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पार्किंग ठेकेदार, कबाड़ियों और दुकानदारों से हर महीने इकट्ठी होने वाली लाखों रुपये की मंथली का हिस्सा सेक्टर-34 थाना प्रभारी राजेश शुक्ला अपने सीनियर अफसर को भी पहुंचाता था। कई अफसर बेगार भी करवाते थे।

यह खुलासा थाना प्रभारी राजेश शुक्ला ने सीबीआई के सामने किया। सीबीआई राजेश शुक्ला से सीनियर अफसरों के नामों के बारे में पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार, वह अफसरों के नामों का खुलासा करने में सीबीआई का सहयोग नहीं कर रहा है।

वहीं, पकड़े गए हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल ने सीबीआई के सामने सेक्टर-34 से इकट्ठी होने वाली मंथली के सारे ठिकानों की जानकारी दे दी है।

हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज से सीबीआई ने अलग-अलग बैठाकर सवाल-जवाब किए। दोनों के बयान में अंतर पाया गया है।

मंथली इकट्ठी करके सेक्टर-34 थाना प्रभारी ने काफी बेनामी प्रॉपर्टी खरीद रखी है। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, शुक्ला ने करीब करीब एक करोड़ की बेनामी प्रॉपर्टी बना रखी है। उसकेघर से कई बेनामी प्रॉपर्टी के कागजात बरामद हुए हैं। सभी प्रॉपर्टी रिश्तेदारों के नाम से खरीदी गई है।

इसके अलावा राजेश शुक्ला के एक बैंक अकाउंट में 15 लाख रुपये जमा है। इसके अलावा सेक्टर-37 और 40 के बैंक में लॉकर है। इसमें लाखों के गहने और प्रॉपर्टी के कागजात होने की आंशका है। सीबीआई जांच में सामने आया कि शुक्ला के कसौली और धर्मशाला में जमीन है।
कई महीनों से नहीं निकलवाई है सैलरी
मंथली की रकम हर महीने लाखों रुपये आने केचलते सेक्टर-34 थाना प्रभारी ने कई महीनों से अपना सैलरी नहीं निकाली है। यह उठता है कि जब सैलरी अकाउंट्स से कई महीनों से रुपये नहीं निकाले गए तो खर्च कहां से चलता था।
सेक्टर-34 थाना प्रभारी को हर महीने कितनी और कहां से मंथली आती थी इसकी सारी जानकरी सीबीआई ने हासिल कर ली है। जांच में सामने आया कि मंथली शराब ठेकेदार, रेहड़ी वालों, ऑटो यूनियन से, गेस्ट हाउसों से, कबाड़ियों से, होटलों और शोरूमों के मालिक से लेकर अन्य लोग मंथली देकर जाते थी। सीबीआई टीम अब मंथली देने वालों को भी तलब कर सकती है। आखिर वो पुलिस को मंथली किस काम केलिए देती थी।

थाना प्रभारी समेत तीनों निलंबित
पार्किंग ठेकेदार से दस हजार रिश्वत मामले में पकड़े गए सेक्टर -34 थाना प्रभारी राजेश शुक्ला, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज सिंह को पुलिस विभाग ने निलंबित कर लाइन हाजिर कर दिया। इसके साथ ही पुलिस विभाग ने सीबीआई से मामले में तीनों पुलिस जवानों पर आरोप की जानकारी हासिल कर रही है।। जल्द ही पुलिस विभाग तीनों की विभागीय जांच भी खोली जाएगी।

मनिंदर सिंह को दिया गया चार्ज
सीबीआई द्वारा मंथली लेते पकड़े गए थाना प्रभारी राजेश शुक्ता की जगह अब क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर मनिंदर सिंह सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन का चार्ज दिया गया है।
पार्किंग ठेकेदार से दस हजार रिश्वत लेते पकड़े गए निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज सिंह सीबीआई ने वीरवार तीन बजे सीबीआई जज विमल कुमार की अदालत में पेश किया। सीबीआई वकील ने कोर्ट से कहा कि इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला के घर से कई बेनामी प्रापर्टी मिली है।

इसके अलावा वाइस सैंपल भी लेने है। सीबीआई वकील ने तीनों का चार दिन का पुलिस रिमांड पर भेज दिया। बचाव पक्ष के वकील ने सीबीआई के पुलिस रिमांड का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला की वाइस सैंपल सीबीआई ले चुकी है। मामले में रुपयों की रिकवरी हो चुकी है। इस लिए पुलिस रिमांड बनता नहीं है।

सीबीआई वकील ने कहा कि बेनामी प्रापर्टी और लॉकर को चेक करना है, इसलिए रिमांड जरूरी है। बचाव पक्ष के वकीलों ने आरोप लगाया कि वाइस सैंपल लेते हुए सीबीआई गड़बड़ी कर सकती है। इसलिए सीबीआई को रिमांड नहीं दिया जाए। अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया कि ट्रैप के दौरान वाइस रिकार्डिंग की सील की गई सीडी अदालत में जमा करवाने के आदेश दिए।

अदालत ने दोनों पक्षों की सुनने के बाद इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार और कांस्टेबल दिलबाज सिंह को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया।

सीबीआई ने दो और तीन सितंबर के दिन कांस्टेबल दिलबाज सिंह और पार्किंग ठेकेदार से रिश्वत मांगने की वाइस रिकार्डिंग की है। रिकार्डिंग में कांस्टेबल दिलबाज सिंह कह रहा है कि एसएचओ के कहने पर रिश्वत ले रहा हूं।

एसएचओ को ही सारे देने है। कांस्टेबल ने रुपये मिलने के बाद जब एसएचओ को फोन कर कहा कि जनाब काम हो गया है। कहां आऊं। एसएचओ ने कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को रुपये लेकर सेक्टर 34 गुरुद्वारा में बुला ।

रिमांड मिलने पर पुलिस जवान हुए हैरान
निलंबित इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला समेत तीनों का पुलिस रिमांड मिलने पर अदालत में मौजूद पुलिस जवान हैरान थे। पुलिस जवान कहने में लगे थे कि जानबूझकर रिमांड दिया गया है। रिश्वत केस में कुछ नहीं है। सीबीआई केस साबित नहीं कर सकेगी।
 
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