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विज्ञान संचार वैज्ञानिक दृष्टिकोण के"प्रचार-प्रसार से संबंधित है। यह पूर्णतः सत्य है कि हमारे देश में वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया गया है। परंतु यह पर्याप्त नहीं है। इस क्षेत्र में काफी कुछ किया जाना अभी बाकी है।

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 प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन ने कहा है कि हमारे विश्वविद्यालयों को ऐसे विज्ञान संचारकों का विकास करने में सहायता करनी चाहिए जो आम जनता को स्थानीय भाषा में विज्ञान की महत्वपूर्ण खोजों का महत्व समझा सकें। पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित जनशक्ति के अभाव में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी की सार्वजनिक समझ विकसित नहीं की जा सकती है।

विज्ञान संचारकर्ताओं के सम्मुख सबसे बड़ी | चनौती विज्ञान संचार को अधिक रुचिकर बनाने की है। विज्ञान के उन छात्रों के लिए विज्ञान संचार में करियर के चमकीले अवसर हैं जो सामान्य व्यक्ति को विज्ञान एवं उसकी उपलब्धियों के बारे में समझा सकें।

क्या होते हैं काम

विज्ञान संचार में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, स्वास्थ्य, ऊर्जा तथा संबंधित क्षेत्रों में विज्ञान पत्रकार, विज्ञान लेखक, जन संपर्क अधिकारी, कॉर्पोरेट कम्युनिकेटर बनने की गहरी ललक होनी चाहिए तथा बोलने एवं लिखने की प्रवृत्ति भी होनी चाहिए। विज्ञान संचार अब वर्तमान समय में शिक्षा के एक अत्यधिक मान्य विषय के रूप में स्थापित हो चुका है।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक शाखा-राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद ने विज्ञान संचार के विभिन्न पाठ्यक्रमों को मान्यता प्रदान की है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद भी विज्ञान संचार में पाठ्यक्रम संचालित करता है।
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पाठ्यक्रम

गौरतलब है कि विज्ञान संचार के विभिन्न शैक्षिक पाठ्यक्रमों का मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मीडिया के माध्यम से प्रभावी संचार के लिए विज्ञान संचार कौशल एवं तकनीक देना, विद्यार्थियों के ज्ञान को अद्यतन करना और विज्ञान संचार के विभिन्न कार्यक्षेत्रों की क्षमता बढ़ाना, उद्योग, अनुसंधान तथा विकास केंद्रों एवं कॉर्पोरेट संस्थाओं में विज्ञान संचार को बढ़ावा देना और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के महत्वपूर्ण मामलों में उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। विज्ञान संचार के पाठ्यक्रम विज्ञान संचार के सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक पहलुओं का व्यवस्थित ज्ञान उपलब्ध कराते हैं तथा विद्यार्थियों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सफल संचारक बनने हेतु प्रशिक्षित करते हैं। विद्यार्थी विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संचार का महत्व तथा भूमिका, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी नीतियों, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी का इतिहास, आधुनिक विज्ञान का आविर्भाव, भारत में महान वैज्ञानिकों तथा विज्ञान पत्रकारिता की महत्वपूर्ण उपलब्धियों का अध्ययन करते हैं।
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विज्ञान संचार पाठ्यक्रमों में स्वास्थ्य तथा पर्यावरणीय संचार, 'जल' तथा सफाई जागरूकता, मीडिया तथा आपदा प्रबंधन, शांति विषयों पर पत्रकारिता, ग्रामीण संचार, कॉर्पोरेट संचार, कृषि विस्तार तथा जलवायु | परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, नाभिकीय प्रौद्योगिकी तथा आनुवंशिक दृष्टि से परिष्कृत फसलों आदि विषयों को शामिल किया गया है। टेलीविजन तथा रेडियो के माध्यम से विज्ञान प्रसारण, मल्टीमीडिया तथा विज्ञान डॉक्यूमेंटरी फिल्म का निर्माण आदि इन पाठ्यक्रमों के अन्य आकर्षण हैं।

