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कम खर्च में ही बेहतर आउटसोर्सिंग सुविधा मुहैया कराने के कारण भारत पिछले कुछ सालों में हॉट आउटसोर्सिंग हब बन चुका है। न तो यहां ब्रेन पॉवर की कमी है और न ही भाषा के जानकारों की। इसीलिए आाज चीन और कनाडा के बाद भारत दुनिया का प्रमुख आउटसोर्सिंग पॉवर है। अंग्रेजी की गहरी जानकारी न होने पर भी अब इस क्षेत्र में जॉब के अवसर उपलब्ध होने लगे हैं!

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आउटसोर्सिंग सेक्टर के तहत पहले सिर्फ बीपीओ की बात की जाती थी, पर अब एलपीओ, केपीओ, पीपीओ जैसे कॉन्सेप्ट भी सामने हैं।

बीपीओ (BPO Outsourcing Jobs): बीपीओ के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण सेवाओं को किसी बाहरी संस्था को किसी खास उद्देश्य से हस्तांतरित किया जाता है। यदि योग्यता की बात करें तो बीपीओ (बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग) ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए अभ्यर्थी 10वीं, 12वीं या ग्रेजुएशन कुछ भी उत्तीर्ण हो सकता है। हां, कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान जरूरी है। कई संस्थान बीपीओ का कोर्स कराते हैं, जहां की डिग्री आपके लिए जॉब का रास्ता आसान कर सकती है। नियुक्त करनेवाली कंपनियां भी जरूरत केअनुसार कर्मचारियों को ट्रेनिंग देती हैं।

अंग्रेजी में कमांड इस फील्ड में सफलता का खास पैमाना है। हालांकि डोमेस्टिक कॉल सेंटर में अब भाषा संबंधी खास बंदिश भी नहीं है। आप अपनी भाषा में भी बीपीओ सेक्टर में सफलता पा सकते हैं, पर बातचीत करने की कला आपमें जरूर होनी चाहिए। इसके अलावा मार्केट की जानकारी और कंज्यूमर बिहैवियर की समझ भी आवश्यक है। विनम्रता और धैर्य इस क्षेत्र में सफलता के लिए अत्यावश्यक है। पूरे दिन में किसी भी समय काम करने के लिए तैयार रहना इस क्षेत्र की एक खास मांग है।

जॉब वेबसाइट्स या कंसल्टेंसी सर्विस की मदद से बीपीओ की नौकरी ढूंढ़ी जा सकती है। विप्रो स्पेक्ट्रामाइंड, दक्ष ई-सर्विस, इएक्सएल, आईसीआईसीआई वन सोर्स, ट्रैसमेल, जीटीएल लिमिटेड, 24/7 कस्टमर, एचटीएमटी, डब्ल्यूएनएस ग्रुप, जेंटा आदि बीपीओ कंपनियों के कुछ नाम हैं। इसके तहत एक फ्रेशर के रूप में आपकी सैलरी की शुरुआत 8-10 हजार रुपये से हो सकती है।

एलपीओ (LPO Jobs and Business): भारत में करीब 100 से भी ज्यादा एलपीओ (लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग) कंपनियां काम कर रही हैं, जो अमेरिका, इंग्लैंड और अन्य देशों के लिए आउटसोर्सिंग का काम करती हैं। इसके तहत कॉपीराइट क्लॉज, कॉन्ट्रैक्ट्स, लीगल ओपीनियन, इंश्योरेंस कवर डॉक्यूमेंट्स, लीगल रिसर्च, लीगल गाइडलाइन्स आदि से संबंधित कार्य किए जाते हैं।

एलपीओ में कैरियर बनाने के लिए जरूरी है कि आप लॉ में कम-से-कम ग्रेजुएट हों। इसके बाद खास एलपीओ की ट्रेनिंग ली जा सकती है। इसके तहत डिप्लोमा इन एलपीओ जैसे कोर्स उपलब्ध हैं। इस सेक्टर में उन्हीं लोगों की डिमांड है जो अंग्रेजी के अच्छे जानकार हैं।

इस क्षेत्र में एंट्री लेवल पर वेतन 20 से 30 हजार रुपये होता है। इनवेंचर्स, पेंगिया 3 ऐंड इंटीग्रेकॉन, माइंडक्रेस्ट, एसडीडी ग्लोबल आदि कंपनियां एलपीओ के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

केपीओ (KPO Business Opportunity): केपीओ यानी नॉलेज प्रोसेसिंग आउसोर्सिंग बीपीओ का ही विस्तृत रूप है, जहां विभिन्न विषयों की गहराई से जानकारी मुहैया कराई जाती है। विश्व स्तर पर केपीओ के अधिकांश जॉब (लगभग 70 प्रतिशत) भारत के हिस्से में ही हैं। भारत में इस सेक्टर में 30,000 से भी ज्यादा लोग कार्यरत हैं। केपीओ में जॉब के लिए अच्छी कम्युनिकेशन स्किल, अंग्रेजी पर अच्छी पकड़, सवाल सुनकर फटाफट बेहतर ढंग से जवाब देना, ऑनलाइन रिसर्च स्किल, डाटा इंटरप्रिटेशन, बेहतर नेट सर्फिंग आदि जैसे गुण होने चाहिए। वैसे तो इस सेक्टर के लिए कोई खास शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं है, पर साइंस बैकग्राउंड होने पर सफलता की संभावना अधिक हो जाती है। इसके तहत एमबीए, डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, इकोनॉमिस्ट, आर्किटेक्ट, जर्नलिस्ट आदि को अधिक मौके मिलते हैं।

विप्रो, टाटा कंसल्टेंसी, स्मार्ट एनालिस्ट इंडिया प्रा.लि., अल्का टेल, हीरो माइंडमाइन, हॉलिस्टिक ट्रेनिंग सॉल्युशन, कन्वर्जिज इंडिया आदि कई कंपनियां हैं जो केपीओ के क्षेत्र में अपनी सेवाएं देती हैं। यदि वेतन की बात करें तो 9 से 12 हजार से शुरू होकर सैलरी एक लाख रुपये प्रति महीने तक हो सकती है।
पीपीओ
पीपीओ का पूरा नाम है पर्सन टू पर्सन आउटसोर्सिंग। यह एक प्रकार से फ्रीलांसिंग जैसा कार्य है जो किसी बड़ी कंपनी के लिए करना होता है और उसके बदले में कंपनी मेहनताना देती है।

पीपीओ में एकाउंटिंग, होम डिजाइनिंग, फीचर राइटिंग, ऑनलाइन टूशन, सॉफ्टवेयर राइटिंग तथा कंसल्टेंसी जैसे कार्य मिलते हैं। यदि इस क्षेत्र में होनेवाली कमाई की बात करें तो यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने काम में कितने दक्ष हैं। इसमें रोजगार पाने के लिए छात्रों या विशेषज्ञों को रोजगार प्रदान करनेवाली विभिन्न वेबसाइटों पर अपना बायोडाटा भेजना होगा।
 
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