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मल्टीयपर्पज हेल्थक वर्कर (MPHW) का काम आपातकालीन या आपदा की स्थिति में पैदा होने वाली स्वास्थ्य (Health) से जुड़ी परेशानियों से निपटना होता है और जिन जगहों पर हॉस्पिटल (Hospital) नहीं होते वहां इलाज के लिए पहुंचाना होता है। हिंदुस्ताान में मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (Multi Purpose Health Worker) का अस्तित्व 1974 में आया। उप स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर निवारक और प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल या सेवाओं का वितरण करना ही इनका अहम मकसद होता है। ये बतौर सीनियर डॉक्ट्रों (Senior Doctors )व चिकित्सलकों के Assistant  काम किया करते थे, उस समय मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के कार्यकर्ता की देख रेख में Malaria, टीबी, कुष्ठ रोग, जलजनित जैसी बीमारियों या महामारी सहित हर तरह के संक्रामक रोगों का नियंत्रण करते थे, आज MPHW Course फिर प्रचलन में आया है, उत्तराखंड आपदा, कश्मी र व चेन्नकई में आई आपदा के समय मल्टीपर्पज हेल्थ, वर्कर के कार्यकर्ता ने बढ़-चढ़ कर सेवा भाव से लोगों की तीमारदारी की, अगर आपमें भी सेवाभाव का जज्बाप है तो मल्टीपर्पज हेल्थर वर्कर के रूप में करियर को चुन सकते हैं।
नेचर ऑफ वर्क (Nature of Work)
करतार सिंह समिति, 1973 की सिफारिश के बाद मलेरिया कार्यकर्ताओं, परिवार नियोजन कार्यकर्ता एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्लू) के रूप से नामित किया गया। इनका काम करने का तरीका बहुत अलग होता है। ये उन क्षेत्रों में जाते है जहां अस्पताल या डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। जैसे पहाड़ी और आदिवासी इलाको में जाकर टेंट लगाकर उनका इलाज करते है। स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी जरूरी चीज की आवश्यकता हो, तो वे भी पूरा करते हैं। मरीजों के इलाज के साथ-साथ वह यह भी ध्या न रखते हैं कि वहां का पर्यावरण दूषित तो नहीं है, ऐसे में उस एरिया की साफ सफाई का ध्यान विशेष तौर पर रखा जाता है, ताकि वह इलाका रोग मुक्त हो जाए। महामारी में नियंत्रण करना, लोगों को भोजन सामग्री पहुंचाना और किसी भी तरह की आपदा प्राकृतिक व गैर प्राकृतिक आपदा में घायलों के इलाज की व्यवस्था करना और आपातकालीन स्थिति में उन्हें सकुशल बाहर निकालने की व्यवस्था करना उनके जिम्मे होता है।
कोर्स एवं योग्यता (Course and Eligibility)
डिप्लोमा इन मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के लिए अभ्यर्थी का किसी भी संकाय और किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। कोर्स के दौरान उन्हें आपातकालीन स्थिति या किसी भी तरह की आपदा की स्थिति में किस तरह समुचित मेडिकल सुविधाओं का प्रबंध करना है, उनकी तीमारदारी और सेवा कैसे की जाती है उसकी सीख दी जाती है। वे आपदा या महामारी फैलने की स्थिति में कैसे और किस हद तक तत्पर रहें, इस बात के लिए जागरूक किया जाता है। उन्हें महामारी या आपदा पर नियंत्रण करने, भोजन सामग्री पहुंचाने, जख्मी होने, या उनका उपचार कैसे किया जाए व उससे कैसे निपटा जाए उसकी ट्रेनिंग दी जाती है। इस फील्ड में आप एसएससी के माध्यम से भी परीक्षा देकर किसी भी सरकारी पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अवसर (Jobs and opportunities)
यूं तो इस कोर्स में डिप्लोमा लेने के बाद हर राज्य में सरकारी व गैर सरकारी विभाग में नौकरी के कई नए अवसर खुल जाएंगे। लेकिन हरियाणा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इन दिनों मल्टीपर्पज हेल्थर वर्कर की खासी डिमांड है। इनमें लड़के व लड़कियों दोनों के लिए सामान अवसर उपलब्ध हैं। डिप्लोमा इन मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर कोर्स करने के बाद स्वास्थ्य विभाग, परिवार नियोजन मंत्रालय, पर्यावरण विभाग के अलावा सरकारी व गैर सरकारी एनजीओ में तो नौकरी के ढेरों विकल्प हैं
 
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