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घर की साफ-सफाई तथा कबाड़ निकालने के साथ-साथ ही अपने मन की सफाई भी करें। मन के भावनात्मक कबाड़ को दूर करें। जलन, क्रोध, लालच तथा अतीत की कड़वी यादें एक प्रकार का कबाड़ ही हैं। यह कबाड़ हमारे जीवन में रुकावट पैदा कर आगे बढ़ने से रोकता है। इन सबसे मुक्ति के लिए घर के साथ मन को भी स्वच्छ करें। कष्टदायी चीजों, हालात या नकारात्मक विचार के व्यक्तियों से दूर रहें।
घर हमारी भावना से और भावना हमारे मन से जु़ड़ी रहती है। इसलिए घर के वातावरण को सुखद, शुद्ध रखने के लिए मन की शुद्धि जरूरी है। जहां तक हो सके मन को सकारात्मक भाव से पूर्ण रखें। याद रखें, हमारे मन में पैदा होने वाली भावनाओं में एक चुम्बकीय गुण होता है। ये भावनाएं समान गुण-धर्म वाली चीजों को अपनी ओर आकृष्ट कर लेती हंै। उदाहरण के तौर पर, यदि आप हर समय तबीयत के खराब होने का या धन की कमी का रोना रोती हैं, तो यह चीजें आपको घेरने लगती हैं। आप बार-बार बीमार पड़ती हैं या धन का अभाव रहने लगता है। जब आप कहती हैं कि क्या बताएं बुरा हाल है? तब आप बुरे हालात को खुद न्यौता दे रही होती हैं, क्योंकि आपके मुंह से निकले शब्द ब्रह्मांड में चले जाते हैं तथा वह अपने समान चीजों को अपने में समाने लगते हैं तथा वापस कई गुना होकर आप तक आ जाते हैं।
इसके विपरीत यदि आप सकारात्मक शब्दों का चयन करते हुए कुछ कहती हैं कि मैं ठीक हूं, ईश्वर की कृपा है, तब आप सुखद भाव का अनुभव करती हैं तथा भगवान की कृपा भी बनी रहती है। दूसरों का भला सोचने वाले, खुश रहने वालों की तरफ खुशिया स्वतः खिंची चली आती हैं। इसका प्रभाव उसके मन को दृढ़ और आत्मविश्वासी बनाता है। ऐसे व्यक्तियों के मन तथा भावनाओं का सीधा असर घर के वातावरण पर पड़ता है। घर का वातावरण भी सुखद रहता है।
इनके घर में प्रवेश करते ही आत्मिक शांति का अनुभव होता है। यदि आप भी एक ऐसे ही घर ही इच्छा रखती हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखें।
  • घर को शुद्ध बनाने के लिए घर को हमेशा साफ-सुथरा रखें। घर को साफ रखने से घर में मौजूद नकारात्मक स्थिर ऊर्जा बाहर निकल जाती है। घर और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। सदस्यों में सुखद मानसिक परिवर्तन होता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए घर के स्वच्छ एवं खाली स्‍थान पर एमीथिस्ट क्रिस्टल यानी जम्बूमणि रखें। एमीथिस्ट के अभाव में रॉक क्रिस्टल भी आप रख सकती हैं।
  • घंटी की पवित्र आवाज से घर का वातावरण शुद्ध होता है। अतः कुछ मिनट तक घर में 8 का आकार बनाते हुए निरंतर घंटी बजाएं।
  • गोबर के उपले पर गुग्गल लोबान तथा हवन सामग्री डालकर जलाने से घर का वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। मौसमी बीमारी के कीटाणु भी नष्ट होते हैं। घर के आसपास या घर में तुलसी, नीम तथा स्पाइडर प्लांट लगवाएं। रोजाना नमक के पानी से घर में सफाई करें।
  • यह भी देखें कि घर के आसपास किस प्रकार के लोग रहते हैं, उनके घर का वातावरण कैसा है? यदि नकारात्मक स्थिति है, तो घर के मुख्य द्वार पर शुभ प्रतीक चिह्न लगवाएं। साथ ही दरवाजों की दरारों या टूट-फूट को ठीक करवाएं। यदि दरवाजा बंद करते हुए आवाज करे, तो आवाज दूर करने का उपाय करें।
  • पुरानी और गैरजरूरी चीजों को फेंक दें, क्योंकि यह पॉजिटिव एनर्जी को रोकने का काम करती हैं। फर्श और दीवारों में दरार है, उसे भी ठीक करवा लें।
  • घर के कमरों में इलेक्ट्रॉनिक आइटम्‍स तथा उनके तारों के फैलाव से बचें। इनसे उत्सर्जित होने वाली किरणें नुकसान देती हैं।
घर में हर समय विवाद की स्थिति न बनाएं। निरंतर हो रहे झगड़ांे से भी पॉजिटिव ऊर्जा नष्ट होती है तथा सदस्यों में विरक्ति पैदा होती है। इसलिए नकारात्मक बातें या खराब शब्दों का प्रयोग न करें।
सबकी चाहत होती है कि घर हवादार और सूर्य की रोशनी से युक्त हो और घर में सारी सुख-सुविधाएं हों। ध्यान देने वाली बात ये है कि इसके साथ घर में एक और चीज जरूरी है और वह है घर का वातावरण, जो सकारात्मक होना चाहिए।
 
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