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कोई काम मुश्किल नहीं होता, यदि उसे पूरा करने का आत्मविश्वास आपमें हो। योग्यता में निखार लाकर आत्मविश्वास को बढ़ाया जा सकता है...
आत्मविश्वास वह पूंजी है, जिसके बल पर आप किसी भी मंजिल पर पहुंचने में सफल हो सकते हैं। अपना आत्मविश्वास बनाने या उसे कमजोर करने के लिए आप खुद ही जिम्मेदार होते हैं, क्योंकि यह आपके ही हाथ में होता है। हां, दूसरों से आपको थोड़ा बहुत सहयोग या दिशानिर्देश मिल सकता है, पर किसी काम को लेकर अपना आत्मविश्वास बनाए रखना पूरी तरह से आपका काम है। बाधाओं को दूर करने की कला सीखना आत्मविश्वास को दमदार बनाने में काफी मददगार होता है।
जिस व्यक्ति में आत्मविश्वास भरा होता है और कुछ कर दिखाने के लिए वह हर वक्त आत्मप्रेरणा से ओत-प्रोत रहता है, उसमें आगे बढ़ने की और नेतृत्व करने की स्वाभाविक क्षमता होती है। चाहे कैरियर का मामला हो या जीवन के किसी भी मामले से जुड़ी बात हो, सफलता इस बात से ही निर्धारित होती है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने को लेकर आपका आत्मविश्वास कितना है और इस मामले में आप खुद को कितना मूल्यवान मानते हैं। आत्मविश्वास अंधेरे में भी उस रोशनी की तरह है, जिसके बल पर विपरीत परिस्थितियों में भी आप विजेना बनकर उभरते हैं।
आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए जहां अपनी योग्यता को विकसित करने की जरूरत है, वहीं यह भी जरूरी है कि आपका लक्ष्य निर्धारित हो। लक्ष्य यदि बड़ा हो, तो उसे छोटे-छोटे लक्ष्यों में बांटा जा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि आप प्रतिदिन का अपना लक्ष्य निर्धारित करें। इस तरह छोटे-छोटे लक्ष्यों को बेधते हुए आप बड़ी मंजिल को भी प्राप्त कर लेंगे। छोटे-छोटे लक्ष्यों को प्राप्त करने से आपको खुशी मिलती है, उससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे काम की ऊर्जा आपमें बनी रहती है।
किसी वैज्ञानिक से उसकी खोज के बारे में पूछें, तो पता चलेगा कि इसमें उसने वर्षों लगाए और कई ने तो इसमें अपनी पूरी जिंदगी ही बिता दी। आज आप जो भी चीजें देख रहे हैं, वह उनके आविष्कार करने वालों के आत्मविश्वास का ही परिणाम है। कुछ भी बड़ा या अच्छा काम करने के लिए हमें अपनी दिलचस्पी के काम करने के लिए प्रवृत्त होना चाहिए। इसके बाद अपनी योग्यता को निखारने के लिए अपना सबकुछ झोंक देना चाहिए। रुचि और क्षमता के तालमेल से ही कुछ कर दिखाने का आत्मविश्वास आपमें घर करेगा और आपके कदम लक्ष्य की ओर बढ़ने लगेंगे। कुछ भी असंभव नहीं है, ऐसा सोचना अहंकार नहीं, बल्कि आपका आत्मविश्वास है।
अलबर्ट आइंस्टीन ने सही ही कहा है कि हर व्यक्ति में कोई-न-कोई खास योग्यता होती है। उसी से उसकी क्षमता का आकलन करना चाहिए। अब यदि किसी मछली की योग्यता का आकलन पेड़ पर चढ़ने की उसकी क्षमता से किया जाए, तो यह बेवकूफी ही कही जाएगी। अपनी क्षमता को पहचान कर उसके अनुसार मेहनत करने से ही सफलता मिलती है। आत्मविश्वास बढ़ाने का यही मूलमंत्र है।
 
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