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चिकित्सा के क्षेत्र हो रहे विकास के कारण नैदानिक विज्ञान में विशेषज्ञ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जरूरत बढ़ती जा रही है। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के विकास के साथ ही कई तरह के उपकरणों का महत्व बढ़ता जा रहा है। इन उपकरणों के बिना आधुनिक चिकित्सा प्रणाली बेहतर मानवीय और चिकित्सीय सेवाएं देने में सक्षम नहीं हैं। मसलन रेडियोलाॅजी एक ऐसी तकनीक है जो चिकित्सा के क्षेत्र में डॉक्टरों और मरीजों दोनों को सही और तेजी से इलाज में मदद कर रही है। सैद्धांतिक रूप से देखा जाए तो यह रेडियो तरंगों के माध्यम से इस तकनीक से हमारे शरीर के अंदर की तस्वीर तथा अन्य क्रियाओं की स्थिति की रिपोर्ट डॉक्टर के समक्ष पेश करती है। इस तरह चिकित्सक रोगों का सही निदान खोज पाते हैं।
रेडियोलॉजी में करियर (Career in Radiologist)
रेडियोलॉजी मानव शरीर के अंदर की चित्र बनाने के लिए समर्पित चिकित्सा प्रणाली की विशेष तकनीकी शाखा है। रेडियोलॉजिस्ट एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, चुंबकीय कंपन, परमाणु और अन्य स्रोतों सहित ऊर्जा स्रोतों की विविधता का उपयोग करता है। चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे विकास के कारण नैदानिक विज्ञान में विशेषज्ञ स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जरूरत बढ़ती जा रही है। ऐसे में न सिर्फ प्रशिक्षित बल्कि विशेषज्ञ मानव संसाधनों के लिए भी हमारे देश में बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहा है। रेडियोलाॅजी के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों को साधारणतः रेडियोलाॅजिस्ट कहा जाता है।
रेडियोलाॅजिस्ट कैसे करता है काम
रेडियोलॉजिस्ट को एक्स-रे क्(X-Ray), टोमोग्राफी, एमआरआई (MRI), पोजीट्रान, एमिशन, टोमोग्राफी (पीईटी), अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) और न्यूक्लियर मेडिसिन (Nuclear Medicine) के रूप में मेडिकल इमेजिंग तकनीक का उपयोग कर रोग और चोटों के इलाज की रिपोर्ट बनाते हैं।
कहां कहां है संभावनाएं (Opportunities)
रेडियोलॉजिस्ट अत्यधिक दक्ष पेशेवर माने जाते हैं। एक रेडियोलाॅजिस्ट के रूप में आपका करियर के लिए आम तौर पर स्नातक की डिग्री के बाद शुरू किया जा सकता है। बेशक एक चिकित्सक बनने के लिए मेडिकल स्कूल में आपको चार साल लगते हैं। मेडिकल स्कूल में इस तरह के बाल रोग, मनोरोग, शल्य चिकित्सा और दवा के विभिन्न क्षेत्रों में दो वर्षों के बाद, इस तरह के शरीर रचना विज्ञान, विकृति विज्ञान, औषधि विज्ञान और जैव रसायन की दो साल की पढ़ाई करनी होती है।
रेडियोलॉजिस्ट के आवश्यक गुण
एक सफल और कुशल रेडियोलॉजिस्ट के लिए चिकित्सा और साथ ही तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त होना चाहिए। कुशल कंप्यूटर कौशल, सकारात्मक दृष्टिकोण, समर्पण में सेवा, स्व-दीक्षा, अच्छा और धाराप्रवाह संचार कौशल का ज्ञान होना चाहिए क्योंकि उसे एक टीम के रूप में काम करना होता है। अच्छी टीम भावना एक रेडियोलाॅजिस्ट के बेहद ही आवश्यक गुणों में शामिल है।
विकल्प (Options)
यह करियर विकल्प के तौर पर लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए उपयुक्त है। रेडियो इमेजिंग में एक साल के लंबे कार्यक्रम में दो सेमेस्टर होते हैं। कोर्स के दौरान छात्रों को शरीर रचना विज्ञान, शरीर विज्ञान, विकिरण भौतिकी, इमेजिंग भौतिकी और रेडियोग्राफिक स्थिति के बारे में जानकारी दी जाती है। सफल स्नातकों के लिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में नौकरी की काफी संभावना है। रेडियोलॉजिस्ट बनने के बाद आप किसी भी नर्सिंग होम्स, डाइग्नॉस्टिक सेंटर, अत्याधुनिक अस्पताल कर सकते हैं या खुद का काम भी शुरू कर सकते हैं।
सिन टैक्स
सिन टैक्स वह उत्पाद कर है, जो समाज को नुकसान पहुचाने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है। ्र, शराब, तंबाकू आदि। पीगोवियन टैक्स (इन हानिकारक उत्पादों की वजह से समाज को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए लगाया जाने वाला कर) के विपरीत सिन टैक्स में उत्पादों की कीमत बढ़ाने पर जोर दिया जाता है, ताकि उसकी खपत कम से कम हो। यही वजह है कि अन्य करों को बढ़ाने से कहीं बेहतर माना जाता है कि सिन टैक्स बढ़ाना। हालांकि इसकी आलोचना भी होती है। माना जाता है कि सिन टैक्स बढ़ाने से गरीबों पर बोझ बढ़ता है। सिन टैक्स उन गतिविधियों पर कर के रूप में इस्तेमाल होता है, जो समाज के अवांछनीय माने जाते हैं। कई मामलों में जुआ, शीतल पेय पदार्थों और अधिक प्रदूषण उत्सर्जित करने वाले वाहनों पर भी लगाया जाता है।
