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आप जो भी काम करते हैं, उससे आपके व्यक्तित्व का निर्धारण होता है और उसी के आधार पर लोग आपकी छवि बनाते हैं अथवा आपको याद करते हैं, जीवित अवस्था में भी और मरने के बाद भी। ऐसे में यह आप पर निर्भर करता है कि आप समाज के द्वारा खुद को किस रूप में पसंद किया जाना चाहेंगे। यदि बेहतर इंसान के रूप में याद किया जाना चाहेंगे, तो निश्चय ही आपको इसके लिए वैसा बेहतर करके दिखाना होगा।

आज से करीब सौ साल पहले एक व्यक्ति ने सुबह के अखबार में जब अपना नाम उठावनी (मृतकों) के कॉलम में देखा तो हैरान रह गया। अखबार वालों ने गलतफहमी में उसका नाम छाप दिया था। पढ़कर पहले तो वह हक्का-बक्का रह गया। फिर खुद को संभालते उसने सोचा कि देखें, लोग मेरे बारे में क्या सोचते । उसके बारे में लिखा गया था- डायनामाइट का बादशाह मर गया, वह मौत का सौदागर था आदि।

"मौत का सौदागर" जैसे विशेषण से खुद को नवाजे जाने पर उसने खुद से सवाल किया- क्या मुझे इसी तरह याद किया जाएगा? उसने तुरंत फैसला किया कि वह बिल्कुल नहीं चाहेगा कि लोग उसे इस तरह याद करें। उसने उसी दिन से शांति के लिए काम करने का फैसला कर लिया। उस व्यक्ति कर नाम था अल्फ्रेड नोबेल । नोबेल पुरस्कारों के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है। जिस प्रकार अल्फ्रेड नोबेल ने अपने जीवन मूल्यों को दुबारा स्थापित किया, वैसे ही हमें भी अपनी बीती जिंदगी को देख-समझ कर नई व्याख्या करनी चाहिए। दुनिया के लिए आपकी विरासत क्या होगी? आप किस तरह याद किया जाना चाहेंगे? क्या आपके बारे में लोग अच्छी बातें कहेंगे? क्या आपको प्यार और इज्जत के साथ याद किया जाएगा? क्या कोई आपके न होने की कमी को महसूस करेगा? इसके लिए आपको क्या करना होगा? अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील रहना होगा। इसके लिए योजनाएं बनानी होंगी और उन पर अमल करना होगा। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि लोग आपको किस रूप में याद करेंगे। जब इस पर विचार करेंगे तो स्वत: ही बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। जब बेहतर काम करेंगे तो आपको भी बेहतर रूप में ही याद किया जाएगा।
दोस्त कार्य ऐसे करने चाहिए जो की मरने के बाद लोग आपको आपके अच्छे के बारे में याद करे बुरे के लिए नही
 
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