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फुटवियर भी फैशन का अनिवार्य हिस्सा है, न सिर्फ अपने देश में, बल्कि पूरे विश्व में। पुरुषों से लेकर महिलाओं तक और बच्चों से लेकर बड़ों तक फैशनेबल बनने और अपने व्यक्तित्व में निखार लाने में फुटवियर की खास भूमिका होती है। फैशन के दृष्टिकोण से फुटवियर का महत्व किसी भी मामले में पोशाकों और ड्रेसेज से कम नहीं है। यही कारण है कि अब इस फील्ड में ट्रेंड प्रोफेशनल्स की मांग भी बढऩे लगी है, ताकि लोगों ट्रेंड के अनुरूप और गुणवत्ता युक्त फुटवियर मिल सकें।
विषय का स्वरूप
व्यापक जरूरत के कारण आज फुटवियर से संबंधित एक पूरी इंडस्ट्री विकसित हो चुकी है। फुटवियर से संबंधित पाठ्यक्रमों में इसके निर्माण के अलावा शोध संबंधी बातों की भी जानकारी दी जाती है। चमड़े (लेदर) के अलावा इसमें बड़े पैमाने पर प्लास्टिक, जूट, रबर, फैब्रिक आदि का भी इस्तेमाल किया जाता है। कच्चे माल के अलावा फुटवियर सेक्टर में मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी मशीनरी भी आती है।
कोर्स कैसे-कैसे
सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, बीटेक, एमटेक आदि फुटवियर टेक्नोलॉजी के अंतर्गत कई तरह के कोर्स हैं। इस फील्ड में विभिन्न शॉर्ट टर्म कोर्सेज भी कैरियर के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
शैक्षणिक योग्यता
12वीं उत्तीर्ण होने के बाद फुटवियर टेक्नोलॉजी के ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। किसी भी संकाय के विद्यार्थी इसमें प्रवेश पा सकते हैं। इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जा सकती है। फुटवियर टेक्नोलॉजी में बीटेक/एमटेक जैसे पाठ्यक्रम भी हैं। साइंस से 12वीं करने के बाद बीटेक और फिर एमटेक करने की योग्यता बनती है। 10वीं के बाद विद्यार्थी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।
व्यक्तित्व कौशल
तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यक्ति में क्रिएटिविटी का गुण भी होना चाहिए। जूते, चप्पल, सैंडल आदि के डिजाइनिंग ट्रेंड पर पर भी हमेशा नजर रखनी चाहिए।
अवसर अनेक
शू निर्माता कंपनियों में डिजाइनिंग, मार्केटिंग और मैन्यूफैक्चरिंग में ऐसे प्रोफेशनल्स को मौके मिलते हैं। इसके अलावा शोरूम में अवसर मिलते हैं। उच्च शिक्षा हासिल करके टीचिंग फील्ड में भी कैरियर निर्माण किया जा सकता है। अनुभव होने के बाद शू डिजाइनिंग कंसल्टेंट के रूप में भी काम किया जा सकता है। शू प्रोडक्शन और शू रिटेलिंग के माध्यम से स्वरोजगार के भी मौके आपके लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

यदि आपकी दिलचस्पी फुटवियर डिजाइनिंग और प्रोडक्शन में हो, तो इससे संबंधित कोर्सेज में दाखिला लेना कैरियर के दृष्टिकोण से फायदेमंद है...
  • एफडीडीआई, नोएडा
  • कोर्स : डिप्लोमा इन फुटवियर टेक्नोलॉजी, सर्टिफिकेट कोर्स इन फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी, पीजी डिप्लोमा इन फुटवियर टेक्नोलॉजी
  • www.fddiindia.com
  • सेंट्रल लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई
  • कोर्स : एमटेक इन फुटवियर साइंस, डिप्लोमा प्रोग्राम इन फुटवियर टेक्नोलॉजी, शॉर्ट टर्म कोर्सेज
  • http://www.clri.org
  • इंस्टीट्यूट ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, बेंगलुरु
  • कोर्स : डिप्लोमा इन लेदर टेक्नोलॉजी, सर्टिफिकेट कोर्स इन फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग
  • www.kiltbangalore.com
  • गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड लेदर टेक्नोलॉजी, कोलकाता
  • कोर्स : बीटेक इन लेदर टेक्नोलॉजी
  • http://www.gcelt.gov.in
  • हरबर्ट बटलर टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, कानपुर
  • कोर्स : बीटेक इन लेदर टेक्नोलॉजी
  • http://www.hbti.ac.in
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), नई दिल्ली
  • कोर्स : बैचलर इन लेदर डिजाइनिंग
  • www.nift.ac.in/delhi
  • सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आगरा
  • कोर्स : डिप्लोमा इन फुटवियर मैन्यूफैक्चरिंग ऐंड डिजाइन, सर्टिफिकेट इन फुटवियर डिजाइन ऐंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट, शॉर्ट टर्म कोर्स इन शू डिजाइनिंग ऐंड प्रोडक्शन टेक्नोलॉजी
  • www.cftiagra.org.in
 
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