फारस की खाड़ी
फारस की खाड़ी होर्मुज के जलडमरूमध्य के रास्ते हिंद महासागर का विस्तार है, जो ईरान के उत्तर-पूर्व और अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम के बीच स्थित है। ईरान-इराक के बीच 1980-1988 के दौरान हुए युद्ध में यह क्षेत्र रणस्थल में तब्दील हो गया था, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के तेल टैंकरों पर हमला किया। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के कई केंद्र हैं, व्यापक प्रवाल भित्तियां हैं और प्रचुर मात्रा में मोती भी मिलते हैं, लेकिन बढ़ते औद्योगिकीकरण और समुद्री जल में तेल के रिसाव के कारण यहां के पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान पहुंचा है। इंटरनेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गेनाइजेशन ने इसे ईरान की खाड़ी (फारस की खाड़ी) नाम दिया है। फारस की खाड़ी के क्षेत्र में ईरान, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत, इराक आदि बसे हैं। दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञात सभ्यता (सुमेर) इसी क्षेत्र में विकसित हुई।
तटीय नियमन क्षेत्र
अपने देश की तटीय सीमा करीब 7,516 किलोमीटर लंबी है, और इस सीमा के आसपास देश की लगभग 25 करोड़ आबादी बसती है, जिसकी सुरक्षा तटीय पारिस्थितिकी करती है। इसलिए तटों के आर्थिक और प्राकृतिक महत्व को देखते हुए तथा निर्माण कार्य की वजह से उसे होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह अधिनियम लाया गया था। इसमें यह प्रावधान है कि निम्न और उच्च ज्वार सीमा के बीच में निर्माण कार्य नहीं हो सकता। इतना ही नहीं, उच्च ज्वार सीमा क्षेत्र के 500 मीटर के दायरे में ऐसा कोई निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए, जो प्राकृतिक समुद्री तटों को नुकसान पहुंचाए। हालांकि मछली पकड़ने पर प्रतिबंध संबंधी कोई प्रावधान इस अधिनियम में नहीं है। यह अधिनियम तटीय नियमन क्षेत्र अधिनियम, 1991 में संशोधन करके तैयार किया गया है, और गोवा, केरल, बृहन्मुंबई, सुंदरवन (पश्चिम बंगाल), चिल्का और भीतरकणिका (ओडिशा) जैसे क्षेत्र इसमें शामिल किए गए हैं।
प्रमुख संस्थान (Main Institutes)
टीम के रूप में काम करना होता है। अच्छी टीम भावना एक रेडियोलाॅजिस्ट के बेहद ही आवश्यक गुणों में शामिल है।
  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल
  • साइंसेज, नई दिल्ली
  • www.aiims.edu
  • दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट
  • इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
  • www.dpmiindia.com
  • बीआरडी मेडिकल, गोरखपुर,
  • उत्तर प्रदेश
  • www.brdmc.org
  • टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, परेल, मुंबई
  • www.tmc.gov.in
  • क्रिश्चियन मेडिकल स्कूल,
  • वैल्लूर, तमिलनाडु
  • www.cmch-vellore.edu
स्नातकों के लिए इसमें करियर
इस क्षेत्र में स्नातक के बाद रेडियोग्राफर, रेडियोलाॅजिक प्रौद्योगिकीविदों, वैज्ञानिक प्रयोगशाला सहायक, क्लिनिक सहायक, एक्स-रे तकनीशियन, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञों के रूप में काम कर सकते हैं। चिकित्सा के क्षे़त्र में हो रहे विकास के साथ ही रेडियोलाॅजी के क्षेत्र में रोजगार के काफी संभावनाएं बढ़ी हैं।
रेडियो इमेजिंग प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पेशेवरों की भारी कमी है, जबकि डॉक्टरों पूरी तरह से इमेजिंग विशेषज्ञों पर निर्भर करते हैं।
वे सही निदान के बिना किसी का भी उपचार शुरू नहीं कर सकते। डॉक्टर, रेडियोलाॅजिस्ट से एमआरआई और एंजियोग्राफी व इलाज परीक्षण के सभी प्रकार की मदद लेते हैं। ऐसा कहना है डीपीएमआई की प्रिंसिपल डाॅक्टर अरूणा सिंह का।
विदेशों में संभावना
युवा रेडियो इमेजिंग तकनीशियन आम तौर पर शिफ्ट में काम करते हैं। योग्य स्टाफ पर्याप्त अनुभव प्राप्त करने के बाद देश-विदेश में नौकरी की तलाश कर सकते हैं। अनुभवी उम्मीदवारों की मांग अमेरिका, यूरोप अफ्रीका में हमेशा से रही है। 
 
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