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कमजोर पाचन तंत्र और गलत खानपान के कारण ही पेट संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं। लेकिन सही खानपान आैर जीवनशैली में सुधार लाकर पेट संबंधी समस्याओं को दूर किया जा सकता है। 
पेट से संबंधित समस्याएं, जैसे कब्ज, गैस या पेट में जलन आजकल आम बात हैं। ये सारी समस्याएं पाचन तंत्र के किसी अंग में विकार आ जाने की वजह से होती हैं। जिसे इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम भी कहते हैं। इसमें शामिल है, लंबे समय तक पेट में दर्द या असुविधा, पेट का फूलना या अनियमित पाचन क्रिया, जिससे कब्ज या डायरिया तक हो सकते हैं। यह समस्या किसी भी आयु में हो सकती है। पेट में इस तरह की समस्या लगातार बनी रहे, तो यह भावनात्मक तनाव का कारण भी बन जाता है।
कैसे बचें: इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम बहुत ही पीड़ादायक स्थिति है और योग की सहायता से इस पीड़ा को समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए नियमित योग/आसन करना जरूरी होता है। इससे पेट की गति नियमित हो जाती है। लेकिन कोई भी योग शुरू करने से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। उसके बाद अपनी क्षमता अनुसार कोई योग करें। कुछ खास तरह के योग शारीरिक स्तर पर तो स्वास्थ्य लाभ देते ही हैं, मानिसक रूप से
भी स्वस्थ होने में भी प्रभावी भूमिका निभाते हैं। इससे इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम को दूर भगाने में भी मदद मिलती है। इन योगासनों में शामिल है- अधोमुख श्‍वानासन, पवनमुक्तासन, मार्जारासन आदि। इस योग से आंतरिक अंगों की मालिश होती है और उनको सुदृढ़ता मिलती है। इससे अन्य प्रकार की अनियमितताओं से भी निजात मिलती है। इस रोग से पीड़ित लोग अपने भोजन पर विशेष ध्यान दें और मसालेदार या तले हुए भोजन से परहेज रखें। खाने में फाइबरयुक्त चीजों को शामिल करें। साथ ही नियमित औषधि का सेवन करें।
मार्जारासनः इस आसन में हाथों को ऊपर की ओर तानकर कमर को पार्श्व (साइड) में झुकाया जाता है। यह पाचन प्रणाली को स्वस्थ करने और बगल की चर्बी को दूर करने में सहायक है। इस आसन से पेट का संतुलन बनता है, साथ ही तनाव से भी राहत मिलती है।
पवनमुक्तासन: पाचन शक्ति को बढ़ाने, थकान दूर करने और मोटापा कम करने में बहुत सहायक है यह योगासन । इस आसन से आंतों की मालिश तो होती ही है, साथ ही इससे पेट में जो अधिक वायु होती है, वह बाहर आ जाती है।
अधोमुख श्वानासन: इससे मेरुदंड को मजबूती मिलती है और पेट की मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं। इस आसन को करने से रक्तसंचार में वृद्धि होती है, जिससे शरीर को नई ऊर्जा मिलती है।
अधोमुख श्वानासनअर्द्ध मत्सयासन: इस आसन को करने से मेरुदंड को लंबाई मिलती है और लीवर भी मजबूत होता है। इस आसन से एंड्रीनल ग्रंथि को शक्ति मिलती है।  
धनुरासन: इससे सभी आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और जोड़ों का व्यायाम हो जाता है। गले के तमाम रोग नष्ट होते हैं। इससे पेट की चर्बी भी कम होती है। इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम से मासिक धर्म में भी परेशानी आ सकतीहै। इस आसन को करना काफी फायदेमंद है।
भुजंगासन: इससे न सिर्फ वजन घटाने में मदद मिलती है, बल्कि यह कई शारीरिक व मानसिक समस्याओं से भी आपको दूर रखता है। इस योग को करने से पेट को शक्ति मिलती है। इससे तनाव व थकान से मुक्ति मिलती है और रक्त संचार भी ठीक होता है।
 
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