ली
  • www.srcc.edu
  • लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
  • www.lkouniv.ac.in
  • बीएचयू, वाराणसी
  • www.bhu.ac.in
  • प्रेसीडेंसी कॉलेज, चेन्नई
  • www.presidencychennai.com
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, इलाहाबाद
  • www.allduniv.ac.in
  • पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पटना यूनिवर्सिटी, पटना
  • www.cocpatna.org
 
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