Menu

sarkarinaukripaper.com brings the Top Sarkari naukri Jobs like Banking, Railway, Teaching, Public Sector, Science-Research jobs recruitment 2016 Government Jobs in India from Central / State Governments, PSU, Courts, Universities and Armed Forces सरकारी नौकरी stock market, career guidance courses after 12th and tech news, in hindi Search investing for beginners, how to make money online and health news articles. Grab the Tech news like web hosting, blogging, blogger or seo, templates & tools

Subscribe us Follow by Email

संपदा दो प्रकार की होती है, गोचर यानी जो दिखाई दे और अगोचर जो दिखाई न दे। भूमि, मकान, आभूषण, नकदी आदि गोचर संपत्ति के प्रमुख उदाहरण हैं। लेकिन संपदा की एक श्रेणी ऐसी भी होती है, जिसे स्पर्श नहीं किया जा सकता। इस श्रेणी में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) को शामिल किया जा सकता है, जो गोचर संपत्तियों से अधिक मूल्यवान होती है। बौद्धिक संपदा गोचर संपत्ति एकत्र करने का महत्वपूर्ण साधन है। गोचर संपत्ति की ही तरह आज बौद्धिक संपदा भी विश्व अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण संचालक शक्ति बन गई है।
सुरक्षा की जरूरत
हर प्रकार की संपत्ति को सुरक्षा और संरक्षण की जरूरत होती है। बौद्धिक संपत्तियों को भी इस तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है। गोचर संपत्ति को अगर चुराया जा सकता है, तो बौद्धिक संपदा के भी नकल किए जाने का अंदेशा रहता है। साहित्य और कला के क्षेत्र में इसकी सर्वाधिक जरूरत होती है। यही वजह है कि बौद्धिक संपत्तियों और उनके स्वामियों के हितों के संरक्षण के लिए उचित नीतिगत उपाय और सक्षम तंत्र की आवश्यकता है। इसी तंत्र को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (आईपीआर) के रूप में जाना जाता है।
विषय का स्वरूप
आईपीआर मुख्य रूप से वैधानिक अधिकार हैं, जो उत्पाद/कार्य के रचनाकर्ता अथवा स्वामी को प्रदान किए जाते हैं, ताकि वह एक निश्चित अवधि तक अन्य लोगों को अपने उत्पाद के वाणिज्यिक दोहन से रोक सके। यह अधिकार रचनाकर्ता/आविष्कारकर्ता को उत्पाद/कार्य का मालिक बनाते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार कानून आधुनिक अवधारणा नहीं है, बल्कि इनकी जड़ें 15वीं सदी में तलाशी जा सकती हैं। उस समय प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कार से साहित्यिक कार्यों की नकल करने का काम अभूतपूर्व ढंग से संभव हुआ। इस गैर कानूनी नकल को देखते हुए व्यक्तिगत रचनाओं और आविष्कारों के संरक्षण के लिए कानून बनाए गए। यह बौद्धिक संपदा अधिकार कानूनों की शुरुआत थी, जिसकी परिणति आज हम विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) और ट्रिप्स यानी व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते के रूप में देखते हैं।
कैसे-कैसे प्रकार
जिस तरह गोचर संपत्तियों की रक्षा के अनेक तौर-तरीके हैं, उसी प्रकार अगोचर संपत्तियों यानी किसी पुस्तक, किसी कविता, किसी वैज्ञानिक या प्रौद्योगिकी संबंधी आविष्कार, औद्योगिक अथवा कृषि संबंधी आविष्कार, किसी प्रसारण, फिल्म अथवा कोई अन्य वस्तु, जिसकी रचना मौलिक रूप से मानव संसाधनों द्वारा की गई हो, के संरक्षण के अनेक उपाय हैं। मौलिकता के संरक्षण के लिए इन साधनों का प्रयोग करते हैं-
ट्रेडमार्क : ट्रेडमार्क किसी लोगो, प्रतीक, शब्द, मुहावरे, जिंगल, चित्र, ध्वनि और यहां तक कि खुशबू अथवा इन सभी वस्तुओं का मिला-जुला रूप हो सकता है, जिसका इस्तेमाल किसी रचना/सेवा को अन्य रचना/सेवा से अलग दर्शाने के लिए किया जाता है। ट्रेडमार्क किसी विशेष वस्तु/सेवा को खास पहचान प्रदान करता है और इस तरह वह उसे नकल किए जाने से बचाता है।
पेटेंट : पेटेंट किसी व्यक्ति अथवा कंपनी/संगठन के रूप में व्यक्तियों के समूह को प्रदान किया जाने वाला वह अधिकार है, जो किसी खास आविष्कार या बेजोड़ विनिर्माण प्रक्रिया से लाभ उठाने का हक प्रदान करता है। पेटेंट किसी भी आवेदक के देश की सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है और इससे आविष्कारकर्ता को एक सीमित अवधि तक यह अधिकार मिल जाता है कि उसकी अनुमति के बिना कोई अन्य व्यक्ति उसके आविष्कार का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
कॉपीराइट : यह मौलिक साहित्यिक कार्य, जैसे पुस्तकों, उपन्यासों, गीतों, गानों, कम्प्यूटर प्रोग्रामों आदि के संरक्षण का साधन है। ये रचनाएं अस्तित्व में आते ही रचनाकर्ता की संपत्ति बन जाती हैं।
डिजाइन : डिजाइन किसी उत्पाद का संपूर्ण या आंशिक प्रस्तुतीकरण होता है, जो उसके रंग, स्वरूप, पैकेजिंग या उसकी अन्य विशेषताओं की परिणति होता है।
पाठ्यक्रम कैसे-कैसे
बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। उनमें से कुछ हैं- बौद्धिक संपदा अधिकारों में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पेटेंट के मूल सिद्धांतों और आईपीआर में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पेटेंट संबंधी कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, साइबर कानूनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, बौद्धिक संपदा कानून में डिप्लोमा आदि। ज्यादातर पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु शैक्षणिक योग्यता स्नातक है।
अवसर कहां-कहां
जहां तक रोजगार की बात की जाए, तो एफएमसीजीएस और ड्यूरेबल वस्तु उद्योग, कानून संबंधी कंपनियां, कृषि के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान, सॉफ्टवेयर कंपनियां, फार्मास्युटिकल्स कंपनियां, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान आदि में रोजगार की बेहतर संभावनाएं व्याप्त होती हैं। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स से संबंधित फर्म्स में भी मौके तलाशे जा सकते हैं। इस बाबत रिक्तियां रोजगार समाचार और अन्य समाचार-पत्रों के अलावा जॉब वेबसाइट्स पर भी प्रकाशित होती रहती हैं।

