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बेहतर कारोबार के लिए अब गुणवत्ता नियंत्रण के साथ-साथ शोरूम के लुक को भी काफी महत्व दिया जाने लगा है। तभी तो विजुअल मर्केंडाइजिंग के प्रोफेशनल्स की आज काफी मांग है...
जो दिखता है, वही बिकता है, यह सूत्र आज की बाजार व्यवस्था पर पूरी तरह से लागू होता है। बेहतर दिखने और बाजार पर राज करने की इसी कशमकश के चलते विजुअल मर्केंडाइजिंग क्षेत्र का तेज गति से विकास हो रहा है। रिटेल सेक्टर में आए उछाल और मॉल कल्चर के बढ़ते कदमों के कारण विजुअल मर्केंडाइजिंग की मांग आज बाजार के सभी क्षेत्रों में बनी हुई है, अब वो चाहे शोरूम हो या फिर रेस्टोरेंट या कोई सर्विस स्टॉल ही क्यों न हो। बाजार में आज हर उस व्यक्ति को विजुअल मर्केंडाइजर की सेवाओं की जरूरत है, जो सीधे-सीधे उपभोक्ता से जुड़ा है।
बढ़ती जरूरत
कुछ साल पहले की बात करें, तो एक विजुअल मर्केंडाइजर की मांग बड़े शोरूम को सजाने-संवारने और आकर्षक बनाने के लिए ही हुआ करती थी, लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भारतीय बाजार में प्रवेश करने से सारा का सारा मंजर ही बदल गया है। काम चाहे कोई भी हो, ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत होने लगी है। मौजूदा हालात यह है कि आज सभी क्षेत्रों में विजुअल मर्केंडाइजिंग का जमकर इस्तेमाल होने लगा है।
कार्य-प्रकृति
विभिन्न उत्पादों को उनके आकार, डिजाइन, रंगों आदि के आधार पर डिस्प्ले करने, सजावटी चीजों को सही जगह पर सजाकर रखने, शोरूम की साज-सज्जा और लाइट आदि का चुनाव करने के लिए विजुअल मर्केंडाइजर की विशेष जरूरत होती है। इसलिए रिटेलिंग सेक्टर, खासकर फैशन इंडस्ट्री में विजुअल मर्केंडाइजिंग एक अनिवार्य हिस्सा हो गया है। विजुअल मर्केंडाइजिंग की बदौलत मामूली से मामूली उत्पाद भी उपभोक्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। मार्केटिंग, मर्केंडाइजिंग, स्टोर डिजाइनिंग और विजुअल मर्केंडाइजिंग की मदद से अपने डिपार्टमेंटल स्टोर को अन्य स्टोरों की तुलना में खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक बनाया जा सकता है और अधिक व्यावसायिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
ग्राहकों को लुभाने के लिए
विजुअल मर्केंडाइजिंग को अगर छवि बनाने की कला कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आपका काम क्लाइंट को ऐसा प्रस्तुतीकरण देना होता है कि ग्राहक उसे देखकर सहज ही उस उत्पाद या शोरूम के प्रति आकर्षित हो जाएं। सामान्य भाषा में कहा जाए तो दुकानों के सामान्य लुक को गुड लुक में बदलने की कुशलता को ही विजुअल मर्केंडाइजिंग कहा जाता है। एक विजुअल मर्केंडाइजर का कार्य होता है ग्राहकों को लुभाना और उन्हें उत्पाद तक खींचकर लाना। आज के दौर में केवल ब्रांड ही नहीं, बल्कि प्रोडक्ट का खास लुक भी अहम स्थान रखता है। किसी भी शोरूम में जाने से पहले ग्राहक उसके डिस्प्ले बोर्ड पर नजर डालता है। अगर वही नीरस होगा, तो वहां जाने का उसका मन ही नहीं करेगा। आज यह काम इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि इसके लिए प्रोफेशनल लोगों की मांग की जाने लगी है और ऐसे ही कामों को विजुअल मर्केंडाइजर अंजाम देता है।
कोर्स और शैक्षणिक योग्यता
विजुअल मर्केंडाइजिंग में डिप्लोमा कोर्स के लिए बुनियादी योग्यता दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना है, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए किसी भी विषय में स्नातक होना आवश्यक है। इन कोर्सेज में विद्यार्थियों को विजुअल मर्केंडाइजिंग की प्रभावकारी रणनीति और व्यावहारिक तरीका तथा सामानों को अच्छी तरह से डिस्प्ले करने की योजना तैयार करना, जिससे उनकी अधिक से अधिक बिक्री हो सके, सिखाया जाता है। विजुअल मर्केंडाइजिंग के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए सबसे जरूरी योग्यता है आपकी सृजनात्मक क्षमता। अगर आप में सृजन की क्षमता है और नई चीजों के साथ-साथ आप बाजार की नब्ज को पहचानते हैं, तो फिर विजुअल मर्केंडाइजिंग के क्षेत्र में अपना अलग स्थान हासिल करना कोई मुश्किल काम नहीं है।
मौके तमाम
विजुअल मर्केंडाइजिंग के क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार की बात करें तो इस फील्ड में भविष्य बहुत उज्ज्वल है। इसका कोर्स करने के उपरांत दुकानों, विज्ञापन कंपनियों, थोक बिक्री वाले संगठनों, ट्रेडिंग हाउस आदि में प्रोडक्ट, ब्रांड या सेल्स एक्जीक्यूटिव के रूप में नियुक्त हो सकते हैं। विजुअल मर्केंडाइजर से संबंधित प्रोडक्शन को-ऑर्डिनेटर, क्वालिटी कंट्रोल सुपरवाइजर, फैशन रिटेलर, एक्सपोर्ट मैनेजर जैसे अन्य प्रकार के कैरियर को भी चुना जा सकता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में होने वाली आदमनी की बात करें, तो यह आपकी क्षमता और अनुभव पर निर्भर करता है। जॉब के अलावा इस क्षेत्र में आप अपने काम की शुरुआत भी कर सकते हैं।
 
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