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tapping of your cell phone tips act and how to know in hindi newsऐसे होती है फोन टैपिंग (How to do Phone Taping): एक वायर्ड टेलीफोन नेटवर्क इलेक्ट्रिक सर्किट की तरह दो लोगों को जोड़ता है। यह सिस्टम एक लूप बनाता है, जिसमें दो फोनों के बीच की आवाज अस्थिर विद्युतीय धाराओं के रूप में चलती है। पहले पारंपरिक फोनों में फोन टैपिंग काफी आसान थी। तब अतिरिक्त फोन से सर्किट्स पर ज्यादा लोड डालकर बातचीत को सुनना संभव था। लेकिन सेलफोन के आने के बाद कम्युनिकेशन का मैकेनिज्म बदल गया है। सेलफोन एक संवेदनशील रेडियो की तरह काम करता है। यह आवाज को बाइनरी कोड्स में बदल देता है और फिर उसे रेडियो तरंगों की तरह फ्रीक्वेंसी बैंड में स्थानांतरित कर देता है।
सेलफोन इंटरसेप्टिंग का तरीका (CellPhone Interception Tricks) कम्युनिकेश के शुरुआती दिनों में सेलफोन को टैप करना अपेक्षाकृत आसान था। यह काम रेडियो स्कैनर की मदद से किया जाता था, जो कई तरह की फ्रीक्वेंसी (ऑवृत्ति) में कार्य कर सकता था। इससे यूजर स्कैनर में लगे माइक्रोफोन से आवाज सुन सकता है। लेकिन वर्तमान में सेलफोन का कार्य डिजिटल ट्रांसमिशन और डिजिटल एनकोडिंग सिस्टम के तहत होता है, जो सामान्य रेडियो रिसीवर को सिग्नल्स इंटरसेप्ट (बाधित) करने से रोकता है। ऐसे में केवल सरकार ही टेलीफोन कंपनी के सहयोग से इन्हें इंटरसेप्ट कर सकती है। लेकिन हाल में एक तकनीकी खराबी की वजह से बगैर सर्विस प्रोवाइडर को सूचित किए भी फोन टैप करना संभव हो गया था। प्रत्येक हैंडसेट को नेटवर्क के नियामानुकूल पुष्ट होना पड़ता है, जबकि नेटवर्क की तरफ से हैंडसेट के प्रति इस तरह की कोई प्रामाणिकता नहीं होती। इसी वजह से व्यक्ति एनकोडिंग को डिकोड कर पाता है और वास्तविक नेटवर्क पर सिग्नल भेज सकता है।

क्या कहता है कानून (Legal End what say act about Phone Tapping)

भारत में फोन टैपिंग संबंधी कायदे-कानून इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत आते हैं। इसमें सरकार को अधिकार दिया गया है कि वह सार्वजनिक हित के लिए फोन टैप कर सकती है। अगर कोई व्यक्ति या संस्था देश की शांति, सुरक्षा, एकता और अन्य देशों से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए फोन टैप करती है तो उसे ऐसा करने से पहले केंद्रीय या राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी। लेकिन 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीफोन पर हो रही बातचीत को प्राइवेसी के अंतर्गत माना, जो संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा संरक्षित है (मौलिक अधिकार - जीवन व वैयक्तिक स्वतंत्रता का अधिकार)। कोर्ट ने इस संबंध में सुरक्षा संबंधी कुछ आदेश भी दिए। मसलन, यह तय किया गया कि केंद्रीय सरकार या संबंधित राज्य सरकार के गृह सचिव की इजाजत लेना भी जरूरी होगा। साथ ही फोन टैपिंग अनुमति के बाद केवल दो महीने तक ही की जा सकेगी। इसके बाद फोन टैपिंग के लिए व्यक्ति या संस्था को दोबारा अनुमति लेनी होगी।

कुछ महत्वपूर्ण नियम (Important Rules of Phone Tapping Case)

संविधान के अनुसार, जो अथॉरिटी फोन टैप करने का आदेश देगी, उसे कुछ रिकॉर्ड्स संभालकर रखने होंगे, जैसे - 1. इंटरसेप्ट की गई बातचीत, 2. इंटरसेप्टिड सामग्री कहां-कहां पहुंचाई जाएगी, 3. व्यक्तियों की संख्या और पहचान, जिनको सामग्री भेजी जानी है, 4. कितनी प्रतियां बनाई जानी हैं, 5.साम्रगी की प्रतियां। इंटरसेप्ट की गई सामग्री का काम खत्म होने के बाद उसे जल्द से जल्द खत्म कर देने का प्रावधान है।
 
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