आविष्कार, औद्योगिक अथवा कृषि संबंधी आविष्कार, किसी प्रसारण, फिल्म अथवा कोई अन्य वस्तु, जिसकी रचना मौलिक रूप से मानव संसाधनों द्वारा की गई हो, के संरक्षण के अनेक उपाय हैं। मौलिकता के संरक्षण के लिए इन साधनों का प्रयोग करते हैं-
ट्रेडमार्क : ट्रेडमार्क किसी लोगो, प्रतीक, शब्द, मुहावरे, जिंगल, चित्र, ध्वनि और यहां तक कि खुशबू अथवा इन सभी वस्तुओं का मिला-जुला रूप हो सकता है, जिसका इस्तेमाल किसी रचना/सेवा को अन्य रचना/सेवा से अलग दर्शाने के लिए किया जाता है। ट्रेडमार्क किसी विशेष वस्तु/सेवा को खास पहचान प्रदान करता है और इस तरह वह उसे नकल किए जाने से बचाता है।
पेटेंट : पेटेंट किसी व्यक्ति अथवा कंपनी/संगठन के रूप में व्यक्तियों के समूह को प्रदान किया जाने वाला वह अधिकार है, जो किसी खास आविष्कार या बेजोड़ विनिर्माण प्रक्रिया से लाभ उठाने का हक प्रदान करता है। पेटेंट किसी भी आवेदक के देश की सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है और इससे आविष्कारकर्ता को एक सीमित अवधि तक यह अधिकार मिल जाता है कि उसकी अनुमति के बिना कोई अन्य व्यक्ति उसके आविष्कार का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता है।
कॉपीराइट : यह मौलिक साहित्यिक कार्य, जैसे पुस्तकों, उपन्यासों, गीतों, गानों, कम्प्यूटर प्रोग्रामों आदि के संरक्षण का साधन है। ये रचनाएं अस्तित्व में आते ही रचनाकर्ता की संपत्ति बन जाती हैं।
डिजाइन : डिजाइन किसी उत्पाद का संपूर्ण या आंशिक प्रस्तुतीकरण होता है, जो उसके रंग, स्वरूप, पैकेजिंग या उसकी अन्य विशेषताओं की परिणति होता है।
पाठ्यक्रम कैसे-कैसे
बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। उनमें से कुछ हैं- बौद्धिक संपदा अधिकारों में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पेटेंट के मूल सिद्धांतों और आईपीआर में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, पेटेंट संबंधी कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, साइबर कानूनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, बौद्धिक संपदा कानून में डिप्लोमा आदि। ज्यादातर पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु शैक्षणिक योग्यता स्नातक है।
अवसर कहां-कहां
जहां तक रोजगार की बात की जाए, तो एफएमसीजीएस और ड्यूरेबल वस्तु उद्योग, कानून संबंधी कंपनियां, कृषि के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान, सॉफ्टवेयर कंपनियां, फार्मास्युटिकल्स कंपनियां, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान आदि में रोजगार की बेहतर संभावनाएं व्याप्त होती हैं। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स से संबंधित फर्म्स में भी मौके तलाशे जा सकते हैं। इस बाबत रिक्तियां रोजगार समाचार और अन्य समाचार-पत्रों के अलावा जॉब वेबसाइट्स पर भी प्रकाशित होती रहती हैं।
मुख्य संस्थान
  • आईआईटी खड़गपुर
  • http://www.iitkgp.ac.in
  • राजीव गांधी नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मैनेजमेंट, नागपुर
  • http://www.ipindia.nic.in/NIIPM
  • सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ स्कूल, पुणे
  • www.symlaw.ac.in
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेटेंट एंड ट्रेडमार्क अटॉर्नी, दिल्ली
  • http://www.iipta.com
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
  • www.ignou.ac.in
  • ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, नई दिल्ली
  • www.giipinfo.com
 
Top