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क्या आपने कभी कोई प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसके पीछे बनी काली मोटी-पतली रेखाओ बारकोड कहलाते हैं इन रेखाओ में उस प्रोडक्ट की सारी जानकारी छिपी होती है वर्ष 2014 में यह बारकोड 40 साल का हो गया है रीग्ले का जूसी फ्रूट गम का दस यूनिट का पैक 26 जून 1974 में पहली बार बारकोड स्कैन किया गया था आज भी इसका असली पैक म्यूजियम में रखा हुआ है

आजकल अपने हर प्रोडक्ट पर एक सफेद और काले रंग के बारकोड को हम हर जगह देखते रहते हैं, जिससे अरबों चीजों की सेल्स को ट्रैक किया जाता है। क्या आप जानते हैं की क्वालिटी पहचान चिन्ह बारकोड 40 साल का हो गया
The Untold History of Where Barcodes Come
एक फ्रूट गम को मिला था पहला पहचान नंबर क् या आपने कभी कोई प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसके पीछे बनी काली मोटी-पतली रेखाओं को ध्यान से देखा है। ये रेखाएं बारकोड कहलाती हैं। इन रेखाओं में उस प्रोडक्ट की सारी जानकारी छिपी होती है। वर्ष 2014 में यह बारकोड 40 साल का हो गया है। रिग्ले का जूसी फ्रूट गम का 10 यूनिट का पैक 26 जून 1974 में पहली बार बारकोड स्कैन किया गया था। आज भी इसका असली पैक म्यूजियम में रखा हुआ है।

बारकोड के फायदे

1. बहुत तेजी से बिकने वाले प्रोडक्ट जल्दी से पहचाने जा सकते हैं और ऑटोमेटिक तरीके से रिकॉर्ड किए जा सकते हैं।

2. जब भी कोई मैन्युफैक्चरर एक प्रोडक्ट को शिपमेंट के लिए पैक करता है तो उस बॉक्स को एक यूनीक आईडेंटिटी नंबर दे सकता है।

इस आईडेंटिटी नंबर का प्रयोग डेटाबेस के साथ लिंक करने में किया जाता है, जिसमें ऑर्डर नंबर, पैक किए गए आइटम, कितनी मात्रा पैक की गई है और सामान कहां भेजा जाना है, ये सारी जानकारियां होती हैं।

3. बारकोड का इस्तेमाल करके एकत्र किया गया डेटा किसी प्रोडक्ट की डिमांड का पता लगाने में किया जा सकता है।

कैसे आया आइडिया

वैलेन्स फ्लिंट वह पहले इंसान थे, जिन्होंने 1932 में पहली बार एक ऐसे सिस्टम की बात की, जो चीजों को ऑटोमेटेड तरीके से चेक करे। फ्लिन्ट का यह आइडिया उस समय मुमकिन नहीं लगा, लेकिन 40 साल बाद फ्लिन्ट ने नेशनल एसोसिएशन ऑफ फूड चेन्स के वाइस प्रेसिडेंट की तरह एक बार फिर कोशिश की, जिससे यूनीफॉर्म प्रोडक्ट कोड सामने आया। नॉर्मेन जोसेफ वुडलैंड और बर्नार्ड सिल्वर को 20 अक्टूबर 1949 में बारकोड के आविष्कार का र्शेय जाता है, जिन्होंने एक पेटेंट एप्लिकेशन सीरियल नंबर 122,416 फाइल किया था, जो बाद में पेटेंट नंबर 2,612,994 बना। इस तरह वुडलैंड और सिल्वर ने इस कॉन्सेप्ट के सिंबल और रीडर पर अपना अधिकार बनाया है। 26 जून 1974 की सुबह 8 बजे ओहियो के ट्रॉय में स्थित मार्श सुपरमार्केट में रिग्ले का 10 यूनिट का जूसी फ्रूट पैक पहली बार स्कैन किया गया। इसे हाथों से बनाए गए एक लेजर स्कैनर से स्कैन किया गया था, जिसे एनसीआर कॉर्पोरेशन ने बनाया था, जिसका नाम उस समय नेशनल कैश रजिस्टर कंपनी था। इस पहले स्कैन में प्रोडक्ट की कीमत 67 सेंट रिकॉर्ड की गई। इसके साथ ही सुपर मार्केट शॉपिंग में एक कम्प्यूटराइज्ड युग शुरू हो गया।

आधुनिक बारकोड सिस्टम

जॉर्ज लॉरर को आधुनिक यूपीसी बारकोड सिस्टम के आविष्कार का र्शेय जाता है। 1970 में मैकेन्जी एंड कंपनी ने यूजीपीसीसी (यूनिफॉर्म ग्रोसरी प्रोडक्ट कोड काउंसिल) के साथ मिलकर प्रोडक्ट की पहचान के लिए एक न्यूमेरिक फॉर्मेट तैयार किया। 1971 में आईबीएम ने जॉर्ज लॉरर को ग्रोसरी इंडस्ट्री के लिए एक बेस्ट कोड और सिबंल डिजाइन करने का काम दिया। 1973 में आईबीएम का प्रोपोजल स्वीकार कर लिया गया।

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