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how to do planning of careers process mid life and career planning process activitiesआज के प्रतियोगी माहौल में सफलता के लिए उचित कैरियर प्लानिंग के बगैर बात बन ही नहीं सकती। वैसे तो बचपन से ही यह चर्चा होने लगती है कि बड़े होकर क्या बनना है, पर वास्तविक कैरियर प्लानिंग हाई स्कूल में आने के बाद ही शुरू होती है। इसी समय इस पर मनन-चिंतन आरंभ हो जाता है कि कैरियर संबंधी रुचि क्या है, कौन-सी फील्ड कैरियर की दृष्टि से बेहतर है और उस फील्ड में जॉब के मौके कितने हैं। उहारण के लिए, यदि कोई बैंकर बनना चाहता है तो वह सीए या एमबीए-फाइनेंस में जाता है अथवा एमकॉम. जैसी डिग्री हासिल करता है। यह सब एक योजना के तहत होता है, अनायास नहीं। और इसी से सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। कैरियर प्लानिंग से लक्ष्य स्पष्ट हो जाता है, जिससे कदम स्वाभाविक रूप से उस ओर बढ़ने लगते हैं। इसके लिए छात्र इन स्टेप्स का ध्यान रखें :
स्व-आकलन (Self Analysis) : कैरियर प्लानिंग के लिए खुद का आकलन अत्यंत ही जरूरी है। अपनी रुचि, अपनी क्षमता और अपनी प्रतिभा को ध्यान में रखकर की गई कैरियर प्लानिंग ही सही कही जा सकती है।
लक्ष्य का निर्धारण(Define Your Goal): अपनी शैक्षणिक योग्यता, जीवन में प्राथमिकता अथवा काम में अपने अनुभव के आधार पर आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें। जब उद्देश्य स्पष्ट होगा, तभी आप रास्ते भी तलाशते चले जाएंगे।
आत्मविकास (Self Development) : लक्ष्य निर्धारण के बाद खुद को उसके योग्य बनाना होगा। ऐसे में पहले यह निर्धारित करें कि मंजिल तक पहुंचने के लिए किस तरह की शैक्षणिक योग्यता और कैसी स्किल्स की जरूरत है और फिर उसके अनुरूप खुद को विकसित करें।
एक्शन(Action): योजना के अनुसार कार्य करना सबसे जरूरी है। यह विचार करें कि आज से कुछ महीने बाद, एक साल बाद या दो साल बाद या पांच साल बाद आप खुद को कहां देखना चाहते हैं। फिर उसके अनुसार रुटीन बनाकर काम करें।
अवसरों पर नजर(Focus on Opportunities): जब किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपने खुद को तैयार कर लिया तो उससे संबंधित अवसरों पर नजर रखना भी जरूरी है।
रिलैक्स रहना (Keep Relax): कैरियर प्लानिंग में तनाव को कोई जगह न दें, अन्यथा इसका विपरीत असर आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। पढ़ाई, काम, आराम व मनोरंजन में तालमेल जरूरी है।
 
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