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दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट  (Supreme Court ) ने देश की दिग्गज रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ (DLF) को 630 करोड़ रुपये के जुर्माना राशि जमा करने का निर्देश दिया है। कंपनी पर यह जुर्माना भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआइ ने वर्ष 2011 में उसके अनुचित कारोबारी व्यवहार के लिए लगाया था। डीएलएफ को यह राशि तीन माह के भीतर सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करानी होगी। कंपनी ने कहा है कि वह न्यायालय के इस निर्देश का पालन करेगी।
supreme court decision for dlf
डीएलएफ के शेयर 4.5 फीसदी तक लुढ़के

सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद डीएलएफ के शेयरों में तेज गिरावट गई। बीएसई में इसके शेयर 4.44 फीसदी और एनएसई में 4.49 फीसदी लुढ़क गए। बीएसई में एक समय इसमें 5.32 फीसदी की गिरावट गई थी। इस गिरावट से कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 1511 करोड़ की कमी आई।
रियल एस्टेट सेक्टर की प्रमुख कंपनी डीएलएफ को सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में 630 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश दिया है। कंपनी पर यह जुर्माना भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने लगा रखा है। कोर्ट ने कंपनी से तीन हफ्ते में 50 करोड़ रुपए जमा करने को भी कहा है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और एनवी रमन्ना की बेंच ने सीसीआई के आदेश के खिलाफ डीएलएफ की अपील को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। बेंच ने कंपनी से यह भी कहा कि यदि वह मुकदमा हार जाती है तो उसे नौ फीसदी ब्याज के साथ जुर्माना अदा करना होगा। कंपनी को यह बात लिखित में कोर्ट में देनी होगी। डीएलएफ 630 करोड़ रुपए जमा करने के लिए छह माह का वक्त चाहती थी। लेकिन कोर्ट ने तीन महीने ही दिए।

इस मामले में हरियाणा सरकार, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) और रेजिडेंट एसोसिएशन को भी पक्ष बनाया गया है।

सीसीआइ (CCI) द्वारा कंपनी पर लगाए गए जुर्माने को प्रतिस्पर्धा अपीलीय टिब्यूनल (Compat) ने इस साल 19 मई को सही ठहराया था। डीएलएफ ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इस अपील पर फिलहाल शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही है। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और एनवी रमना की पीठ ने अंतरिम आदेश में यह भी कहा है कि 630 करोड़ की जुर्माना राशि पर नौ फीसद ब्याज देना होगा। सीसीआइ ने ही रकम जमा करने में देरी करने पर यह ब्याज दर लगाई थी।
कोर्ट ने डीएलएफ से अपील खारिज होने की स्थिति में यह नया हलफनामा पेश करने के लिए भी कहा कि वह आदेश के अनुसार 630 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। शीर्ष अदालत ने कंपनी का छह माह में रकम जमा कराने की मोहलत देने का अनुरोध भी ठुकरा दिया। पीठ ने कंपनी से कहा कि उसे 50 करोड़ रुपये तीन हफ्ते के भीतर जमा कराने होंगे। कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी। 1भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने नौ नवंबर, 2011 को सुनाए फैसले में डीएलएफ को अपने रीयल एस्टेट कारोबार में अनुचित तौर-तरीके अपनाने का दोषी पाया था। गुड़गांव स्थित कंपनी के फ्लैट खरीदने वालों की बीलेयर ऑनर्स एसोसिएशन ने सीसीआइ के पास मई, 2010 में इस आशय की शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग ने जांच में ग्राहकों की शिकायत सही पाई और जुर्माना ठोक दिया।
 
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