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Hindi Kids Stories - Kid Activities, Bacho ki Kahaniyan, Kids Story, Kids Websites, Learn Kids, बच्चों की कहानियाँ, पिटारा.
रामनगर गांव में गेंदामल नामक एक ठग रहता था। अपनी ठगी से गेंदामल ने बहुत सारा धन जमा कर लिया था, लेकिन था वह अव्वल दर्जे का कंजूस। एक बार उसकी ससुराल से पत्र आया। पत्र के मुताबिक उसे ससुराल पहुंचना जरूरी था। पत्र पढ़कर वह सोचने लगा कि ‘ससुराल का सफर काफी लंबा है और अगर वहां जाने के लिए घोड़ा किराए पर लिया, तो काफी पैसे खर्च हो जाएंगे। घोडे़ को तगड़ी खुराक भी देनी होगी।’
गेंदामल ने सोचा कि पैदल ही चला जाए, तो काफी बचत हो सकती है। यह सोचकर गेंदामल ससुराल के लिए पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में उसे ध्यान आया कि ‘ससुराल में खाली हाथ जाना ठीक नहीं है, कुछ मिठाई तो ले जानी पडे़गी।’ फिर उसका माथा ठनका। उसने सोचा मिठाई मुफ्त तो मिलेगी नहीं, इसके लिए भी पैसे खर्च करने होंगे। मिठाई के खर्च से बचने के लिए उसने एक तरकीब निकाली और मिठाई की जड़ ससुराल ले जाने का फैसला किया। यह सोचकर गेंदामल गन्ने के खेत के पास पहुंच गया। उसने खेत से पांच-सात गन्ने उखाडे़ और उन्हें लेकर ससुराल पहुंच गया। दामाद जी के हाथों में गन्ने देखकर सास सारा माजरा समझ गई कि ये चोरी के गन्ने हैं। सास ने पूछा, आप ये गन्ने क्यों लाए हैं? कंजूस गेंदामल ने बात बनाते हुए कहा ‘सारी मिठाइयां तो शक्कर से ही बनती हैं और शक्कर गन्ने से बनती है। ...तो मिठाई की जड़ गन्ना ही है। सोचा मिठाई की जड़ ही लेता चलूं। वैसे भी आजकल शुद्ध मिठाइयां भी तो नहीं मिलतीं।’ यह कहकर गेंदामल ने अपनी सास को वो गन्ने थमा दिए। सास ने सोचा कि दामाद को सबक सिखाना जरूरी है। तीन दिन तक ससुराल में गेंदामल ठाठ से रहा और खूब माल उड़ाया।
जब वह विदा होने लगा, तो सास ने कहा, ‘दामाद जी मैं आपको पांच कपडे़ देना चाहती थी, लेकिन मैंने अपना इरादा बदल दिया। कपड़ों के बदले मैं यह थैली दे रही हूं। इसमें कपड़ों की जड़ है।’ गेंदामल ने वह थैली खोली, तो उसका मुंह फटा रह गया, क्योंकि थैली में बिनौले के बीज थे। वह कुछ बोलता, इससे पहले ही गेंदामल की सास चहक उठी और बोली, ‘दामाद जी ये बिनौले कपास की जड़ हैं। बिनौले से कपास उगती है। कपास से सूत बनता है और सूत से कपडे़।’ गेंदामल समझ चुका था कि उसकी सास ने नहले पे दहला दे मारा है।
अपनी ठगी की बदौलत गेंदामल ने भले ही ढेर सारा माल जमा कर लिया था, लेकिन पैसे खर्च करने से वह हमेशा कतराता था। एक बार उस कंजूस को ऐसा सबक मिला कि फिर से वह कंजूसी करना भूल गया।
 
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