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आमतौर पर हम जिसे स्लिप डिस्क कहते हैं, वो असल में डिस्क प्रोट्रशन होता है। इसमें डिस्क हल्की सी बाहर की ओर निकल आती है। इन डिस्क के पीछे हाथ और पैर की नसें होती हैं, जो डिस्क से दब जाती हैं। डिस्क प्रोट्रशन तीन प्रकार का होता है, सर्वाइकल, थोरैसिक और लंबर। इससे गर्दन, पीठ और कमर में बहुत दर्द होता है। इनमें से लंबर डिस्क प्रोट्रशन कॉमन होता है। हालांकि यह प्रॉब्लम किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन आमतौर पर इसकी शुरुआत 20 साल की उम्र के बाद होती है। अगर आप हेल्दी और फिट हैं, तो माइल्ड स्टेज में यह बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन इसके बढ़ जाने पर डॉक्टर के सलाह की जरूरत पड़ती है।
 
slip disc tratement awareness

प्रमुख कारण (Main Cause of Disc Protrusion): इस बीमारी के होने का कोई खास कारण नहीं है। लेकिन जिनका वजन बहुत ज्यादा होता है या जो हैवी वेट लिफ्टिंग करते हैं, स्मोकिंग करते हैं, एक्टिविटी लेवल कम होता है, उनको यह समस्या होने के ज्यादा चांस होते हैं।

लक्षण (Symptoms of Disc Protrusion): इस बीमारी के चार स्टेज होते हैं। लंबर डिस्क के पहले स्टेज में कमर में अकड़न होती है। उसमें खिंचाव आ जाता है, जिसे स्पाज्म कहते हैं। इस वजह से कमर में दर्द होता है। इसके दूसरे, तीसरे और चौथे स्टेज में पैरों में दर्द होता है। सर्वाइकल डिस्क होने पर गर्दन में अकड़न आ जाती है और उसमें दर्द होने लगता है। इसके दूसरे, तीसरे और चौथे स्टेज में हाथों में दर्द होता है। जबकि थोरैसिक डिस्क में पीठ अकड़ जाती है और उसमें दर्द होता है। इसके दूसरे, तीसरे और चौथे स्टेज में छाती में दर्द होता है।

उपचार (Treatment of Disc Protrusion): दो से तीन दिन तक आराम करने और दवाइयां लेने से आराम मिलता है। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं, क्योंकि इस बीमारी में शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। डिस्क प्रोट्रशन के चौथे स्टेज में कभी-कभी डिस्क टूटकर बाहर स्पाइनल कैनाल में आ जाती है। इस कंडीशन में ऑपरेशन जरूरी हो जाता है। हालांकि 99.9 प्रतिशत डिस्क प्रोट्रशन मेडिसिन और एक्सरसाइज से ठीक हो जाता है। साथ ही अगर आप स्लिप डिस्क के पेशेंट हैं तो आपको कुछ सावधानियां बरतनी होंगी, वर्ना आपकी प्रॉब्लम बढ़ जाएगी। जैसे भारी वजन न उठाएं। एक ही पोजीशन में बहुत देर तक न बैठें।
 
बचाव के उपाय (How to Be Care full from Disc Protrusion): इससे बचने का सिर्फ एक ही उपाय है बैक मसल्स यानी पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाना। बैक मसल्स के स्ट्रॉन्ग होने से डिस्क प्रोट्रशन होने का खतरा कम हो जाता है। साथ ही वेट कंट्रोल, रेग्युलर फिजिकल एक्सरसाइज से इसके होने की संभावना कम हो जाती है।
 
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