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Cloud Computing information, news, and how-to advice in hindi
आधुनिक जगत में आजकल जो तकनीक सबसे ज़्यादा आकर्षित कर रही है, वह है क्लाउड कम्प्यूटिंग। कई नये एप्लिकेशन और सॉफ़्टवेयर भी आ गये हैं जो इसी तकनीक पर काम करते हैं। पर आखिर क्लाउड कम्प्यूटिंग है क्या?
इसको समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए कि आप एक बड़ी कम्पनी के मालिक हैं। ज़ाहिर सी बात है इस कम्पनी में ढेर सारे कम्प्यूटर होने तो ज़रूरी हैं। अब कम्प्यूटर हों तो यह ज़िम्मेदारी भी बनती है कि इन कम्प्यूटरों पर ढेर सारे नये-नये सॉफ़्टवेयर भी हों और उन पर इक ट्ठा किये गये डाटा की जानकारी सुरक्षित भी रहे। यह काम करने के लिए आपको एक और कर्मचारी नियुक्त करना पड़ेगा जो हर बार कम्प्यूटर को अपडेट करता रहे। कोई आये, कोई जाये, कोई नया ऑपरेटिंग सिस्टम इन्सटॉल करना हो, इन सब के लिए एक-एक कर्मचारी अलग से रखना पड़ेगा। और इसी के साथ-साथ जितने ज़्यादा कम्प्यूटर उतना ही ज़्यादा उन पर चल रहे सॉफ़्टवेयर और एप्लिकेशन का खर्च। बड़ी समस्या है। अगर ऐसे काम करना पड़ा तो खर्च का तो कोई हिसाब किताब ही नहीं रहेगा। और हर कम्प्यूटर को अपडेट रखने की मेहनत अलग से। क्या कोई ऐसा समाधान नहीं है जो मेहनत भी बचा ले और खर्च भी? है न। इसी तकनीक को क्लाउड कम्प्यूटिंग कहते हैं। क्लाउड कम्प्यूटिंग एक ऐसी तकनीक है जिससे हर कम्प्यूटर एक नेटवर्क से जुड़ जाता है। इस नेटवर्क पर वो सारे सॉफ़्टवेयर और जानकारी मौजूद होती हैं जो किसी को चाहिए हो। ऐसा करने से हर बार एक-एक कम्प्यूटर अपडेट करने के बजाये बस मुख्य सर्वर पर उसे अपडेट कर देना होता है, और हर कम्प्यूटर पर इस सर्वर से जुड़ने के लिए एप्लिकेशन डालनी होती है। इस से काम भी आसान हो जाता है और खर्च भी बच जाता है।
क्लाउड कम्प्यूटिंग के दो भाग होते हैं। पहला, अग्रसिरा (front end) और दूसरा पिछला सिरा (back end)। अग्रसिरा यानी कम्प्यूटर या मोबाइल या कोई भी उपकरण जिसके ज़रिये उपयोगकर्ता इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। और पिछला सिरा वह होता है जिस पर सारी जानकारी संग्रहीत होती है। इसके बाद सारे कम्प्यूटरों को(यानी अग्रसिरे को) इंटरनेट या कोई अन्य सर्वरों के ज़रिये पिछले सिरे से जोड़ सकते हैं।
इस तकनीक को समझने का एक और उदाहरण लेते हैं। हम सब अपने-अपने घरों में बिजली का इस्तेमाल करते हैं। पर बिजली का उत्पादन हमारे घर में नहीं पर कहीं दूर बिजली घर में होता है। हम सिर्फ उस बिजली का कनेक्शन लेकर उसे उपयोग करते हैं। उसी तरह जो असल डाटा या सॉफ्टवेयर होता है वो क्लाउड कम्प्यूटिंग के पिछले सिरे में सुरक्षित होता है। हर कम्प्यूटर या मोबाइल पर पिछले सिरे से जुड़ने के लिए कुछ एप्लिकेशन या सॉफ्टवेयर होते हैं जिससे कोई भी कहीं भी इस डाटा का इस्तेमाल कर सकता है।
क्लाउड कम्प्यूटिंग का इस्तेमाल करने से क्या क्या फ़ायदे होते हैं? क्यों इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है?
इस तकनीक की वजह से कोई भी, कहीं भी कभी भी अपने डाटा और एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर सकता है। यह डाटा और एप्लिकेशन अब एक नेटवर्क या एक कम्प्यूटर या हार्ड डिस्क तक सीमित नहीं रहता। कम्प्यूटर पर वह एप्लिकेशन न भी हो, तब भी क्लाउड कम्प्यूटिंग के ज़रिये उस एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
आने वाले समय में क्लाउड कम्यूटिंग से ही हर काम हुआ करेगा। आपका सारा डाटा सर्वर पर एक जगह सुरक्षित रहा करेगा, और आप आराम से कभी भी, कहीं भी अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से उसका उपयोग कर सकेंगे। है न दम मस्त टैक्नोलॉजी?

आपको महँगे कम्प्यूटर या भारी हार्ड डिस्क खरीदने की ज़रूरत नहीं रह जाती। आपका सारा डाटा सर्वर पर सुरक्षित रह सकता है। आपको समय के साथ बदलती टेक्नोलॉजी के पीछे भागने और हर बार अपने कम्प्यूटर पर नयी-नयी एप्लिकेशन इन्सटॉल करने की कोई ज़रूरत नहीं। पुराने ज़माने का कम्प्यूटर आधुनिक कम्प्यूटर के जैसा काम कर सकता है।
आपके कम्प्यूटर पर होने वाला खर्च, उसको अपडेट करने और उस पर नयी चीज़ें इन्सटॉल करने का खर्च बच जायेगा। कई ऐसे सॉफ़्टवेयर जिनके लिए अलग से लाइसेंस लेना पड़ता है, अब क्लाउड के ज़रिये मुफ़्त में आपको प्राप्त होंगे। एक ही क्लाउड आपकी हर समस्या का समाधान बन जायेगा।
इस तकनीक की वजह से आपके कम्प्यूटर का दायरा बढ़ जायेगा। आप किसी और के कम्प्यूटर से भी अपने आपको जोड़ सकते हैं। अगर आप अपने कम्प्यूटर पर न हों, तब भी आप अपने डाटा और एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। मतलब कि अब आपको हर वक्त अपना निजी कम्प्यूटर या लैपटॉप अपने साथ ढोने की ज़रूरत भी नहीं।
 
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