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फिटनेस और हेल्थ से जुड़े क्षेत्र में भविष्य बनाने की इच्छा हो, तो फिजियोथेरेपी के माध्यम से भी कदम बढ़ाए जा सकते हैं...
रास्ते और भी
चिकित्सा विज्ञान की एक विशेष शाखा है फिजियोथेरेपी, जो व्यक्ति को न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक रूप से भी दुरुस्त रखने में भी मददगार है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हे कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। हड्डियों और मांसपेशियों से संबंधित विभिन्न रोगों के इलाज में यह काफी कारगर है। इसके जानकार फिजियोथेरेपिस्ट अथवा फिजिकल थेरेपिस्ट कहे जाते हैं।
कार्य प्रकृति
फिजियोथेरेपी के अंतर्गत इलाज के लिए व्यायाम, इलेक्ट्रोथेरेपी, मसाज आदि विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विभिन्न उपकरणों की मदद भी ली जाती है। शारीरिक उपचार के दौरान भी रोगी की मानसिक अवस्था का भी ध्यान रखा जाता है। रोगी की शारीरिक स्थिति और मूवमेंट डिसऑर्डर का आकलन करना अत्यंत जरूरी होता है। इलाज में व्यक्ति की आयु का भी ध्यान रखा जाता है। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की आंतरिक चोट पर गहराई से नजर रखी जाती है।
कैसे-कैसे कोर्स
फिजियोथेरेपी से संबंधित बैचलर स्तर के कोर्स को बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (बीपीटी) कहते है और पीजी लेवल का कोर्स मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी (एमपीटी) कहलाता है। बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स की अवधि सामान्यतः साढ़े 4 साल की होती है, जिसमें अंतिम छह महीने इंटर्नशिप के होते हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स की अवधि 2 साल है। इस दौरान अभ्यर्थी न्यूरोलॉजिकल फिजियोथेरेपी, पेडियाट्रिक फिजियोथेरेपी, स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपी आदि में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रिसर्च से संबंधित पाठ्यक्रम भी हैं। डिप्लोमा ऑफ फिजियोथेरेपी (डीपीटी) फिजियोथेरेपी से संबंधित इंटरनेशनल सोसाइटी
(www.csp.org.uk)
है, जहां फिजियोथेरेपी से संबंधित विभिन्न ऑनलाइन कोर्स करने की भी सुविधा है।
पाठ्यक्रम की रूपरेखा
बिहैवियरल साइंस, एनाटोमी, ऑर्थोपेडिक्स, रिहैबिलिटेशन, फिजियोलॉजी, मूवमेंट साइंस, बायो-मैकेनिक्स, न्यूरोलॉजिकल साइंस आदि विभिन्न टॉपिक हैं, जिनके बारे में फिजियोथेरेपी से जुड़े पाठ्यक्रमों में जानकारी दी जाती है।
शैक्षणिक योग्यता
12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (पीसीबी) से पढ़ाई करने वाले अभ्यर्थी फिजियोथेरेपी से संबंधित पाठ्यक्रमों में दाखिला ले सकते हैं। विभिन्न संस्थानों में दाखिले से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी उनकी वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।
मौके कहां-कहां
कोर्स (एमपीटी) के बाद फिजियोथेरेपी प्रोफेशनल अस्पताल, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र, रिहैबिलिटेशन सेंटर, स्पोर्ट्स एकेडमी, फिटनेस सेंटर आदि में अवसर पाते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करके टीचिंग के क्षेत्र का भी चयन किया जा सकता है। अनुभव और आर्थिक तालमेल से खुद का फिजियोथेरेपी सेंटर भी एक विकल्प है।
विषय की गहरी समझ और अच्छी ट्रेनिंग प्राप्त करके ही इस क्षेत्र में तरक्की की जा सकती है। आरंभ में किसी अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट के साथ काम करने का अनुभव हासिल करना कॅरियर के दृष्टिकोण से बेहतर होता है।
  • एस.पी. हॉस्पिटल, दिल्ली
  • इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकली हैंडीकैप्ड, नई दिल्ली
  • www.iphnewdelhi.in
  • लक्ष्मीबाई नेशनल कॉलेज ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर
  • www.lnipe.gov.in
  • गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
  • www.gndu.ac.in
  • बिहार कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी एंड ऑक्यूपेशनल थेरेपी, पटना
  • http://www.bcpo.co.in
  • गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार
  • www.gjust.ac.in
  • इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स साइंसेज, नई दिल्ली
  • www.igipess.du.ac.in 
 
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