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मेरा पुत्र अभी 12वीं में पढ़ता है और अभी हाल में ही पता चला है कि वो वर्णोध है। वो पिछले दो वर्षों से मेडिकल की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है। वो इस बात से काफी दुखी है कि अब वो नीट के लिए सीवीडी स्क्रीनिंग टेस्ट नहीं दे पाएगा। क्या यह सिर्फ एमबीबीएस के लिए ही लागू होता है? - विनीता सेठ
color blindness rules

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित की गई कमेटी की सिफारिशों के अनुसार, भारतीय मेडिकल काउंसिल को अपने पुराने नियम को बदलते हुए वर्णोध बच्चों को भी नीट परीक्षा देने का मौका देना चाहिए।

इसका परिणाम यह रहा कि वर्णांधता के स्क्रीन टेस्ट के परीक्षण की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। इसके अलावा समिति ने सुझाव दिया कि सीवीडी मेडिकल क्षेत्र में आने के लिए अनिवार्य पैमाना नहीं है। अथति अब केवल नीट की परीक्षा के लिए ही नहीं बल्कि मेडिकल रजिस्टर में पंजीकरण के लिए भी सीवीडी की अनिवार्यता नहीं है। इसके अतिरिक्त इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अभी हाल ही में एमबीबीएस व उच्च डिग्री धारक लोगों की पहचान के लिए नया लोगो पेटेंट कराया है। यह योग्य एलोपैथिक डॉक्टरों को अनाधिकृत व नीमहकीमों से अलग पहचान देगा।

होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और पशु चिकित्सकों एवं फार्मासिस्ट व केमिस्ट को इस लोगो के प्रयोग से वंचित रखा गया है। अगर कोई अनाधिकृत व्यक्ति इस लोगो का प्रयोग करता है, तो उस पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। तो अब आपका बेटा भी स्नातक करके इस लोगो का प्रयोग कर सकता है। उसका आत्मविश्वास बढ़ाएं जिससे वह अपनी पढ़ाई को अच्छे से कर सके।

मैं एक प्रतिष्ठित संस्थान के जन प्रशासन विभाग में कार्यरत हूं। मेरे पास निचले पद पर एक छोटे से एनजीओ में अच्छे वेतनमान पर कार्य करने का प्रस्ताव आया है। क्या इसके बारे में सोचना ठीक होगा? मैं अभी 28 वर्ष की हूं और मैं चुनौती स्वीकार करना चाहती हूं। - मनीषा रस्तोगी
क्या आप पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि आप वर्तमान नौकरी छोड़कर एनजीओ की नौकरी करेंगी। सामान्यतः लोग एनजीओ में नौकरी तभी करना चाहते हैं, जब वे जमीनी स्तर पर कुछ सार्थक या कुछ अलग करना चाहते हैं। इस परिपेक्ष्य में आप वेतनमान की अपेक्षा कुछ सार्थक योगदान देने या सीखने पर अधिक ध्यान देते हैं।

आपने कहा कि जहां आप कार्यरत हैं उससे निचे पद पर मगर अधिक वेतनमान के लिए प्रस्ताव आया है। मेरे अनुसार आप यदि करियर के रूप में एनजीओ में जाना चाहें तो उचित नहीं है मगर किसी और कारण से जाएं। यह इतना भी बुरा नहीं है लेकिन आपको अपनी सोच में स्पष्ट होना चाहिए। एनजीओ के साथ करने में आपको बिल्कुल अलग अनुभव प्राप्त होंगे। आपको आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है जिससे आपको यह पता चलेगा कि आपको क्या करना चाहिए। आपके वर्तमान संस्थान में सीएसआर विभाग में आप काम कर सकते हैं। इसमें काम करके आपको खुद को जानने का मौका मिलेगा। सीएसआर की भूमिका भी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। आप इसके बारे में सोचें।

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