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Relation चाहे कोई भी हो, उसको बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि सामने वाले की Emotions को ठीक से समझा जाए 
Friends से लेकर Family के Members तक और सहकर्मियों से लेकर आम लोगों तक, रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि दूसरों की भावनाओं को समझने की आपमें बेहतर क्षमता हो। तभी आप अनुकूल व्यवहार कर पाएंगे। दूसरों की भावनाओं को समझने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप ऐसा व्यवहार कतई न करें, जिससे दूसरों की भावनाएं आहत हों। इससे रिश्तों को मजबूत बनाने में न सिर्फ मदद मिलती है, बल्कि सबके बीच आपकी छवि एक Favorite और Gentlemen की बनती है। आइये हम आपको एक सच्ची कहानी के जरिये आपको समझाने की कोशिश करेंगे

एक बच्चा पालतू जानवरों की दुकान पर एक पिल्ला खरीदने गया। वहां बिक्री के लिए चार पिल्ले रखे थे, जिनमें से प्रत्येक की कीमत 50 डॉलर थी। पांचवां पिल्ला भी था, पर वह बिक्री के लिए नहीं था और चुपचार एक कोने में बैठा था। बच्चा उसी पिल्ले के पास गया और उसकी कीमत के बारे में पूछा। इस पर दुकानदार ने जवाब दिया कि यह पिल्ला बेचने के लिए नहीं है, पर बच्चा जिद पर अड़ गया कि उसे वही पिल्ला चाहिए। आखिरकार दुकानदार ने 50 dollar में वह Puppy उसको बेच दिया। दुकानदार के यह पूछने पर कि इतने पैसे में तो कोई भी पिल्ला तुम खरीद सकते थे, पर इस पिल्ले को क्यों खरीदा, जिसका एक पैर खराब है, उस बच्चे ने जवाब देने की बजाय अपने बाएं पैर की पैंट उठाई और दुकानदार से कहा- यही है वजह! दुकानदार को सारी बात समझ में आ गई। उस बच्चे का वह पैर नकली था।
आप भी प्रतिज्ञा करें कि आप छोटों के साथ नरमी से, बड़ों के साथ करुणा से, संघर्ष करने वालों के साथ हमदर्दी से और कमजोर व गलती करने वालों के साथ सहनशीलता के साथ पेश आएं। हम अपने जीवन में कभी-न-कभी इनमें से किसी-न-किसी स्थिति से गुजरते ही हैं। ऐसे में जब आप दूसरों के साथ बेहतर ढंग से पेश आएंगे, तो जैसा कि क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया होती है, आपको भी बदले में वैसा ही व्यवहार मिलेगा। जब हम दोस्तों, ग्राहकों, मालिकों, कर्मचारियों, परिवार के सदस्यों आदि किसी के भी मनोभावों को खुद भी महसूस करते हैं, तो हमारे रिश्ते अच्छे हो जाते हैं और इससे आपसी समझ-बूझ, निष्ठा, मन की शांति और उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है।

आज के जमाने में बिना दोस्ताना संबंध बनाए किसी भी क्षेत्र में Success नहीं प्राप्त की जा सकती है, न व्यक्ति के स्तर पर और न ही समाज व राष्ट्र के स्तर पर। इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर इसके लिए प्रयत्नशील रहें। जितना जरूरी अपने काम में दक्षता प्राप्त करना है, उतना ही जरूरी आपसी तालमेल का बनाए रखना है। वर्तमाम परिवेश में यही सफलता का मूलमंत्र है। सोच-विचार कर व्यवहार करना ही चाहिए, ताकि दूसरे की भावनाएं आहत न हों।
 
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