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स्कूल में टीचर जी ले रहे थे क्लास। सभी बच्चों को उम्मीद थी कि हो जाएंगे पास। टीचर जी पढ़ाते जाते और बच्चे पढ़ते जाते। प्रतिदिन ऐसे ही होता। बच्चे जो भी जवाब देते, टीचर जी शाबासी का गुलदस्ता भी उनको भेंट करते जाते।
हुआ यों कि एक दिन अफसर जी जांच करने आए। सीधे घुसे कक्षा में और लड़कों से बात की। दागा सवाल का पहला तीर। दो धन दो कितने? बताए सो वीर! दो धन दो कितने... तब एक लड़का बोला - पांच। लड़के ने जैसे ही पांच बोला कि टीचर आगे आए। पीठ थपथपाई और शाबास कहते हुए उसे बिठाया। तब अफसर जी चौंके, फिर झल्लाते हुए बोले- अरे ओ सत्यानाशी! गणित के सवाल के गलत जवाब पर देता है तू शाबासी। उनकी बात सुनकर टीचर जी मिमियाए। कुछ झेंप खाए और यह वेद वाक्य बताए- सर! मैं बतलाता हूं आपको इस लड़के का राज। इस लड़के का राज आप जान लो। और इसकी सम्पूर्ण कथा-कहानी मान लो। कल ही इससे मैंने पूछा कि दो धन दो बतलाओ। तो इसने फटाक से बतलाए छह। आज बतलाए हैं पांच। प्रगति करता जाएगा। सरकार कल यह अपने आप ही चार पर आ जाएगा।
टीचर ने मोटिवेशन (प्रेरणा) की यह विशेष दास्तान सुनाई और बच्चे के आगे बढऩे की विकास गाथा बताई। अब खुद से प्रश्न पूछिए, विश्लेषण कीजिए कि-
मोटिवेशन उर्फ अभिप्रेरणा का मेरे जीवन में क्या महत्व है?
मैं अपने जीवन में सेल्फ मोटिवेशन कैसे लाऊं?
मैंने दूसरे को कब-कब किस तरह मोटिवेट किया?
मेरे मोटिवेशन में कौन-कौन सी बाधाएं हैं?
इस समय मुझे किस प्रकार के मोटिवेशन की आवश्यकता है?
मैं अपने मोटिवेशन को लक्ष्य के लिए केंद्रित कैसे करूं?
वास्तव में मोटिवेशन जीवन की सबसे बड़ी शक्ति होती है, जो व्यक्ति की गतिशीलता निर्धारित करती है। ऊर्जा का स्रोत न तो शरीर होता है, न ही बुद्धि। किसी भी व्यक्ति के आत्मतत्व में मोटिवेशन की अकूत, अथाह, व्यापक, विस्तृत ऊर्जा संचित रहती है, जो बुद्धि के सहारे शारीरिक क्रिया-कलापों के द्वारा व्यक्ति के जीवन को ऊर्जा और आनंद से भर देती है। हम अपने मोटिवेशन मंत्र को समझें और उसकी शक्ति से जीवन में सफलता के स्वर्णिम रास्ते तय करते चले जाएं।
 
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