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कागज के नोटों के जल्दी खराब होने की समस्या दूर करने के लिए रिजर्व बैंक ने प्लास्टिक नोट जारी करने की तैयारी तेज कर दी है...
संभावना है कि 2014 की दूसरी छमाही या 2015 की शुरुआत में अपने देश के पांच शहरों में इन नोटों का चलन शुरू हो जाएगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने पिछले दिनों स्पष्ट किया कि शिमला, कोच्चि, मैसूर, जयपुर और भुवनेश्वर में अगले वर्ष से प्लास्टिक नोट शुरू हो सकता है, जिसका चलन फिलहाल प्रयोग के तौर पर होगा। उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक हर वर्ष दो लाख करोड़ रुपये के गंदे या कटे-फटे नोट बदलता है।
खूबियों से भरपूर
प्लास्टिक नोट कई मामलों में कागज के नोटों से बेहतर है। न सिर्फ इसके कटने-फटने की आशंका कम रहती है, बल्कि यह अधिक टिकाऊ भी होता है। माना जाता है कि एक प्लास्टिक नोट का जीवनकाल करीब पांच साल होता है। इसके अतिरिक्त सुरक्षा के मामले में भी प्लास्टिक नोट कहीं बेहतर हैं। इस पर किए जाने वाले सुरक्षा के कई उपायों के नकल नहीं हो सकते। जैसे, ट्रांसपेरेंट विंडो, पारदर्शी शब्द या ऐसे अंकों का प्रयोग, जो आसानी से नहीं दिखेंगे। यही वजह है कि इससे जाली नोटों पर भी अंकुश लगने की बात कही जा रही है।
दिक्कतें भी
हालांकि अपने देश में प्लास्टिक नोटों को लेकर कुछ परेशानियां भी आ सकती हैं। उदाहरणस्वरूप, कागज के नोटों की तुलना में इसकी छपाई पर ज्यादा खर्च आएगा। साथ ही अपने देश की गर्म जलवायु भी मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। इसे नष्ट करने का सही तरीका अब तक नहीं खोजा जा सका है, क्योंकि इसे जलाना पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अतिरिक्त ऐसे नोटों को मोड़ने में दिक्कत आती है। ये फिसलदार भी होते हैं, इस कारण इसे गिनना भी कभी-कभी मुश्किल हो जाता है।
अब तक की यात्रा
प्लास्टिक नोट की शुरुआत महज 25 वर्ष पहले हुई है। यह सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में चलन में आया। इसे विकसित करने का श्रेय रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया, मेलबर्न यूनिवर्सिटी और राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन (सीएसआईआरओ) को जाता है। इन्हीं के प्रयासों से ऑस्ट्रेलिया में 1988 में प्लास्टिक नोट प्रयोग के तौर पर शुरू किए गए। सफलता मिलने पर 1996 में इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया के बाद ऐसे नोट ब्रुनेई, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, रोमानिया, वियतनाम, फिजी, मॉरिशस, कनाडा और इस्राइल जैसे देशों में चलन में आए। थाइलैंड में भी प्लास्टिक नोट शुरू किया गया था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। वैसे पिछले पांच वर्षों के दौरान दुनिया के करीब 30 देशों ने प्लास्टिक नोट अपनाया है। अपने देश में वर्ष 2010 से रिजर्व बैंक इस दिशा में काम कर रहा है। 
 
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