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अपने देश में पिछले दो दशकों में खेल के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। खेल तो पहले भी खेला जाता था, पर खेल के माध्यम से मिलने वाले रोजगार के अवसरों और आमदनी में अब काफी बेहतर स्थिति देखने को मिल रही है। यही कारण है कि आज स्पोर्ट्स को न सिर्फ हॉबी, बल्कि कैरियर के रूप में भी काफी महत्व दिया जाने लगा है। ऐसे में खेल को कैरियर के रूप में अपनाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। फिटनेस, यश, राष्ट्रप्रेम और कैरियर का तालमेल चाहिए, तो खेल-कूद को कैरियर के रूप में अपनाया जा सकता है। खेलने में दिलचस्पी होना अब समय की बरबादी नहीं है, बल्कि यह कैरियर निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार भी है।
व्यक्तिगत कौशल
खिलाड़ियों में खेल के प्रति समर्पण और जीतने का जुनून होना चाहिए। उनके लिए अपनी फिटनेस पर ध्यान देना सबसे जरूरी है। जब फिट रहेंगे, तभी खेल में हिट रहेंगे। खिलाड़ियों को दबाव झेलने की क्षमता होनी चाहिए। इसके अलावा उन्हें समय सीमा के भीतर काम करने में दक्ष होना चाहिए। उनके लिए अपने अभ्यास और दिनचर्या को लेकर अनुशासित होना भी जरूरी है। निरंतर सीखने की ललक और कोच के निर्देशों का पालन करने की आदत से ही आप खुद को एक बेहतर खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
कैसे-कैसे पाठ्यक्रम
खेल में बेहतर करने के लिए आपको उस खेल में दक्ष होना चाहिए। खेल से संबंधित ट्रेनिंग सेंटर से उसका बेहतर प्रशिक्षण लिया जा सकता है। ऐसे में खिलाड़ी बनने के लिए कोर्स उतना मायने नहीं रखता, जितना खेल में उम्दा प्रदर्शन। हां, कुछ संस्थानों में स्पोर्ट्स और फिजिकल एजुकेशन से संबंधित कोर्स उपलब्ध हैं, जो इस क्षेत्र में कैरियर बनाने के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये कोर्स डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा लेवल के हैं। किसी भी संकाय से 12वीं करने के बाद इन कोर्सेज में दाखिला लिया जा सकता है। बीपीएड (बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन), एमपीएड (मास्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) जैसे मुख्य पाठ्यक्रमों के अलावा इस क्षेत्र में पीएचडी करने की भी सुविधा है। विभिन्न संस्थानों में स्पोर्ट्स मेडिसिन, कोचिंग, स्पोर्ट्स काउंसलिंग, फिजिकल फिटनेस आदि से संबंधित कोर्सेज भी हैं, जिनमें अपनी योग्यता के अनुसार दाखिला लिया जा सकता है। संबंधित विभिन्न कोर्सेज के दौरान विद्यार्थियों को स्पोर्ट्स साइकोलॉजी, स्पोर्ट्स फिजियोलॉजी, स्पोर्ट्स हिस्ट्री, लर्निंग थ्योरी, फिजिकल फिटनेस, स्पोर्ट्स मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन स्किल्स, लीडरशिप आदि के बारे में बताया जाता है।
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया
खेल का विकास हो और खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाए, इसके मद्देनजर स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा विभिन्न स्तरों पर खिलाड़ियों की परख, चयन और प्रशिक्षण के लिए प्रयत्न किया जाता है। फिलहाल देश में इसके छह रिजनल स्पोर्ट्स सेंटर हैं, जिनमें हॉकी, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। स्पोर्ट्स टैलेंट स्कीम के अंतर्गत अथॉरिटी द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। विभिन्न खेलों के लिए खिलाड़ियों के चयन के अलावा स्पोर्ट्स के क्षेत्र में रिसर्च एवं डेवलपमेंट से संबंधित कार्य भी इसके द्वारा किए जाते हैं।
स्कॉलरशिप से प्रोत्साहन
भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा राज्य स्तर, राष्ट्रीय स्तर, कॉलेज/ विश्वविद्यालय स्तर, महिलाओं के लिए आदि कई श्रेणियों में छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। बीते साल की परफॉर्मेंस के आधार पर स्कॉलरशिप दी जाती है, जिसमें नवीकरण का भी प्रावधान है। अधिक जानकारी वेबसाइट
  • www.sportsauthority
  • ofindia.nic.in
से प्राप्त की जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भी प्राधिकरण के कार्यालय स्थित हैं। वहां से भी इस बाबत सूचना मिल सकती है।
कहां-कहां हैं अवसर
विदेशों में तो खेलों के माध्यम से तमाम अवसर मिलते हैं, अब भारत में भी ऐसे अवसर उपलब्ध होने लगे हैं, खिलाड़ी के रूप में भी और कोर्स करने के पश्चात अन्य रूपों में भी। स्पोर्ट्स प्रोफेशनल कई रूपों में मौके पाते हैं, जैसे प्लेयर, फिजिकल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर, कोच, अंपायर/रेफरी, स्पोर्ट्स क्लब मैनेजर, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर, स्पोर्ट्स कमेंट्रेटर, स्पोर्ट्स बिजनेस मार्केटिंग, स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट, स्पोर्ट्स फोटो जर्नलिस्ट, स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सप्लायर/ मैन्युफैक्चरर, टीम मैनेजर आदि। इसके अलावा विभिन्न कॉरपोरेट हाउसेज और सरकारी विभागों में टैलेंटेड खिलाड़ियों के लिए रिक्तियां निकलती रहती हैं। लगभग सभी सरकारी विभागों में खिलाडिय़ों के लिए नौकरी संबंधी आरक्षण का प्रावधान होता है। यदि आमदनी की बात करें तो जॉब में तो निर्धारित राशि मिलती है, पर खिलाड़ी के रूप में नाम होने पर आमदनी की कोई सीमा नहीं होती है।
 
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