Menu

sarkarinaukripaper.com brings the Top Sarkari naukri Jobs like Banking, Railway, Teaching, Public Sector, Science-Research jobs recruitment 2016 Government Jobs in India from Central / State Governments, PSU, Courts, Universities and Armed Forces सरकारी नौकरी stock market, career guidance courses after 12th and tech news, in hindi Search investing for beginners, how to make money online and health news articles. Grab the Tech news like web hosting, blogging, blogger or seo, templates & tools

Subscribe us Follow by Email

एक सुख का साथी उस बैंकर की तरह होता है, जो आसमान साफ होने पर तो छाता उधार देता है, लेकिन बारिश होते ही उसे वापस ले लेता है। ऐसी मनोवृत्ति वाले व्यक्ति कभी अच्छे मित्र नहीं हो सकते। परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, सच्चे दोस्त कभी साथ नहीं छोड़ते, बल्कि बुरे वक्त में भी मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। दोस्ती त्याग मांगती है और इम्तिहान लेती है। सुख में तो सभी साथी होते हैं, पर दोस्ती की परीक्षा तब होती है, जब परिस्थितियां विपरीत होती हैं। अब आप ही सोचिए कि आप कैसा दोस्त बनना चाहेंगे!
अन्य रिश्तों की ही तरह दोस्ती को भी बेहतर रूप देने के लिए त्याग, निष्ठा और समझदारी की जरूरत होती है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो न सिर्फ अच्छे दोस्त के रूप में आपकी पहचान बनती है, बल्कि बदले में आपको भी अच्छे दोस्त मिलते हैं। इम्तिहान की घड़ियों से गुजर कर ही दोस्ती मजबूत बनती है। इसलिए आपकी कोशिश यही होनी चाहिए कि आप सच्चे दोस्त बनें। झूठे रिश्तों को पहचानने की कला हमें आनी चाहिए।
दो दोस्त जंगल जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक भालू मिला। भालू को देखते ही उनमें से एक दोस्त पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन पैर में कुछ समस्या होने से दूसरा दोस्त ऐसा नहीं कर सका। इसलिए वह जमीन पर मुर्दे की तहर लेट गया। भालू उसके पास आया और उसे सूंघकर चला गया। भालू के जाने के बाद पहला व्यक्ति पेड़ से उतर गया और दूसरे से पूछा कि भालू ने तुमसे क्या कहा? तब दूसरे व्यक्ति ने जवाब देते हुए कहा कि भालू का यह कहना था कि ऐसे देस्तों से दूर ही रहो, जो विपरीत परिस्थितियों में अथवा खतरा आने पर अकेला छोड़ दे। वाकई इस कहानी का संदेश दिन के उजाले की तरह साफ है। आपसी विश्वास और भरोसा ही हर दोस्ती की बुनियाद होती है। सच्ची दोस्ती में दोस्त के साथ सदैव खड़ा रहना चाहिए। ऐसी दोस्ती में एक-दूसरे की मदद करना एक-दूसरे पर अहसान करना नहीं होता है। यह दोस्ती की सजह अभिव्यक्ति है, उसका मकसद नहीं।
रिश्ते अपने आप ही नहीं बन जाते, बल्कि उन्हें बनाने में समय लगता है। रिश्ते ईर्ष्या, अहंकार और रूखे व्यवहार से नहीं बनते, बल्कि आपसी समझ, मदद और त्याग की भावना से इनका निर्माण होता है। अच्छी दोस्ती के लिए सदैव कोशिश करनी चाहिए और जब ऐसी दोस्ती हो जाए, तो उसे किसी पौधे की तरह सींचने की कोशिश करनी चाहिए। आप चाहे जिस भी क्षेत्र से संबंध रखते हों, दोस्ताना व्यवहार से ही आपकी तरक्की की राह बनती है।
बुरे वक्त में काम आना ही सच्ची दोस्ती का मुख्य आधार है। सिर्फ सुख में साथ रहने वाले दोस्त की श्रेणी में नहीं आते...
 
Top