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भारत में शेयर बाजार का मापक मुंबई शेयर बाजार (बीएसई) की स्थापना दो जनवरी, 1986 को उस समय की 30 सबसे अधिक बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों के साथ हुई थी, 1979 आधार वर्ष था। बीएसई में 4700 से अधिक कंपनियां सूचीबद्ध हैं जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा शेयर बाजार बनाती हैं। शेयरों की चाल से ही बाजार और अर्थव्यवस्था के रुख के बारे में पता चलता है।

मुंबई शेयर बाजार की आज सिर्फ भारत में हीं नहीं बल्कि विदेश में भी प्रमुख इंडेक्स में गणना होती है। सेंसेक्स में समाहित 30 कंपनियों की गणना बाजार पूंजीकरण-वेटेज मेथोडोलॉजी के आधार पर की जाती है। समय गुजरने के साथ सेंसेक्स को ‘फ्री प्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन-वेटेज मेथाडोलाजी’ में बदला गया।
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मुंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक (सेंसेक्स) मूल्य आधारित सूचकांक है और इसकी गणना विमुक्त प्रवाह पूंजीकरण प्रक्रिया के आधार पर होती है। यह प्रक्रिया एक कंपनी के जारी कुल शेयरों के बाजार -पूंजीकरण की पूर्व की प्रक्रिया से अलग है। इसमें कंपनी की केवल उन शेयरों का उपयोग किया जाता है जो कारोबार के लिए पूरी तरह उपलब्ध है। इस विमुक्त प्रवाह प्रक्रिया में प्रोमोटर, सरकार और सांस्थानिक निवेशकों के शेयर शामिल नहीं है। यह प्रक्रिया, बाजार के रुख की सही तस्वीर पेश करने के लिए एक सितंबर 2003 को लागू की गयी थी। सेंसेक्स की गणना में 30 कंपनियों के विमुक्त प्रवाह पूंजीकरण को सूचकांक विभाजक से विभाजित कर दिया जाता है। यह विभाजक ही सेंसेक्स के मूल आधार वर्ष से संबद्ध होता है। यह सूचकांक को तुलनात्मक बनाता है तथा कारपोरेट गतिविधियों से अथवा शेयर बदलने इत्यादि से सूचकांक में होने वाले फेरबदल के लिए परिवर्तन बिंदु भी है। सेंसेक्स ने 1986 से एक लंबी यात्रा तय की है और वह फिलहाल 35 गुणा बढ़ गया है। कारोबार के पहले दिन एक अप्रैल 1986 को सेंसेक्स 549.43 अंक पर बंद हुआ था।

सूचकांककों का महत्त्व (Importency of Stock Markets) : शेयर बाजार देश के आर्थिक स्वास्थ्य का सूचक है। यह डोव जोन्स के 1884 के निर्माण से शुरू होता है। अब दुनिया में कई शेयर बाजार सूचकांक हैं। इनमें से उल्लेखनीय हैं- एसएंडपी ग्लोबल, डोव जोन्स, एफटीएसई, हांगसेंग एंड निक्केई और सेंसेक्स। निवेशकों में इन सूचकांकों की अत्यधिक लोकप्रियता है।
 
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