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कुछ हटकर काम करना हो, तो सोमेलियर यानी वाइन टेस्टिंग एक्सर्ट के रूप में कैरियर की राह बनाई जा सकती है...
वाइन अथवा शराब के सेवन को हमारे समाज में विदेशों की तरह भले ही सामाजिक मान्यता न हो, फिर भी इसका कारोबार दिनोंदिन विस्तार पाता जा रहा है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में विभिन्न रूपों में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी हो रही है। शराब बनाने से लेकर उनकी मार्केटिंग तक विभिन्न रूपों में रोजगार के अवसर इस क्षेत्र में उपलब्ध हैं। सोमेलियर यानी वाइन टेस्टर के रूप में भी इस इंडस्ट्री का हिस्सा बना जा सकता है। रेस्टोरेंट और बार कल्चर के बढ़ते ट्रेंड से ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग भी बढ़ी है।
पाठ्यक्रम की प्रकृति
इस क्षेत्र में मुख्यतः दो स्तर के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं- इंटरमीडिएट और फाउंडेशन। वाइन और लिकर की बनावट संबंधी बारीकियां, उनका साहित्य, उनकी प्रकृति, उनके प्रमुख क्षेत्र, उनको बनाने की विधि, उनके विविध स्तर, उनकी किस्म और उनके क्रियात्मक रूप-रंग के बारे में इस कोर्सेज के तहत जानकारी दी जाती है।
शैक्षणिक योग्यता
भारत में वाइन टेस्टिंग से संबंधित कोर्स विभिन्न संस्थानों में हैं। विदेशों में वाइन की अधिक खपत होने से वहां इस क्षेत्र में अपने देश के मुकाबले पाठ्यक्रमों की संख्या भी अधिक है। डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स के रूप में इस क्षेत्र में कई कोर्स हैं, जिनमें दाखिला लिया जा सकता है। कोर्सेज की अवधि संस्थान की प्रकृति पर निर्भर करती है। इसके अलावा दाखिले की योग्यता भी संस्थान और कोर्स की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। वैसे तो किसी भी संकाय के विद्यार्थी इन कोर्सेज में दाखिला ले सकते हैं, पर केमिस्ट्री के विद्यार्थियों को कोर्सेज के दौरान अधिक सुविधा हो सकती है। होटल मैनेजमेंट से संबंधित कोर्स करके भी वाइन टेस्टिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की जा सकती है।
व्यक्तिगत कुशलता
पेय पदार्थों को बारीकी से जांचने-परखने का हुनर अति आवश्यक है। वाइन टेस्टर के रूप में सफल होने के लिए इससे संबंधित नॉलेज बढ़ाने में आपकी दिलचस्पी होनी चाहिए। जानकारी जितनी विस्तृत होगी, सफलता की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी। ग्राहकों की बात को समझने या उन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कम्युनिकेशन स्किल का दुरूस्त होना भी जरूरी है। लंबे समय तक काम करने की क्षमता भी होनी चाहिए।
मौके कहां-कहां
होटल, रेस्टोरेंट, कैसिनो आदि में सोमेलियर को अवसर मिलते हैं। इसके अलावा लिकर फैक्ट्री में उनकी जरूरत बनी रहती है। इस क्षेत्र से संबंधित मार्केटिंग और आयात-निर्यात कंपनियों में भी आप अपनी सेवाएं दे सकते हैं। अनुभव होने के बाद लिकर कंसल्टेंट के रूप में काम करने का विकल्प भी आपके पास होता है। यदि वाइन मेकिंग से संबंधित टीचिंग में आपकी दिलचस्पी है, तो अध्यापन की ओर भी कदम बढ़ाया जा सकता है। इस क्षेत्र में स्वदेश में तो रोजगार के मौके हैं ही, विदेश में तो और भी ज्यादा हैं।
विदेशों में भी मिलेंगे मौके
आज के ग्राहकों को कैसा स्वाद चाहिए, इसका आकलन जरूरी है। वाइन और ड्रिंक्स की वैरायटी के अलावा उनके टेस्ट की गहरी जानकारी आपको सफलता की ओर ले जाएगी। बढ़ते अनुभव के साथ आपको न सिर्फ देश में, बल्कि विदेशों में भी मौके मिल सकते हैं।
  • पेब्बल स्ट्रीट एंड मोक्षा, दिल्ली
  • इंस्टीट्यूट फॉर वाइन ऐंड बेवरीज स्टडीज, नई दिल्ली
  • http://www.iwbs.in
  • सोनल हॉलैंड वाइन एकेडमी, मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु
  • www.sonalholland.com/
  • टुलीहो बेवरीज एजुकेशन ऐंड ट्रेनिंग, दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई
  • www.tulleeho.com
 
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