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शुरू में ही कैरियर का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। कई छात्र ऐसे होते हैं, जो स्कूल से ही अपने लक्ष्य के प्रति सचेत रहते हैं। पर यदि किसी कारणवश ऐसा नहीं हो पाया तो भी चिंता की कोई बात नहीं है। बाद में अधिक अनुभव हो जाने के बाद कहीं बेहतर और सुस्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया जा सकता है।
How to Make set a Career Decision goal motive tips in hindi
कैरियर काउंसलर ही आपके लिए कैरियर का चयन कर सकता है। आपको अपने जीवन में क्या करना है, इसका फैसला आपको खुद करना होगा। हां, काउंसलर या किसी अनुभवी व्यक्ति से आपको किसी निर्धारित दिशा में आगे बढ़ने का सही मार्गदर्शन जरूर मिल सकता है।

हॉट फील्ड में जाना ही बेहतर है। यह सही है कि किसी भी हॉट फील्ड में जॉब के मौके कहीं ज्यादा होते हैं, पर आपके लिए यह परखना जरूरी है कि आप उस जॉब के लिए कितने फिट हैं। पहले अपनी क्षमता को पहचानें और तभी उस फील्ड में आगे बढ़ें। सिर्फ हॉट फील्ड के नाम पर उसमें कूद पड़ने से डूबने का खतरा बना रहता है।
मेरा दोस्त यह काम कर सकता है तो मैं क्यों नहीं। अक्सर ऐसे में गलत फील्ड की ओर कदम बढ़ जाते हैं। आपके दोस्त की योग्यता उस खास फील्ड के लिए होगी, इसलिए वह उसमें सफल रहा। पहले आप अपनी काबिलियत आंकें और तभी किसी फील्ड में कैरियर बनाने की बात सोचें।

पैसा मिले तो सबकुछ है। ऐसी सोच भी एकतरफा है। पैसे की जरूरत तो होती है, पर इसके अलावा काम का बेहतर माहौल, तरक्की के अवसर, रुचि के अनुरूप काम, स्थिरता आदि कई ऐसी बातें हैं, जिन पर आपके भविष्य की रूपरेखा तय होती है। इसलिए जॉब के मामले में पैसे के साथ-साथ इन बातों का भी ध्यान रखें।

कैरियर की फील्ड में बदलाव संभव नहीं है। काफी सोच-विचार कर किसी फील्ड में कैरियर बनाने के बावजूद कई बार वैसी सफलता नहीं मिल पाती, जैसी उम्मीद की जाती है। ऐसे में हतोत्साहित होने की बजाय कैरियर की दिशा बदलने में ही भलाई है। ऐसा संभव है और इससे सफलता की नई राहें भी खुलती हैं। जॉब और स्वरोजगार दोनों ही मामलों में विकल्पों पर जरूर ध्यान दें।

हॉबी और जॉब में कोई मेल नहीं हो सकता। ऐसी धारणा शत-प्रतिशत सही नहीं है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें लोगों ने अपनी हॉबी को ही कैरियर के रूप में ढाल लिया। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी हॉबी को अपने कैरियर के रूप में अपनाते हैं या नहीं।
 
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