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बच्चे ने कहा, पौराणिक कथाओं से प्रभावित होकर मुझमें जगी कौतूहल

child creativity
दिल्ली के 13 वर्षीय एक छात्र यशवर्धन शुक्ला ने एक उपन्यास लिखा है जिसमें उसके काल्पनिक पात्र भगवान और दैत्य हैं। इस किशोर रचनाकार ने बताया पौराणिक कथाएं हमेशा मुझमें कौतूहल जगाती हैं।
अमीश त्रिपाठी की शिवाज ट्रायलॉजी ने मुझे प्रभावित किया और रिक रिआर्डन मेरे पसंदीदा लेखक हैं। यशवर्धन ने प्रेरक रचनाओं में जेके रौलिंग की हैरी पॉटर र्शृंखला को भी रखा है। इस किशोर रचनाकार ने अपनी जिस कल्पना को शब्दों में समेटने का प्रयास किया है उसके मूल में स्कूल में पढ़ने वाला एक बच्चा डेविड है जो एक दैत्य के हमले में अपने परिवार को खोकर अंटार्कटिका पहुंच जाता है। यशवर्धन की किताब ‘गॉड्स ऑफ अंटार्कटिका’ में डेविड का सामना भगवानों और दैत्यों से होता है। किताब लिखना कैसा लगा? इस सवाल के जवाब में यशवर्धन ने कहा कि अपना पहला उपन्यास लिखते हुए बहुत अच्छा लगा। लोग मुझसे मेरे विचारों के बारे में पूछते हैं और मेरे काम की तारीफ करते हैं। हालांकि एक छात्र के रूप में स्कूल में मेरी अंग्रेजी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। अपनी लेखन यात्रा के बारे में यशवर्धन ने बताया कि मैंने पिछले साल यह किताब लिखना शुरू किया और अक्तूबर में खत्म किया। इस किताब के पहले मैं 70 पन्नों की एक लघुकथा लिख चुका हूं।

तब मैं छठी कक्षा में था। फिलहाल यशवर्धन माउंट सेंट मेरी स्कूल में 9वीं कक्षा के छात्र हैं। उसका कहना है कि उपन्यास लिखने के लिए उसके पिता और चाचा ने हौसला बढ़ाया। उन्होंने बताया कि शुरू में लेखन और अध्ययन के बीच तालमेल बनाने में दिक्कत हुई। ‘लिखने से मेरी पढ़ाई पर असर पड़ा और ग्रेड प्रभावित हुआ क्योंकि मैं परीक्षा पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया। लेकिन अगली परीक्षाओं तक मैंने लेखन और पढ़ाई के बीच तालमेल बना लिया और मुझे अच्छे अंक मिले।’ यशवर्धन के दोस्त भी उसके उपन्यास को लेकर उत्साहित हैं। किताब का प्रकाशन ‘रीडर्स पैराडाइज’ ने किया है। यशवर्धन ने कहा कि मेरी पांडुलिपि कुछ प्रकाशकों ने खारिज कर दी थी।
मेरे प्रकाशकों ने सुझाव दिया था कि नाम और लोकेशन लंदन-अंटार्कटिका के बजाय भारत के होने चाहिए। रीडर्स पैराडाइज के मालिक चिराग गोसाईं ने कहा कि यह एक प्रेरक सहयोग है। युवा रचनाकारों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, खास कर यशवर्धन जितनी उम्र में तो बिल्कुल नहीं। कुल मिला कर यह अलग अनुभव है। फिलहाल यशवर्धन अपनी दूसरी रचना लिखने मेंव्यस्त हैं।
 
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