व्यावहारिक समझ डेवलप करने के लिए कुछ संस्थानों में फोटोग्राफी प्रयोगशाला, रिपोर्टिंग कौशल प्रयोगशाला तथा तकनीकी लेखन कौशल प्रयोगशाला भी स्थापित की गई हैं। विद्यार्थी विज्ञान संचार के माध्यम से विकास संचार, जनसंपर्क, विज्ञापन, मीडिया प्रबंधन तथा विज्ञान न्यूज लेटर्स का प्रबंधन भी सीखते हैं। पाठ्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को किसी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संगठन अथवा मीडिया सेंटर में इंटर्नशिप पर रखा जाता है जहां वे इंटर्नशिप करते हैं।

विज्ञान संचार से जुड़े जो प्रमुख पाठ्यक्रम देश के विभिन्न संस्थानों में उपलब्ध हैं, वे इस प्रकार हैं
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जन संचार में एमएससी
  • विज्ञान संचार में पीजी डिप्लोमा विज्ञान संचार में एमएस
  • विज्ञान एवं विकास संचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा ।  
  •  विज्ञान पत्रकारिता में प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 

शैक्षणिक योग्यता
विज्ञान संचार के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु शैक्षणिक योग्यताएं भिन्न-भिन्न हैं। सामान्यतः विज्ञान विषय समूह से स्नातक/बी.टेक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है। कुछ पाठ्यक्रमों में किसी भी विषय समूह से स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भी प्रवेश दिया जाता है। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से विज्ञान संचार में पीजी डिप्लोमा कोर्स भी चलाता है। इसी विश्वविद्यालय में विज्ञान संचार में पी.एचडी. भी कराई जाती है।

कहां हैं अवसर

विज्ञान संचार से संबंधित पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में विज्ञान रिपोर्टर, कॉपी एडिटर तथा टेलीविजन प्रोड्यूसर के रूप में अच्छा करियर प्राप्त कर सकते हैं। वे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण तथा विकास संचार के क्षेत्रों में कार्यरत जनसंपर्क एजेंसियों, कॉर्पोरेट संस्थाओं, राष्ट्रीय एवं अन्य संगठनों में आकर्षक रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी संगठन, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, अनुसंधान तथा विकास केंद्र में भी रोजगार के चमकीले अवसर हैं। विद्यार्थी विज्ञान फिल्म निर्माता के रूप में विज्ञान डॉक्यूमेंटरीज निर्माण के लिए अपना निजी प्रोडक्शन हाउस भी प्रारंभ कर सकते हैं। विज्ञान संचार का कोर्स करके विद्यार्थी इस क्षेत्र में स्वयं भी अच्छा रोजगार प्राप्त करेंगे तथा सामान्य व्यक्ति को भी विज्ञान की चमत्कारी दुनिया से रूबरू कराएंगे।


प्रमुख संस्थान
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जन संचार संस्थान, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  • www.lkouniv.ac.in । 
  • भारतीय विज्ञान संचार सोसायटी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
  • www.iscos.org । 
  • मीडिया विज्ञान विभाग, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई, तमिलनाडु ।
  • विज्ञान संचार केंद्र, भविष्य अध्ययन एवं नियोजन विद्यालय, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर, मध्य प्रदेश
  • www.CSC.dauniv.ac.in ।
  • अमेजिंग प्रौद्योगिकी विकास केंद्र, तिरुवनंतपुरम, केरल 
  • www.cditcourses.org ॥
  • यशवंत राव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय, नासिक
  • www.ycmou.ac.in

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How we work

Bitcoin is a cryptocurrency, which is a form of electronic cash. This is the first decentralized digital currency: the system was designed to work without a central bank or a single administrator. Many economists and investors consider the Bitcoin market to be a bubble. Bitcoin has also been criticized for its use in illegal transactions, its high power consumption, price instability, and theft from exchanges.

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Bitcoin, created in 2009, was the first decentralized cryptocurrency. Since then, numerous cryptocurrencies have been created. These are frequently called altcoins, as a blend of bitcoin alternative. Bitcoin and its derivatives use decentralized control as opposed to centralized electronic money/central banking systems . The decentralized control is related to the use of bitcoin's blockchain transaction database in the role of a distributed ledger
 
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